उत्तराखंड

नवरात्र की नवमी पर हर प्रखंड में नौ महिलाओं का सम्मान करेगी धामी सरकार

Kavita2
2 Oct 2026 3:17 PM IST
नवरात्र की नवमी पर हर प्रखंड में नौ महिलाओं का सम्मान करेगी धामी सरकार
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देहरादून। उत्तराखंड सरकार शारदीय नवरात्र की नवमी तिथि पर प्रदेश के सभी प्रखंडों में नौ-नौ महिलाओं को सम्मानित करने की तैयारी कर रही है। इन महिलाओं का चयन चिकित्सा, शिक्षा, खेल, समाजसेवा और अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाओं के रूप में किया जाएगा। इस प्रस्ताव को लेकर चार अक्टूबर को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विधानसभा क्षेत्र चंपावत के बनबसा में होने वाली राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में निर्णय लिए जाने की तैयारी है।

सरकार की प्रस्तावित पहल का उद्देश्य नवरात्र के धार्मिक और सांस्कृतिक संदर्भ को महिलाओं के सम्मान से जोड़ना है। योजना के तहत प्रदेश के प्रत्येक प्रखंड से नौ महिलाओं का चयन किए जाने की बात सामने आई है। ये महिलाएं अपने-अपने क्षेत्रों में काम करते हुए समाज और प्रदेश के विकास में योगदान दे रही हैं। चिकित्सा, शिक्षा, खेल और समाजसेवा के साथ अन्य क्षेत्रों में सक्रिय महिलाओं को भी इसमें शामिल किया जाएगा।

शारदीय नवरात्र में देवी के नौ रूपों की पूजा की परंपरा है। इसी पृष्ठभूमि में सरकार की ओर से नौ महिलाओं को सम्मानित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके माध्यम से महिला शक्ति, उपलब्धियों और सामाजिक योगदान को सार्वजनिक रूप से पहचान देने की योजना बताई जा रही है। प्रस्ताव को अंतिम रूप कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही मिलेगा।

चंपावत में 4 अक्टूबर को कैबिनेट बैठक

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के गृह जिले चंपावत के बनबसा में चार अक्टूबर को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक प्रस्तावित है। यह पहली बार होगा जब धामी मंत्रिमंडल की बैठक चंपावत जिले में आयोजित की जाएगी। बैठक के लिए प्रशासनिक तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और संबंधित अधिकारियों ने आयोजन स्थल, रूट प्लान तथा अन्य व्यवस्थाओं का निरीक्षण भी किया है।

इसी बैठक में महिलाओं के सम्मान से जुड़ा प्रस्ताव रखे जाने की संभावना है। इसके अलावा कैबिनेट में प्रदेश से जुड़े अन्य नीतिगत और जनहित के प्रस्तावों पर भी चर्चा हो सकती है। हालांकि नौ महिलाओं के सम्मान संबंधी प्रस्ताव को लेकर अंतिम निर्णय मंत्रिमंडल की बैठक में ही होगा।

नौ देवियों के रूपक से महिलाओं का सम्मान

प्रस्तावित कार्यक्रम में प्रत्येक प्रखंड से नौ महिलाओं को सम्मानित करने का विचार सामने आया है। नवरात्र की नवमी को देवी के नौ स्वरूपों की आराधना होती है। ऐसे में समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय महिलाओं को सम्मानित करने की इस पहल को उसी सांस्कृतिक संदर्भ से जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार का उद्देश्य महिलाओं की उपलब्धियों को सामने लाना और उनके योगदान को सार्वजनिक पहचान देना बताया गया है।

चिकित्सा क्षेत्र की महिला चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी, शिक्षा क्षेत्र में योगदान देने वाली शिक्षिकाएं एवं अन्य कर्मी, खेल जगत में उपलब्धियां हासिल करने वाली खिलाड़ी, समाजसेवा में सक्रिय महिलाएं तथा अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय काम करने वाली महिलाओं का चयन किया जा सकता है। चयन की विस्तृत प्रक्रिया और मानक कैबिनेट के निर्णय के बाद स्पष्ट होंगे।

पहले से चल रही महिला केंद्रित योजनाएं

उत्तराखंड सरकार की ओर से महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक प्रगति के लिए कई योजनाएं संचालित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। इनमें नंदा गौरा योजना, मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना और मुख्यमंत्री नारी शक्ति योजना शामिल हैं। इसके अलावा राज्य सरकार ने सरकारी नौकरियों में उत्तराखंड की मूल निवासी महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान भी किया है।

सरकार अब नवरात्र के दौरान महिलाओं को सम्मान देने की इस पहल को इन प्रयासों की अगली कड़ी के रूप में आगे बढ़ाने की तैयारी में है। हालांकि सम्मान समारोह का स्वरूप, चयन समिति और कार्यक्रम का विस्तृत खाका कैबिनेट के फैसले के बाद सामने आएगा।

हर प्रखंड में चयन की तैयारी

प्रस्ताव के अनुसार राज्य के सभी प्रखंडों को कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इसका अर्थ है कि सम्मान केवल राजधानी या बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में काम कर रही महिलाओं को भी पहचान मिल सकती है। इससे स्थानीय स्तर पर महिलाओं की उपलब्धियों को सामने लाने का अवसर मिलेगा।

प्रखंड स्तर पर महिलाओं का चयन होने के बाद उन्हें सम्मानित करने के लिए स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं। चयन में अलग-अलग क्षेत्रों में योगदान को महत्व दिया जाना प्रस्तावित है। इससे चिकित्सा, शिक्षा, खेल और समाजसेवा जैसी गतिविधियों में काम कर रही महिलाओं की उपलब्धियां समुदाय के सामने आ सकेंगी।

नारी सशक्तीकरण पर सरकार का जोर

प्रस्तावित योजना में महिला सम्मान को नवरात्र से जोड़कर व्यापक सामाजिक संदेश देने की कोशिश दिखाई देती है। धार्मिक पर्व के दौरान महिलाओं की उपलब्धियों को सार्वजनिक मंच पर सम्मानित करने से समाज में उनके योगदान को रेखांकित किया जा सकता है। सरकार का उद्देश्य इसे केवल एक औपचारिक कार्यक्रम के बजाय महिला सशक्तीकरण से जोड़ने का है।

उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में महिलाएं शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वरोजगार, सामाजिक कार्य, कृषि और अन्य क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाती हैं। दूरस्थ क्षेत्रों में सीमित संसाधनों के बावजूद काम करने वाली महिलाओं को पहचान दिलाने से स्थानीय स्तर पर भी ऐसी गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।

सरकार के प्रस्ताव पर कैबिनेट की मुहर का इंतजार

फिलहाल नौ महिलाओं के सम्मान का प्रस्ताव अभी कैबिनेट की मंजूरी के चरण में है। चार अक्टूबर को बनबसा में होने वाली बैठक में इसे रखा जा सकता है। कैबिनेट की स्वीकृति के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कार्यक्रम किस प्रारूप में होगा, महिलाओं के चयन की प्रक्रिया क्या होगी और सम्मान समारोह कब आयोजित किए जाएंगे।

चंपावत में होने वाली कैबिनेट बैठक को लेकर प्रशासनिक तैयारियां भी तेज हैं। जिला प्रशासन ने आयोजन स्थल और जरूरी संसाधनों की समीक्षा की है। इससे संकेत मिलता है कि चार अक्टूबर की बैठक को लेकर राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन दोनों स्तरों पर तैयारियां चल रही हैं।

नवमी के दिन होगा कार्यक्रम

प्रस्तावित योजना के अनुसार शारदीय नवरात्र की नवमी के दिन प्रत्येक प्रखंड में नौ महिलाओं का सम्मान किया जाएगा। इस तरह पूरे प्रदेश में एक साथ बड़ी संख्या में महिलाओं को सार्वजनिक रूप से सम्मानित करने की व्यवस्था बन सकती है। योजना लागू होने पर चिकित्सा, शिक्षा, खेल, समाजसेवा और अन्य क्षेत्रों में काम करने वाली महिलाओं को स्थानीय स्तर पर पहचान मिलेगी।

सरकार पहले से महिलाओं की उन्नति और आर्थिक स्वावलंबन के लिए योजनाएं चला रही है। ऐसे में नवरात्र के दौरान सम्मान की यह पहल महिलाओं के योगदान को सामाजिक स्तर पर रेखांकित करने का अतिरिक्त माध्यम बन सकती है। हालांकि चयन प्रक्रिया और कार्यक्रम की अंतिम रूपरेखा कैबिनेट के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।

चार अक्टूबर की कैबिनेट बैठक अब इस प्रस्ताव के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलती है तो प्रदेश के सभी प्रखंडों में सम्मान समारोह की तैयारियां आगे बढ़ेंगी और नवमी के दिन चयनित महिलाओं को सम्मानित किया जा सकेगा। फिलहाल सरकार के प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय का इंतजार है।

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