उत्तराखंड
Dhami सरकार का विकास पर जोर, किसानों और पंचायतों को मिलेगा बढ़ावा
Ratna Netam
27 Oct 2026 6:06 PM IST

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देहरादून : 27 अक्टूबर 2026। उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने राज्य के विकास कार्यों को गति देने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में बढ़ोतरी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रदेश मंत्रिमंडल ने 7,412 करोड़ रुपये के अनुपूरक बजट को मंजूरी दी है। इसे मूल बजट में जोड़ने पर कुल बजटीय आकार लगभग 1.19 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा। सरकार की वित्तीय प्राथमिकताओं में कृषि, ग्रामीण विकास, बुनियादी ढांचा, शहरी सुविधाएं और स्थानीय निकायों को मजबूत बनाना शामिल है। बढ़े हुए बजटीय संसाधनों से विभिन्न विकास परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में 22 अक्टूबर को हुई कैबिनेट बैठक में अनुपूरक बजट सहित करीब 26 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई थी। अनुपूरक बजट को विधानसभा में प्रस्तुत करने का निर्णय लिया गया।
1.11 लाख करोड़ से बढ़कर 1.19 लाख करोड़ के करीब पहुंचा बजट
उत्तराखंड सरकार ने मार्च 2026 में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1,11,703.21 करोड़ रुपये का मूल बजट प्रस्तुत किया था।अब 7,412 करोड़ रुपये के अनुपूरक बजट को जोड़ने पर कुल राशि लगभग 1,19,115 करोड़ रुपये हो जाती है।इस अतिरिक्त वित्तीय प्रावधान से राज्य सरकार को पहले से संचालित योजनाओं और नई आवश्यकताओं के लिए संसाधन उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।हालांकि अनुपूरक बजट को कैबिनेट की मंजूरी मिलना और विधानसभा से इसकी स्वीकृति प्राप्त होना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं।
कृषि और किसानों के लिए बजट में महत्वपूर्ण प्रावधान
उत्तराखंड सरकार ने वर्ष 2026-27 के मूल बजट में कृषि एवं संबंधित गतिविधियों के लिए 6,078 करोड़ रुपये निर्धारित किए हैं।यह पिछले वित्तीय वर्ष के संशोधित अनुमान की तुलना में लगभग 18 प्रतिशत अधिक है।बागवानी और सब्जियों की खेती के लिए 710 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में खेती, बागवानी और कृषि आधारित आजीविका रोजगार के महत्वपूर्ण साधन हैं। ऐसे में कृषि क्षेत्र के लिए वित्तीय सहायता बढ़ने से किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर विकसित करने पर भी सरकार का जोर है।
सड़क और बुनियादी ढांचे के विकास को मिलेगी गति
उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में सड़क संपर्क और बुनियादी सुविधाओं का विकास महत्वपूर्ण चुनौती है।वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में सड़कों और पुलों पर पूंजीगत व्यय के लिए 2,106 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।इसके अलावा परिवहन क्षेत्र के लिए 3,038 करोड़ रुपये और ऊर्जा क्षेत्र के लिए 1,749 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।सरकार का उद्देश्य पर्वतीय तथा दूरस्थ क्षेत्रों में संपर्क सुविधाओं को बेहतर बनाना है।बेहतर सड़कों से किसानों को अपने उत्पाद बाजार तक पहुंचाने, पर्यटकों को विभिन्न स्थानों तक आने-जाने और स्थानीय कारोबार को बढ़ाने में सहायता मिल सकती है।
नगर निकायों और पंचायतों को मिलेगा वित्तीय सहयोग
उत्तराखंड सरकार शहरी और ग्रामीण स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है।मूल बजट में शहरी विकास के लिए 1,931 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसमें छोटे और मध्यम शहरों के एकीकृत विकास के लिए 1,710 करोड़ रुपये शामिल हैं।इसके अतिरिक्त 16वें वित्त आयोग ने वर्ष 2026 से 2031 की अवधि के लिए उत्तराखंड के शहरी स्थानीय निकायों हेतु 2,497 करोड़ रुपये और ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए 4,047 करोड़ रुपये के अनुदान की सिफारिश की है।इन संसाधनों से पेयजल, स्वच्छता, सड़क, सार्वजनिक सुविधाओं और स्थानीय प्रशासन से संबंधित कार्यों को मजबूती मिल सकती है।
ग्रामीण विकास और रोजगार पर विशेष ध्यान
धामी सरकार ने ग्रामीण विकास को भी बजट की प्राथमिकताओं में स्थान दिया है।वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ग्रामीण विकास क्षेत्र में 5,533 करोड़ रुपये का प्रावधान है, जो पिछले वर्ष के संशोधित अनुमान से करीब 28 प्रतिशत अधिक है।ग्रामीण रोजगार और आजीविका से जुड़ी योजनाओं के लिए भी वित्तीय संसाधन निर्धारित किए गए हैं।राज्य के पर्वतीय गांवों से पलायन रोकने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन महत्वपूर्ण होगा।
अतिरिक्त बजट से विकास परियोजनाओं को उम्मीद
उत्तराखंड सरकार का कहना है कि राज्य के समग्र विकास के लिए वित्तीय प्रबंधन और योजनाओं के प्रभावी संचालन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।अनुपूरक बजट से विभागों को अतिरिक्त संसाधन मिलने की संभावना है। हालांकि कृषि, बुनियादी ढांचे और स्थानीय निकायों को इस अतिरिक्त 7,412 करोड़ रुपये में से कितनी राशि मिलेगी, इसका स्पष्ट विभागवार विवरण उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं मिला है।अब विधानसभा की स्वीकृति और धनराशि के विभागवार आवंटन पर नजर रहेगी। अतिरिक्त संसाधनों का समय पर उपयोग सुनिश्चित होने से प्रदेश में विकास कार्यों को गति मिल सकती है।
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