उत्तराखंड

Dehradun: दो चरणों में होंगे उत्तराखंड पंचायत चुनाव, 31 जुलाई को नतीजे

Admindelhi1
28 Jun 2025 6:26 PM IST
Dehradun: दो चरणों में होंगे उत्तराखंड पंचायत चुनाव, 31 जुलाई को नतीजे
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देहरादून: उत्तराखंड की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में एक बार फिर से गहमा-गहमी लौट आई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने 12 जिलों में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी है। इन चुनावों को लेकर अब पूरे प्रदेश में चुनावी गतिविधियों ने रफ्तार पकड़ ली है। खास बात यह है कि इस बार पंचायत चुनाव दो चरणों में होंगे और राज्य का हरिद्वार जिला इसमें शामिल नहीं होगा। शेष 12 जिलों में कुल 66,418 पदों पर चुनाव कराए जाएंगे। इसके लिए 8,276 मतदान केंद्रों और 10,529 मतदान स्थलों का निर्धारण किया गया है।

हरिद्वार को छोड़ बाकी 12 जिलों में पंचायत चुनाव

उत्तराखंड सरकार की अधिसूचना के बाद, राज्य निर्वाचन आयोग ने भी पंचायत चुनाव के लिए विस्तृत कार्यक्रम घोषित कर दिया है। हरिद्वार जिले को छोड़कर बाकी के 12 जिलों—देहरादून, नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, पौड़ी, टिहरी, चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, बागेश्वर, चंपावत, अल्मोड़ा और उत्तरकाशी—में चुनाव प्रक्रिया संपन्न होगी। कुल 89 विकासखंडों की 7,499 ग्राम पंचायतों में विभिन्न पदों के लिए मतदान होगा।

दो चरणों में होंगे चुनाव, 31 जुलाई को होगी मतगणना

राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, पंचायत चुनाव दो चरणों में कराए जाएंगे। पहले चरण का मतदान 24 जुलाई और दूसरे चरण का मतदान 28 जुलाई को होगा। मतदान के बाद, मतगणना की प्रक्रिया 31 जुलाई को एक साथ करवाई जाएगी। यह फैसला राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा प्रदेश के चुनावी माहौल को व्यवस्थित और निष्पक्ष बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।

कुल 66,418 पदों पर होंगे चुनाव

इस पंचायत चुनाव में ग्राम स्तर से लेकर जिला स्तर तक के कुल 66,418 पदों के लिए उम्मीदवार मैदान में उतरेंगे। इन पदों में शामिल हैं:

सदस्य ग्राम पंचायत: 55,587 पद

प्रधान ग्राम पंचायत: 7,499 पद

सदस्य क्षेत्र पंचायत: 2,974 पद

सदस्य जिला पंचायत: 358 पद

यह चुनाव राज्य की लोकतांत्रिक जड़ों को मजबूत करने का एक सशक्त माध्यम बनने जा रहा है। राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव को स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण कराने की दिशा में तैयारियां तेज कर दी हैं।

नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश से रुका था कार्यक्रम

गौरतलब है कि 21 जून को राज्य निर्वाचन आयोग ने जब पहली बार पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी की थी, उसी समय से पूरे प्रदेश में आदर्श आचार संहिता लागू कर दी गई थी। लेकिन इसके कुछ समय बाद नैनीताल हाईकोर्ट के एक आदेश के चलते आयोग को चुनाव कार्यक्रम को अग्रिम आदेशों तक स्थगित करना पड़ा था। हालांकि अब अदालत से हरी झंडी मिलने के बाद निर्वाचन आयोग ने संशोधित अधिसूचना जारी कर दी है।

निर्वाचन अधिकारियों द्वारा 30 जून को अधिसूचना

निर्वाचन कार्यक्रम के तहत 30 जून को सभी संबंधित जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों के लिए चुनाव की अधिसूचना जारी करेंगे। इसके बाद नामांकन की प्रक्रिया शुरू होगी। उम्मीद जताई जा रही है कि राज्य भर में हजारों की संख्या में प्रत्याशी अपने नामांकन पत्र दाखिल करेंगे, जिससे चुनावी माहौल गर्मा जाएगा।

प्रशासन की चुनावी तैयारियां तेज

राज्य प्रशासन ने चुनाव को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से कराने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। सुरक्षा व्यवस्था से लेकर मतदान कर्मियों के प्रशिक्षण तक की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से अंजाम दिया जा रहा है। हर मतदान केंद्र पर सुरक्षा बलों की तैनाती सुनिश्चित की जा रही है ताकि कहीं भी किसी प्रकार की अशांति न फैले।

महिला और युवा मतदाताओं से बड़ी उम्मीदें

इस बार के पंचायत चुनाव में महिला और युवा मतदाताओं की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और उन्हें पंचायतों में आरक्षण के तहत प्रतिनिधित्व मिल रहा है। इसके अलावा, युवा मतदाता भी गांव की राजनीति में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने को उत्साहित नजर आ रहे हैं।

डिजिटल माध्यम से चुनावी सूचनाएं

राज्य निर्वाचन आयोग ने इस बार पंचायत चुनाव को अधिक पारदर्शी और जानकारीपरक बनाने के लिए डिजिटल माध्यमों का भरपूर उपयोग किया है। चुनावी कार्यक्रम, मतदान केंद्रों की जानकारी, मतदाता सूची सहित अन्य सूचनाएं आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई हैं। साथ ही निर्वाचन से जुड़ी शिकायतों के लिए एक हेल्पलाइन नंबर और मोबाइल एप भी जारी किया गया है।

निष्पक्ष चुनाव के लिए आयोग की अपील

राज्य निर्वाचन आयुक्त ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे लोकतंत्र के इस पर्व में बढ़-चढ़कर भाग लें। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों, स्थानीय प्रत्याशियों और मतदाताओं से सहयोग की अपेक्षा करते हुए कहा कि सभी लोग चुनाव आचार संहिता का पालन करें और शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा लें।

निष्कर्ष

उत्तराखंड में पंचायत चुनाव केवल एक प्रशासनिक कवायद नहीं, बल्कि लोकतंत्र की बुनियाद को मजबूत करने की एक अनूठी प्रक्रिया है। इससे न केवल ग्रामीण विकास को गति मिलेगी, बल्कि जन-प्रतिनिधित्व के ज़रिए गांव-गांव में समस्याओं के समाधान के नए द्वार भी खुलेंगे। दो चरणों में होने वाले इन चुनावों की मतगणना 31 जुलाई को होगी, और उसके साथ ही प्रदेश के ग्रामीण राजनीतिक परिदृश्य में नई तस्वीर उभरेगी।

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