
देहरादून। उत्तराखंड की एक राज्यसभा सीट के लिए होने वाले चुनाव में भाजपा ने दिनेश आर्य को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने रविवार को उनके नाम पर मुहर लगाई। उम्मीदवार की घोषणा से पहले प्रदेश भाजपा में कई नामों को लेकर चर्चा चल रही थी। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के मुताबिक, कोर कमेटी में करीब 24 नामों पर विचार हुआ था और 15 नामों का पैनल केंद्रीय नेतृत्व को भेजा गया था। आखिरकार केंद्रीय चुनाव समिति ने दिनेश आर्य को प्रत्याशी बनाया।
दिनेश आर्य का चयन इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वह लंबे समय से भाजपा संगठन से जुड़े हुए हैं, लेकिन प्रदेश की राजनीति में बड़े सार्वजनिक चेहरों की तुलना में अपेक्षाकृत कम चर्चा में रहे हैं। पार्टी ने संगठन में काम कर चुके नेता को राज्यसभा का टिकट देकर उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी के लिए आगे किया है।
दिनेश आर्य नैनीताल से ताल्लुक रखते हैं। वर्तमान में वह उत्तराखंड राज्यस्तरीय पेयजल अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष हैं और उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त है। इससे पहले वह नैनीताल भाजपा के जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ भी उनका पुराना कार्य संबंध रहा है। वर्ष 2021 में वह मुख्यमंत्री धामी के जनसंपर्क अधिकारी के रूप में काम कर चुके हैं।
आर्य का संगठनात्मक अनुभव भाजपा के अनुसूचित जाति मोर्चा से भी जुड़ा रहा है। वह पार्टी के अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इसके अलावा पंजाब में भी उन्हें संगठन से जुड़ी जिम्मेदारी दी गई थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक वह वर्ष 2002 से भाजपा से जुड़े हुए हैं और लंबे समय से पार्टी के विभिन्न स्तरों पर सक्रिय रहे हैं।
वर्ष 2022 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले भी दिनेश आर्य का नाम चर्चा में आया था। उन्होंने नैनीताल विधानसभा सीट से भाजपा का टिकट पाने के लिए दावेदारी की थी। हालांकि उस समय पार्टी ने उन्हें विधानसभा चुनाव का टिकट नहीं दिया था। अब करीब चार साल बाद भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें सीधे राज्यसभा चुनाव के लिए प्रत्याशी बनाकर महत्वपूर्ण अवसर दिया है।
दिनेश आर्य अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं। उनके चयन को लेकर प्रदेश में सामाजिक प्रतिनिधित्व की चर्चा भी हो रही है। कुछ राजनीतिक रिपोर्टों में उनकी उम्मीदवारी को भाजपा की दलित समुदाय तक पहुंच की रणनीति से जोड़कर देखा गया है। हालांकि पार्टी की ओर से उम्मीदवार घोषित करते समय इसे किसी एक राजनीतिक घटनाक्रम की प्रतिक्रिया के रूप में आधिकारिक तौर पर नहीं बताया गया है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने दिनेश आर्य को उम्मीदवार बनाए जाने पर केंद्रीय नेतृत्व का आभार जताया। उन्होंने आर्य को संगठन से जुड़े जमीनी और समर्पित कार्यकर्ता के रूप में पेश किया। भट्ट ने कहा कि पार्टी में सामान्य कार्यकर्ता के समर्पण और निष्ठा को महत्व दिया जाता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आर्य के सार्वजनिक और संगठनात्मक अनुभव का लाभ उत्तराखंड को राज्यसभा में मिलेगा।
इसी दौरान महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उनकी टिप्पणी हाल में हल्द्वानी में हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ विवाद के संदर्भ में थी। कांग्रेस ने इस मामले को लेकर भाजपा पर दलित विरोधी होने के आरोप लगाए थे, जबकि भाजपा ने इस आयोजन से संगठनात्मक संबंध होने से इनकार किया था। अब आर्य की उम्मीदवारी के बाद भाजपा प्रदेश नेतृत्व ने कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए अनुसूचित जाति समुदाय के प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया है।
उत्तराखंड की जिस राज्यसभा सीट के लिए चुनाव हो रहा है, वह मौजूदा भाजपा सांसद नरेश बंसल का कार्यकाल समाप्त होने के कारण रिक्त हो रही है। नरेश बंसल का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त होगा। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक राज्यसभा सीट के लिए मतदान 16 अक्टूबर को होगा और इसी दिन मतगणना भी की जाएगी।
राज्यसभा चुनाव की अधिसूचना 29 सितंबर को जारी हुई थी। उम्मीदवारों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर निर्धारित की गई है। 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 9 अक्टूबर तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे। मतदान 16 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा और शाम 5 बजे से मतगणना शुरू होगी।
दिनेश आर्य की उम्मीदवारी में कुमाऊं क्षेत्र के प्रतिनिधित्व का पहलू भी महत्वपूर्ण है। वह नैनीताल से आते हैं और लंबे समय तक इसी क्षेत्र में संगठन की जिम्मेदारियां निभाते रहे हैं। मौजूदा समय में उत्तराखंड से भाजपा के तीनों राज्यसभा सदस्य गढ़वाल क्षेत्र से हैं। ऐसे में कुमाऊं के नेता को उम्मीदवार बनाए जाने को क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के नजरिए से भी देखा जा रहा है।
प्रदेश भाजपा के भीतर उम्मीदवार चयन से पहले व्यापक मंथन हुआ था। करीब 24 नामों पर चर्चा के बाद केंद्रीय नेतृत्व के पास 15 नाम भेजे गए थे। इस सूची से दिनेश आर्य का चयन होना उनके लंबे संगठनात्मक अनुभव और पार्टी में निभाई गई जिम्मेदारियों को चर्चा के केंद्र में ले आया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भी दिनेश आर्य ने उम्मीदवार घोषित होने के बाद मुलाकात की। आर्य पहले धामी के जनसंपर्क अधिकारी रह चुके हैं, इसलिए उनके राजनीतिक सफर में मुख्यमंत्री के साथ पुराने कार्य संबंध का पहलू भी चर्चा में है। हालांकि भाजपा ने आधिकारिक रूप से उम्मीदवार चयन का आधार संगठन के प्रति उनकी निष्ठा और लंबे राजनीतिक अनुभव को बताया है।
अब सबकी नजर नामांकन प्रक्रिया पर है। भाजपा की ओर से दिनेश आर्य को प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद उत्तराखंड की राज्यसभा सीट का चुनावी घटनाक्रम तेज हो गया है। संगठन में जिला स्तर से लेकर राष्ट्रीय मोर्चे तक जिम्मेदारी संभाल चुके आर्य के लिए यह पहला अवसर है जब पार्टी ने उन्हें संसद के उच्च सदन के लिए मैदान में उतारा है।





