उत्तराखंड

उत्तराखंड में अक्टूबर का बिजली बिल होगा महंगा, प्रति यूनिट 12 से 54 पैसे तक अतिरिक्त बोझ

Kavita2
1 Oct 2026 9:18 AM IST
उत्तराखंड में अक्टूबर का बिजली बिल होगा महंगा, प्रति यूनिट 12 से 54 पैसे तक अतिरिक्त बोझ
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देहरादून। उत्तराखंड के बिजली उपभोक्ताओं को अक्टूबर महीने में भी महंगे बिजली बिल का सामना करना पड़ेगा। इस महीने उपभोक्ताओं के बिजली बिल में प्रति यूनिट 12 पैसे से लेकर 54 पैसे तक का अतिरिक्त भार जुड़ने वाला है। ऊर्जा निगम ने अक्टूबर महीने के लिए फ्यूल एंड पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट यानी एफपीपीसीए सरचार्ज तय कर दिया है। इसके लागू होने के बाद अलग-अलग श्रेणी के उपभोक्ताओं के बिजली बिल में बढ़ोतरी दर्ज होगी।

प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं पर लगातार अतिरिक्त शुल्क का असर देखने को मिल रहा है। अक्टूबर में भी यह राहत नहीं मिलने वाली है। ऊर्जा निगम की ओर से निर्धारित एफपीपीसीए सरचार्ज के कारण उपभोक्ताओं को अपनी खपत के हिसाब से अतिरिक्त राशि चुकानी होगी। जिन उपभोक्ताओं की बिजली खपत अधिक है, उनके बिल में इसका असर ज्यादा दिखाई देगा।

एफपीपीसीए सरचार्ज बिजली उत्पादन और बिजली खरीद की लागत में होने वाले बदलाव से जुड़ा होता है। बिजली कंपनियों को कई बार मांग पूरी करने के लिए अलग-अलग स्रोतों से बिजली खरीदनी पड़ती है। ईंधन की कीमत, बिजली खरीद की लागत और अन्य खर्चों में बदलाव होने पर इसका समायोजन उपभोक्ताओं के बिल में किया जाता है। इसी प्रक्रिया के तहत अक्टूबर महीने के लिए अतिरिक्त सरचार्ज तय किया गया है।

अक्टूबर में विभिन्न श्रेणियों के उपभोक्ताओं पर अलग-अलग दर से यह अतिरिक्त शुल्क लागू होगा। न्यूनतम स्तर पर 12 पैसे प्रति यूनिट और अधिकतम स्तर पर 54 पैसे प्रति यूनिट तक अतिरिक्त भुगतान करना पड़ेगा। इसका सीधा असर घरेलू से लेकर अन्य श्रेणी के उपभोक्ताओं के मासिक बिजली बिल पर पड़ेगा।

उदाहरण के तौर पर किसी उपभोक्ता की बिजली खपत जितनी अधिक होगी, एफपीपीसीए के रूप में देय अतिरिक्त राशि भी उतनी ही बढ़ेगी। ऐसे परिवार जहां बिजली का इस्तेमाल ज्यादा होता है, उन्हें अक्टूबर के बिल में पिछले सामान्य बिल की तुलना में बढ़ी हुई राशि दिखाई दे सकती है। इसी तरह व्यावसायिक और अन्य श्रेणी के उपभोक्ताओं पर भी निर्धारित दर के अनुसार अतिरिक्त भार पड़ेगा।

बिजली बिल में होने वाली यह बढ़ोतरी ऐसे समय में सामने आई है, जब आम परिवारों के मासिक बजट में बिजली एक महत्वपूर्ण खर्च बन चुकी है। घरों में पंखे, फ्रिज, टीवी, कूलर, एसी, गीजर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल के कारण बिजली की खपत बढ़ती है। ऐसे में प्रति यूनिट कुछ पैसे का अतिरिक्त शुल्क भी पूरे महीने की खपत के हिसाब से बिल में उल्लेखनीय अंतर पैदा कर सकता है।

ऊर्जा निगम की ओर से हर महीने बिजली खरीद की वास्तविक लागत और उससे जुड़े खर्चों का आकलन किया जाता है। इसी आधार पर फ्यूल एंड पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट की दर तय की जाती है। अगर बिजली खरीद की लागत निर्धारित स्तर से ज्यादा होती है तो उसका हिस्सा सरचार्ज के रूप में उपभोक्ताओं से वसूला जाता है। वहीं लागत में कमी आने की स्थिति में इसका प्रभाव अलग तरीके से बिलिंग में दिखाई दे सकता है।

अक्टूबर महीने के लिए तय सरचार्ज से यह स्पष्ट है कि उत्तराखंड के उपभोक्ताओं को फिलहाल बिजली बिल में राहत नहीं मिलने जा रही है। उपभोक्ताओं को अपनी सामान्य बिजली खपत के साथ अतिरिक्त सरचार्ज भी देना होगा। हालांकि कुल बिल कितना बढ़ेगा, यह उपभोक्ता की श्रेणी और इस्तेमाल की गई यूनिट पर निर्भर करेगा।

प्रदेश में बड़ी संख्या में घरेलू बिजली उपभोक्ता हैं। ऐसे में एफपीपीसीए सरचार्ज का असर व्यापक स्तर पर देखने को मिलेगा। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बिजली इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं को अक्टूबर के बिल में संशोधित दर के अनुसार भुगतान करना होगा।

बिजली उपभोक्ताओं के लिए यह जानना भी जरूरी है कि एफपीपीसीए मूल बिजली दर में स्थायी वृद्धि नहीं है, बल्कि बिजली खरीद और ईंधन लागत में बदलाव के आधार पर तय होने वाला समायोजन शुल्क है। इसकी दर अलग-अलग महीनों में बदल सकती है। यही वजह है कि किसी महीने उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार बढ़ सकता है तो किसी दूसरे महीने इसकी दर कम भी हो सकती है।

अक्टूबर में हालांकि उपभोक्ताओं को 12 पैसे से 54 पैसे प्रति यूनिट तक अतिरिक्त भुगतान के लिए तैयार रहना होगा। जिन घरों या प्रतिष्ठानों में हर महीने सैकड़ों यूनिट बिजली की खपत होती है, वहां इस सरचार्ज का असर कुल बिल पर साफ नजर आएगा।

ऊर्जा निगम के इस फैसले के बाद उपभोक्ताओं की नजर अब आने वाले महीनों की दरों पर भी रहेगी। अगर बिजली खरीद की लागत में कमी आती है तो भविष्य में सरचार्ज में राहत मिल सकती है। फिलहाल अक्टूबर में उपभोक्ताओं को बढ़े हुए बिजली बिल का सामना करना पड़ेगा।

कुल मिलाकर उत्तराखंड में अक्टूबर महीने का बिजली बिल उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ डालेगा। ऊर्जा निगम द्वारा तय किए गए फ्यूल एंड पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट सरचार्ज के कारण प्रति यूनिट 12 पैसे से 54 पैसे तक अतिरिक्त राशि देनी होगी। बिजली की खपत जितनी ज्यादा होगी, उपभोक्ता के बिल पर इस अतिरिक्त शुल्क का असर भी उतना ही अधिक दिखाई देगा।

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