उत्तराखंड

दिनेश आर्य बने भाजपा के राज्यसभा प्रत्याशी

Kavita2
4 Oct 2026 3:46 PM IST
दिनेश आर्य बने भाजपा के राज्यसभा प्रत्याशी
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देहरादून। भारतीय जनता पार्टी ने उत्तराखंड से होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए दिनेश आर्य को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने रविवार को उनके नाम पर मुहर लगाई। दिनेश आर्य नैनीताल क्षेत्र से आते हैं और लंबे समय से भाजपा संगठन से जुड़े हुए हैं। वह नैनीताल भाजपा के जिलाध्यक्ष समेत संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। वर्तमान में वह राज्यस्तरीय पेयजल अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष हैं, जिसे राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त है।

दिनेश आर्य को राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने को उत्तराखंड भाजपा की सामाजिक और संगठनात्मक रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वह अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं। मीडिया रिपोर्टों में उनके चयन को दलित प्रतिनिधित्व बढ़ाने की भाजपा की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि इसे विपक्ष के किसी खास राजनीतिक अभियान की सीधी प्रतिक्रिया मानना एक राजनीतिक व्याख्या है, न कि पार्टी की ओर से घोषित आधिकारिक कारण।

दिनेश आर्य की पहचान भाजपा के ऐसे नेताओं में रही है, जिन्होंने संगठन में लंबे समय तक काम किया है। वह नैनीताल भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष हैं और भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा में भी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उन्होंने विधानसभा चुनाव में टिकट के लिए भी दावेदारी की थी। अब केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाकर राष्ट्रीय राजनीति में आगे बढ़ने का अवसर दिया है।

उनकी राजनीतिक यात्रा के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी पृष्ठभूमि की भी चर्चा हो रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनका परिवार लंबे समय से संघ और भाजपा की विचारधारा से जुड़ा रहा है। उनके पिता बची राम आर्य भी स्थानीय राजनीति और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रहे। बताया जाता है कि वह हल्द्वानी नगरपालिका में सभासद रहने के साथ संगठन में भी जिम्मेदारी निभा चुके थे।

दिनेश आर्य के बारे में बताया जाता है कि उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और 1998 में संघ शिक्षा वर्ग का तृतीय वर्ष प्रशिक्षण किया था। उस समय प्रोफेसर राजेंद्र सिंह ‘रज्जू भैया’ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक थे। आर्य की इसी वैचारिक और संगठनात्मक पृष्ठभूमि को उनके समर्थक उनकी बड़ी ताकत के रूप में देखते हैं।

भाजपा के भीतर राज्यसभा उम्मीदवार को लेकर कई नामों पर चर्चा चल रही थी। प्रदेश भाजपा की कोर कमेटी में करीब 24 नामों पर मंथन हुआ था और इसके बाद केंद्रीय नेतृत्व के पास लगभग 15 नामों का पैनल भेजे जाने की जानकारी सामने आई थी। आखिरकार केंद्रीय चुनाव समिति ने दिनेश आर्य के नाम पर अंतिम मुहर लगाई। इस लिहाज से उनका चयन कई दावेदारों के बीच संगठन से जुड़े पुराने चेहरे को आगे बढ़ाने के फैसले के रूप में भी देखा जा रहा है।

उत्तराखंड की यह राज्यसभा सीट मौजूदा सांसद नरेश बंसल का कार्यकाल समाप्त होने के कारण खाली हो रही है। उनका कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को पूरा होना है। चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक इस सीट के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होगा और उसी दिन मतगणना भी होगी।

दिनेश आर्य के चयन में सामाजिक समीकरण भी चर्चा के केंद्र में हैं। उत्तराखंड की राजनीति में अनुसूचित जाति समुदाय का महत्वपूर्ण स्थान है। भाजपा ने आर्य को उच्च सदन का प्रत्याशी बनाकर इस समुदाय से आने वाले अपने पुराने संगठनात्मक नेता को आगे बढ़ाया है। राजनीतिक विश्लेषणों में इसे पार्टी की सामाजिक प्रतिनिधित्व की रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।

आर्य का नाम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वह किसी बड़े संवैधानिक या चुनावी पद पर रहने वाले चर्चित चेहरे के बजाय संगठन से आगे आए नेता हैं। भाजपा में जिलाध्यक्ष जैसे पद पर काम करते हुए उन्होंने स्थानीय संगठन के साथ लंबे समय तक काम किया है। इसके अलावा अनुसूचित जाति मोर्चा से जुड़े रहने के कारण उनका सामाजिक संगठन में भी अनुभव रहा है।

वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले दिनेश आर्य ने नैनीताल विधानसभा क्षेत्र से भाजपा टिकट के लिए दावेदारी की थी। उस समय उन्हें विधानसभा चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिला। उन्होंने तब खुद को वर्ष 2002 से भाजपा में सक्रिय बताया था। चार साल बाद पार्टी नेतृत्व ने उन्हें सीधे राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाकर बड़ी जिम्मेदारी की ओर बढ़ाया है।

राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार घोषित होने के बाद अब नामांकन प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। भाजपा के पास उत्तराखंड विधानसभा में मजबूत संख्या बल है, लेकिन अंतिम स्थिति नामांकन और चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। इसलिए दिनेश आर्य को अभी राज्यसभा सदस्य के बजाय राज्यसभा प्रत्याशी कहना ही तथ्यात्मक रूप से सही है। मतदान 16 अक्टूबर को निर्धारित है।

दिनेश आर्य का चयन भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए भी संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि संगठन में लंबे समय तक काम करने वाले नेताओं को आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है। जिलास्तर से लेकर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के संगठनात्मक दायित्वों तक काम कर चुके आर्य को अब उच्च सदन के चुनाव में उतारा गया है।

भाजपा ने आधिकारिक तौर पर उत्तराखंड से दिनेश आर्य के साथ पश्चिम बंगाल से रुक्मिणी मल्लिक (कोयल मल्लिक) को भी राज्यसभा उम्मीदवार घोषित किया है। उत्तराखंड में आर्य की उम्मीदवारी के बाद अब राजनीतिक चर्चा उनके संगठनात्मक अनुभव, संघ पृष्ठभूमि और अनुसूचित जाति प्रतिनिधित्व के इर्द-गिर्द केंद्रित हो गई है।

कुल मिलाकर भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने उत्तराखंड की राज्यसभा सीट के लिए दिनेश आर्य को चुनकर संगठन से निकले एक पुराने नेता पर भरोसा जताया है। अब सबकी नजर नामांकन प्रक्रिया और 16 अक्टूबर को होने वाले राज्यसभा चुनाव पर रहेगी।

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