उत्तराखंड

ऊर्जा निगम बिजली खरीदने के लिए 400 करोड़ कर्ज लेगा

Admindelhi1
17 Feb 2024 7:07 AM GMT
ऊर्जा निगम बिजली खरीदने के लिए 400 करोड़ कर्ज लेगा
x

देहरादून: बाजार से लगातार महंगी बिजली खरीदने से ऊर्जा निगम की वित्तीय स्थिति डांवाडोल हो गई है। स्थिति ये हो गई है कि बिजली कंपनियों को उनके बकाया का भुगतान करने, बाजार से बिजली खरीदने को 400 करोड़ का कर्जा लेना पड़ रहा है। गुरुवार को यूपीसीएल बोर्ड ने कर्जा लेने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। जबकि खुद निगम बड़े बकायादारों से करोड़ों की वसूली नहीं कर पा रहा है। यूपीसीएल को प्रतिदिन बाजार से दस करोड़ की बिजली खरीदनी पड़ रही है। ये भुगतान नगद करना होता है। इसके साथ ही जिन कंपनियों से शॉर्ट टर्म पॉवर परचेज एग्रीमेंट के तहत बिजली खरीदी जा रही है, उन्हें भी भुगतान किया जाना है। गैस कंपनियों के बकाया करोड़ों का भुगतान लंबित है। इन कंपनियों के फिक्स चार्ज का बकाया ही कई करोड़ का है।

इन तमाम भुगतान के लिए बजट जुटाने को ऊर्जा निगम के बोर्ड में गुरुवार को 400 करोड़ का कर्ज लेने का प्रस्ताव रखा गया। बोर्ड ने इस प्रस्ताव को कंडीशनल मंजूरी दी। सचिव ऊर्जा आर मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि ऊर्जा निगम ने शासन से भी सब्सिडी और बिना ब्याज का ऋण उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया है। यदि शासन स्तर से ये प्रस्ताव मंजूर होता है, तब ऊर्जा निगम कर्ज नहीं लेगा। बोर्ड ने पदोन्नति में शिथिलता का लाभ देने के शासन के आदेश को यूपीसीएल में भी लागू करने की मंजूरी दी। बोर्ड बैठक में मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, सचिव ऊर्जा आर मीनाक्षी सुंदरम, एमडी अनिल यादव, निदेशक अजय अग्रवाल, नवीन गुप्ता, एमआर आर्य आदि मौजूद रहे।

वाइब्रेंट विलेज में भी पहुंचेगी बिजली

बोर्ड बैठक में राज्य के बॉर्डर एरिया वाले वाइब्रेंट विलेज में भी बिजली पहुंचाने के प्रोजेक्ट पर मुहर लगाई गई। इस योजना में उत्तरकाशी में नेलांग, चमोली में नीति, माणा वैली से लेकर पिथौरागढ़ में व्यास, दारमा, जोहार वैली में पॉवर सप्लाई ग्रिड से पहुंचाई जाएगी।

बकायेदारों से वसूली न होने के चलते लेना पड़ा कर्ज

ऊर्जा निगम को 9800 करोड़ रुपये बिजली बिलों के रूप में वसूलने हैं। अभी 8000 करोड़ की ही वसूली हो पाई है। बड़ी संख्या में करोड़ों के बकाएदारों से वसूली नहीं हो पाई है। फर्नेश कंपनियों, सरकारी संस्थानों पर करोड़ों का बकाया है। फर्नेश उद्योग न तो नियमित बिल भुगतान कर रहे हैं। ऊपर से इनके कारण लाइन लॉस भी हो रहा है। किश्तों की सुविधा इन संस्थानों को अलग से दी जा रही है

Next Story