
देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की हवा में सुधार का असर अब स्वच्छ वायु सर्वेक्षण की रैंकिंग में भी दिखाई देने लगा है। केंद्र सरकार के स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में देहरादून ने एक साल के भीतर सात स्थानों की छलांग लगाई है। तीन से दस लाख आबादी वाले शहरों की श्रेणी में देहरादून अब 12वें स्थान पर पहुंच गया है। वर्ष 2025 में दून इस श्रेणी में 19वें स्थान पर था।
विशेषज्ञों के अनुसार, देहरादून की रैंकिंग में सुधार किसी एक वर्ष के प्रयास का परिणाम नहीं है, बल्कि पिछले कई वर्षों से किए जा रहे लगातार प्रयासों का असर है। शहर में प्रदूषण नियंत्रण, धूल प्रबंधन और वायु गुणवत्ता सुधार के लिए उठाए गए कदमों का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है।
कई वर्षों की मेहनत का दिखा असर
देहरादून की स्वच्छ वायु रैंकिंग में सुधार को लेकर अधिकारियों का कहना है कि यह बदलाव लंबे समय से चल रही योजनाओं और प्रयासों का परिणाम है। शहर में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग स्तरों पर काम किया गया।
हालांकि, कुछ समय पहले देहरादून की रैंकिंग में गिरावट भी आई थी। इसके बाद नगर प्रशासन और संबंधित विभागों ने प्रदूषण के प्रमुख कारणों पर ध्यान केंद्रित किया। लगातार निगरानी और सुधारात्मक कदमों के चलते अब स्थिति बेहतर हुई है।
पीएम स्तर में आई कमी
वायु गुणवत्ता सुधार का सबसे बड़ा संकेत हवा में मौजूद सूक्ष्म कणों यानी पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) के स्तर में कमी आना है। विशेषज्ञों के मुताबिक, पीएम-10 और पीएम-2.5 जैसे प्रदूषक तत्वों में कमी आने से हवा की गुणवत्ता में सुधार दर्ज किया गया है।
शहर में बढ़ते वाहनों, निर्माण कार्यों और धूल को प्रदूषण का प्रमुख कारण माना जाता है। इन पर नियंत्रण के लिए किए गए प्रयासों से हवा में मौजूद प्रदूषणकारी कणों में कमी आई है।
धूल नियंत्रण पर रहा विशेष फोकस
देहरादून जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों में निर्माण गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। निर्माण कार्यों और सड़कों से उड़ने वाली धूल वायु प्रदूषण का बड़ा कारण बनती है।
इसे नियंत्रित करने के लिए सड़कों की सफाई व्यवस्था बेहतर करने, निर्माण स्थलों पर नियमों का पालन कराने और धूल रोकने के उपायों पर जोर दिया गया। इन प्रयासों का असर स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में भी दिखाई दिया है।
वाहनों के प्रदूषण पर भी नियंत्रण की कोशिश
शहर में वाहनों की बढ़ती संख्या भी वायु प्रदूषण की एक बड़ी वजह रही है। इसे देखते हुए यातायात व्यवस्था सुधारने, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर निगरानी जैसे कदम उठाए गए।
इसके अलावा लोगों को स्वच्छ ईंधन और पर्यावरण अनुकूल विकल्पों की ओर बढ़ने के लिए भी जागरूक किया गया।
रैंकिंग में सुधार से बढ़ा भरोसा
देहरादून की रैंकिंग में सात स्थान का सुधार प्रशासन और पर्यावरण विशेषज्ञों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। तीन से दस लाख आबादी वाले शहरों में 12वीं रैंक हासिल करना शहर की वायु गुणवत्ता सुधार दिशा में बढ़ते कदमों को दर्शाता है।
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि अभी भी लगातार प्रयास जारी रखने की जरूरत है। बढ़ती आबादी और तेजी से हो रहे शहरी विस्तार के कारण आने वाले समय में प्रदूषण नियंत्रण एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी।
स्वच्छ हवा के लिए आगे भी जारी रखने होंगे प्रयास
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी शहर की वायु गुणवत्ता में स्थायी सुधार के लिए लंबे समय तक लगातार काम करना जरूरी होता है। केवल रैंकिंग सुधारना ही लक्ष्य नहीं होना चाहिए, बल्कि नागरिकों को स्वच्छ और स्वस्थ हवा उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए।
देहरादून में हरित क्षेत्र बढ़ाने, प्रदूषण स्रोतों की पहचान करने और प्रभावी निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने जैसे कदम भविष्य में भी महत्वपूर्ण रहेंगे।
प्रशासन ने जताई संतुष्टि
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में देहरादून की बेहतर रैंकिंग को लेकर प्रशासन ने संतोष जताया है। अधिकारियों का कहना है कि शहर की हवा को और बेहतर बनाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि रैंकिंग में सुधार यह साबित करता है कि लगातार किए गए प्रयासों से सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। आने वाले समय में प्रदूषण नियंत्रण के लिए और प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।
देहरादून की सात पायदान की छलांग शहर के लिए उत्साहजनक खबर है। यह सुधार बताता है कि लंबे समय तक किए गए प्रयासों से वायु गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सकता है। हालांकि, स्वच्छ हवा का लक्ष्य हासिल करने के लिए आगे भी लगातार सतर्कता और प्रयासों की जरूरत बनी रहेगी।





