उत्तराखंड

एमबीपीजी कॉलेज में चुनावी घमासान एबीवीपी में बगावत से त्रिकोणीय हुआ मुकाबला

Kavita2
22 Sept 2026 9:21 AM IST
एमबीपीजी कॉलेज में चुनावी घमासान एबीवीपी में बगावत से त्रिकोणीय हुआ मुकाबला
x

हल्द्वानी: कुमाऊं के प्रमुख एमबीपीजी कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। अध्यक्ष पद पर इस बार मुकाबला दिलचस्प होने के आसार हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने धीरज बिष्ट को अपना अधिकृत प्रत्याशी बनाया है, जबकि नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) ने मेहुल साह पर दांव लगाया है। वहीं एबीवीपी से जुड़े रहे पूर्व कॉलेज इकाई अध्यक्ष आर्यन बेलवाल ने टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। इससे अध्यक्ष पद का चुनाव त्रिकोणीय होने की स्थिति बन गई है।

एमबीपीजी कॉलेज में छात्रसंघ अध्यक्ष पद पर एनएसयूआई लंबे समय से जीत का इंतजार कर रही है। वर्ष 2014-15 में देवेंद्र नेगी ने एनएसयूआई के टिकट पर अध्यक्ष पद का चुनाव जीता था। इसके बाद संगठन का कोई प्रत्याशी अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज नहीं कर सका। इस बार संगठन ने मेहुल साह को प्रत्याशी बनाकर वापसी की कोशिश शुरू की है। एनएसयूआई के सामने करीब 12 साल से चले आ रहे इस इंतजार को खत्म करने की चुनौती है।

दूसरी ओर एबीवीपी की नजर लगातार तीसरी बार अध्यक्ष पद जीतने पर है। पिछले दो चुनावों में एबीवीपी के प्रत्याशियों ने अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की है। 2025 के छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी के अभिषेक गोस्वामी ने त्रिकोणीय मुकाबले में 1,738 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी कमल बोरा को 1,593 वोट मिले थे। इस बार संगठन ने धीरज बिष्ट को मैदान में उतारा है और लगातार तीसरी जीत हासिल करने के लिए चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं।

हालांकि इस बार एबीवीपी के सामने चुनौती केवल एनएसयूआई की नहीं है। टिकट वितरण के बाद संगठन के भीतर सामने आई बगावत ने चुनावी समीकरण को जटिल बना दिया है। अध्यक्ष पद के लिए धीरज बिष्ट के साथ आर्यन बेलवाल भी दावेदारी कर रहे थे। संगठन ने धीरज को टिकट दिया तो आर्यन ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया।

आर्यन के फैसले के बाद एबीवीपी के कई पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की नाराजगी भी सामने आई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार टिकट वितरण का विरोध करते हुए संगठन से जुड़े कई लोगों ने इस्तीफा देने की पेशकश की। आर्यन के समर्थकों का कहना था कि वह लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहे हैं और उन्हें प्रत्याशी बनाया जाना चाहिए था। दूसरी तरफ एबीवीपी नेतृत्व ने कहा कि प्रत्याशी का चयन विचार-विमर्श के बाद किया गया है और नाराज कार्यकर्ताओं को समझाने का प्रयास किया जाएगा।

एबीवीपी की ओर से आर्यन को मनाने की कोशिश भी की गई। रविवार को संगठन और भाजपा से जुड़े नेताओं ने उनसे बातचीत का प्रयास किया। एबीवीपी के प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि धीरज बिष्ट संगठन के अधिकृत प्रत्याशी हैं और पार्टी अब उन्हें चुनाव लड़ाएगी। साथ ही आर्यन को मनाने की कोशिश जारी रखने की बात कही गई।

आर्यन के निर्दलीय मैदान में बने रहने की स्थिति में अध्यक्ष पद के चुनाव में वोटों का समीकरण बदल सकता है। अब एक तरफ एबीवीपी के धीरज बिष्ट हैं तो दूसरी ओर एनएसयूआई के मेहुल साह और तीसरी तरफ निर्दलीय आर्यन बेलवाल हैं। तीनों प्रत्याशियों के मैदान में होने से छात्रसंघ अध्यक्ष पद पर त्रिकोणीय मुकाबले की तस्वीर उभर रही है।

एमबीपीजी कॉलेज में निर्दलीय प्रत्याशियों की जीत का इतिहास भी रहा है। इससे पहले टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय मैदान में उतरे उम्मीदवार अध्यक्ष पद जीत चुके हैं। वर्ष 2014 में संजय रावत और 2016 में नीरज मेहरा निर्दलीय चुनाव लड़कर अध्यक्ष चुने गए थे। इसी वजह से इस बार आर्यन बेलवाल की निर्दलीय उम्मीदवारी को भी चुनावी समीकरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

इस चुनाव में छात्राओं के लिए 50 प्रतिशत पद आरक्षित किए जाने का मुद्दा भी चर्चा में है। आरक्षण व्यवस्था के कारण दोनों प्रमुख छात्र संगठनों को अन्य पदों पर उम्मीदवार तय करने में भी चुनौती का सामना करना पड़ा है। अध्यक्ष पद के प्रत्याशियों की घोषणा के साथ कॉलेज परिसर में प्रचार और छात्र संपर्क अभियान तेज हो गया है।

अब सभी की निगाहें 29 सितंबर पर टिकी हैं। चुनाव परिणाम तय करेगा कि एबीवीपी लगातार तीसरी बार अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज करती है, एनएसयूआई लंबे अंतराल के बाद वापसी करती है या निर्दलीय प्रत्याशी आर्यन बेलवाल चुनावी समीकरण में नया मोड़ लाते हैं। फिलहाल तीन प्रमुख दावेदारों के मैदान में होने से एमबीपीजी कॉलेज का छात्रसंघ चुनाव रोचक स्थिति में पहुंच गया है।

Next Story