
देहरादून: शहर को बढ़ते यातायात दबाव और जाम की समस्या से राहत दिलाने वाली बहुप्रतीक्षित रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड रोड परियोजना के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने परियोजना को अंतिम मंजूरी देने से पहले इसकी सुरक्षा और तकनीकी पहलुओं की दोबारा जांच कराने का निर्णय लिया है। इसके तहत परियोजना क्षेत्र की हाइड्रोलॉजिकल स्टडी (जल विज्ञान संबंधी अध्ययन) फिर से कराई जाएगी।
देहरादून में लंबे समय से प्रस्तावित यह एलिवेटेड रोड परियोजना शहर के प्रमुख यातायात मार्गों पर बढ़ते दबाव को कम करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। रिस्पना और बिंदाल नदी क्षेत्रों के आसपास बनने वाली इस परियोजना से शहर के भीतर आने-जाने वाले वाहनों की आवाजाही आसान होने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, अब तक परियोजना को लेकर कई तकनीकी और पर्यावरणीय पहलुओं की समीक्षा जारी है।
एनएचएआई ने परियोजना को मंजूरी देने से पहले सुरक्षा मानकों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए जल प्रवाह, बाढ़ की संभावना और नदी क्षेत्र की परिस्थितियों का विस्तृत अध्ययन कराने का फैसला किया है। अधिकारियों का मानना है कि किसी भी बड़े निर्माण कार्य से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि भविष्य में जल निकासी व्यवस्था या प्राकृतिक जल प्रवाह पर इसका प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
हाइड्रोलॉजिकल स्टडी के तहत यह अध्ययन किया जाएगा कि बारिश के दौरान नदियों और आसपास के क्षेत्रों में पानी का प्रवाह किस प्रकार रहता है। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि प्रस्तावित एलिवेटेड रोड के निर्माण से जल निकासी व्यवस्था, बाढ़ के जोखिम और आसपास के इलाकों की सुरक्षा पर कोई असर तो नहीं पड़ेगा।
सूत्रों के अनुसार, पहले भी इस परियोजना को लेकर तकनीकी अध्ययन किए गए थे, लेकिन एनएचएआई ने वर्तमान परिस्थितियों और सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए नए सिरे से अध्ययन कराने का निर्णय लिया है। अधिकारियों का कहना है कि परियोजना की गुणवत्ता और दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह प्रक्रिया जरूरी है।
रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड रोड परियोजना को देहरादून के लिए एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजना माना जा रहा है। राजधानी शहर में लगातार बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के कारण प्रमुख सड़कों पर जाम की समस्या गंभीर होती जा रही है। खासकर पीक ऑवर्स में कई इलाकों में यातायात का दबाव बढ़ जाता है, जिससे लोगों को लंबा समय सड़कों पर बिताना पड़ता है।
प्रस्तावित एलिवेटेड रोड के जरिए शहर के व्यस्त हिस्सों में यातायात का दबाव कम करने और लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने की योजना है। परियोजना पूरी होने के बाद शहर के कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों की आवाजाही अधिक सुगम होने की उम्मीद है।
हालांकि, परियोजना में हो रही देरी को लेकर शहर के लोगों में निराशा भी है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि देहरादून में यातायात समस्या लगातार बढ़ रही है और जल्द से जल्द इस परियोजना को धरातल पर उतारने की जरूरत है। उनका मानना है कि हर चरण में होने वाली देरी से शहरवासियों को लंबे समय तक जाम की परेशानी झेलनी पड़ रही है।
वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े निर्माण प्रोजेक्ट में जल्दबाजी के बजाय सुरक्षा और पर्यावरणीय पहलुओं की पूरी जांच जरूरी होती है। विशेष रूप से नदी क्षेत्रों से जुड़ी परियोजनाओं में जल प्रवाह और बाढ़ के संभावित प्रभावों का अध्ययन करना बेहद महत्वपूर्ण है। यदि निर्माण से पहले सभी तकनीकी पहलुओं की सही तरीके से जांच कर ली जाए तो भविष्य में होने वाली समस्याओं से बचा जा सकता है।
एनएचएआई अधिकारियों के अनुसार, हाइड्रोलॉजिकल स्टडी पूरी होने के बाद ही परियोजना को आगे बढ़ाने से संबंधित अंतिम निर्णय लिया जाएगा। अध्ययन रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक बदलाव या अतिरिक्त सुरक्षा उपाय भी सुझाए जा सकते हैं।
राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन भी इस परियोजना को महत्वपूर्ण मान रहे हैं। देहरादून में बेहतर यातायात व्यवस्था विकसित करने के लिए कई योजनाओं पर काम किया जा रहा है और रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड रोड उनमें से एक प्रमुख योजना है।
अधिकारियों का कहना है कि परियोजना को सुरक्षित और प्रभावी तरीके से पूरा करना प्राथमिकता है। इसके लिए सभी तकनीकी जांच और आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा किया जाएगा। हालांकि इससे परियोजना की समयसीमा प्रभावित हो सकती है, लेकिन भविष्य में किसी भी तरह की समस्या से बचने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है।
फिलहाल शहरवासियों को इस परियोजना के लिए थोड़ा और इंतजार करना होगा। एनएचएआई की नई हाइड्रोलॉजिकल स्टडी के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि परियोजना में क्या बदलाव किए जाएंगे और निर्माण कार्य कब तक शुरू हो सकेगा। देहरादून की यातायात समस्या के समाधान के लिए अहम मानी जा रही इस योजना पर अब सभी की नजर एनएचएआई की अगली रिपोर्ट और फैसले पर टिकी है।





