उत्तराखंड

केदारनाथ मार्ग पर बोल्डर गिरने से बुजुर्ग की मौत

Kavita2
14 Sept 2026 9:42 AM IST
केदारनाथ मार्ग पर बोल्डर गिरने से बुजुर्ग की मौत
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रुद्रप्रयाग। केदारनाथ धाम के पैदल मार्ग पर चीरबासा हेलीपैड के पास रविवार को बड़ा हादसा हो गया। पहाड़ी से अचानक गिरे पत्थरों और बोल्डरों की चपेट में आने से 65 वर्षीय व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक की पहचान उखीमठ निवासी मदन मोहन तिवारी के रूप में हुई है। हादसे के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलने पर संबंधित विभागों की टीमें घटनास्थल की ओर रवाना हुईं, लेकिन लगातार बारिश, रास्ते पर जमा मलबे और भूस्खलन के खतरे के कारण राहत कार्य में मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, चीरबासा हेलीपैड के पास पहाड़ी से पत्थर और मलबा गिरने की घटना हुई। इसी दौरान वहां से गुजर रहे मदन मोहन तिवारी बोल्डरों की चपेट में आ गए। गंभीर चोट लगने के कारण उन्होंने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। घटना की जानकारी मिलते ही यात्रा मार्ग पर मौजूद यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोकने की प्रक्रिया शुरू की गई। प्रशासन ने दुर्घटनास्थल के आसपास आवाजाही प्रतिबंधित करते हुए लोगों से जोखिम वाले क्षेत्र की ओर नहीं जाने की अपील की है।

केदारनाथ घाटी में लगातार हो रही बारिश के कारण पैदल मार्ग के कई हिस्सों में भूस्खलन और पत्थर गिरने का खतरा बना हुआ है। चीरबासा के पास मलबा आने से रास्ता पूरी तरह बाधित हो गया। पैदल मार्ग बंद होने और ऊपर से लगातार पत्थर गिरने की आशंका को देखते हुए मलबा हटाने का काम भी सावधानीपूर्वक किया जा रहा है। खराब मौसम के बीच भारी मशीनें और श्रमिक तुरंत मौके तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। सुरक्षा कारणों से किसी भी कर्मचारी अथवा यात्री को खतरे वाले हिस्से से गुजरने की अनुमति नहीं दी जा रही है।

यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने केदारनाथ धाम की पैदल यात्रा अस्थायी रूप से रोक दी है। धाम की ओर जाने वाले श्रद्धालुओं को सोनप्रयाग और गौरीकुंड में सुरक्षित स्थानों पर रोका गया है। प्रशासनिक अधिकारियों और यात्रा प्रबंधन से जुड़े कर्मचारियों को दोनों पड़ावों पर तैनात किया गया है। यात्रियों से कहा गया है कि वे मौसम और मार्ग की स्थिति सामान्य होने तक आगे बढ़ने का प्रयास न करें तथा प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करें।

वहीं, केदारनाथ धाम से नीचे लौट रहे यात्रियों को जंगलचट्टी में रोका गया है। मार्ग के बाधित हिस्से पर एक साथ दोनों दिशाओं से यात्रियों के पहुंचने पर स्थिति ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकती है। इसी कारण ऊपर से नीचे आने वाले श्रद्धालुओं को भी सुरक्षित पड़ाव पर प्रतीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन द्वारा यात्रियों की संख्या और उनकी आवश्यकताओं की जानकारी जुटाई जा रही है। मौसम साफ होने और मार्ग की जांच पूरी होने के बाद ही उन्हें आगे भेजने का निर्णय लिया जाएगा।

लगातार बारिश के कारण पैदल मार्ग पर फिसलन भी बढ़ गई है। कई जगह पहाड़ी से पानी बहने के साथ छोटे पत्थर और मिट्टी रास्ते पर आ रही है। ऐसी परिस्थितियों में घोड़े-खच्चरों की आवाजाही भी जोखिमपूर्ण हो जाती है। यात्रा मार्ग पर तैनात सुरक्षा कर्मचारियों को संवेदनशील स्थानों की निगरानी करने और श्रद्धालुओं को खतरे वाले हिस्सों से दूर रखने के निर्देश दिए गए हैं। स्थानीय स्तर पर लाउडस्पीकर और अन्य माध्यमों से भी यात्रियों को स्थिति की जानकारी दी जा रही है।

प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती चीरबासा के पास जमा मलबे को हटाने के साथ पहाड़ी की स्थिति का आकलन करना है। रास्ते से मलबा साफ कर देने के बाद भी यदि ऊपर की ओर चट्टानें अस्थिर रहती हैं तो यात्रा तत्काल शुरू करना सुरक्षित नहीं होगा। संबंधित विभागों की तकनीकी टीम से मार्ग और पहाड़ी का निरीक्षण कराने के बाद ही यात्रा बहाल किए जाने की संभावना है। पैदल मार्ग खोले जाने से पहले यह भी देखा जाएगा कि यात्रियों, घोड़े-खच्चरों और सामान ले जाने वाले श्रमिकों की सुरक्षित आवाजाही संभव है अथवा नहीं।

केदारनाथ धाम का पैदल मार्ग गौरीकुंड से शुरू होता है और चीरबासा, जंगलचट्टी तथा अन्य पड़ावों से होकर धाम तक पहुंचता है। पर्वतीय क्षेत्र होने के कारण बारिश के दिनों में इस मार्ग पर भूस्खलन, पत्थर गिरने और रास्ता क्षतिग्रस्त होने का खतरा बढ़ जाता है। कई स्थानों पर मार्ग संकरा है और एक ओर खड़ी पहाड़ी तो दूसरी ओर गहरी ढलान होने के कारण छोटी सी लापरवाही भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है।

अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और यात्रा शुरू होने से संबंधित आधिकारिक सूचना की प्रतीक्षा करें। सोनप्रयाग और गौरीकुंड पहुंचने से पहले मौसम तथा मार्ग की स्थिति की जानकारी लेने को कहा गया है। श्रद्धालुओं को नदी-नालों, भूस्खलन संभावित ढलानों और पत्थर गिरने वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह भी दी गई है।

चीरबासा हादसे ने एक बार फिर बरसात के दौरान केदारनाथ पैदल मार्ग की चुनौतियों को सामने ला दिया है। फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान बाधित रास्ते को सुरक्षित बनाने, फंसे यात्रियों की व्यवस्था करने और किसी दूसरी अप्रिय घटना को रोकने पर है। मौसम में सुधार तथा मलबा हटाए जाने के बाद ही पैदल यात्रा दोबारा शुरू की जाएगी। घटना और यात्रा स्थगित किए जाने की जानकारी ताजा रिपोर्टों में भी सामने आई है। अधिकारियों के हवाले से एक व्यक्ति की मौत और यात्रा अस्थायी रूप से रोके जाने की पुष्टि की है।

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