उत्तराखंड

Dehradun: उत्तराखंड में आत्मनिर्भरता पर जोर, महिलाओं-युवाओं और ग्रामीण उद्यमियों को मिलेगा बढ़ावा

Admindelhi1
21 Aug 2026 5:46 PM IST
Dehradun: उत्तराखंड में आत्मनिर्भरता पर जोर, महिलाओं-युवाओं और ग्रामीण उद्यमियों को मिलेगा बढ़ावा
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ग्रामीण उद्यमियों को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भर उत्तराखंड बनाने पर सरकार का जोर

देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना के तहत ‘चौपाल-2026’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने देहरादून के आईटी पार्क स्थित 13 गांव में प्रदेश के सभी जिलों के स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों के विपणन के लिए राज्य स्तरीय विपणन केंद्र खोलने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार महिला, युवा और ग्रामीण उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि 'मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना' के माध्यम से अब तक प्रदेश में 13 हजार से अधिक उद्यमियों को सहयोग दिया गया है। वहीं, आठ हजार से अधिक महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों को उद्यमिता एवं आजीविका के अवसरों से जोड़ा गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के गांव अब प्रदेश के विकास में सहभागी बनने के साथ आत्मनिर्भर उत्तराखंड के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। प्रदेश के युवाओं और मातृशक्ति में हुनर और कुछ कर गुजरने का जज्बा है, जबकि स्थानीय उत्पादों में देश-दुनिया के बाजार तक पहुंचने की क्षमता है। जरूरत केवल हुनर को सही दिशा और बाजार उपलब्ध कराने की है। इसी सोच के साथ 'मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना' को आगे बढ़ाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि योजना के तहत ग्रामीण उद्यमियों को व्यवसाय शुरू करने और उसका विस्तार करने के लिए प्रशिक्षण, आर्थिक सहयोग, तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार से जोड़ने में सहायता दी जा रही है। सरकार का प्रयास है कि उत्तराखंड का युवा रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बने।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से प्रदेश में पांच लाख से अधिक ग्रामीण महिलाओं को 70 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा जा चुका है। इनमें तीन लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बनने में सफल रही हैं। प्रदेश की महिलाएं पहाड़ी मसालों, मंडुवा, झंगोरा, दालों, शहद, अचार, जैम, हस्तशिल्प, ऊनी उत्पादों और स्थानीय कला को कारोबार का रूप दे रही हैं।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण उत्पादों को देश के बड़े शहरों तक पहुंचाने के लिए ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ अंब्रेला ब्रांड तैयार किया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘लोकल टू ग्लोबल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के मंत्र को धरातल पर उतारने के लिए ग्रामीण हाट, विपणन केंद्र, कलेक्शन सेंटर और एग्री सर्विस सेंटर जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण उद्यमिता का एक बड़ा उद्देश्य पलायन रोकना भी है। सरकार चाहती है कि युवाओं को रोजगार के लिए गांव छोड़ने की मजबूरी न हो। ‘ग्रामोत्थान परियोजना’ के माध्यम से गांवों के अति निर्धन परिवारों को आजीविका से जोड़कर रोजगार के अवसर बढ़ाए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी 13 जिलों में मुख्यमंत्री उद्यमशाला चौपाल आयोजित की जा रही हैं। इसके माध्यम से सरकारी योजनाओं की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाई जा रही है। योजना की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए प्रचार वैन भी संचालित की जा रही हैं।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने लखपति दीदियों और महिला उद्यमियों को सम्मानित किया। उन्होंने उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की पुस्तक और वार्षिक रिपोर्ट का विमोचन किया। साथ ही एकीकृत कृषि क्लस्टर आधारित प्रशिक्षण एवं मॉड्यूल, शिशु एवं लघु बाल आहार मॉड्यूल तथा महिलाओं एवं बच्चों में एनीमिया की रोकथाम एवं प्रबंधन मॉड्यूल का लोकार्पण किया।

इस अवसर पर राज्य के कैबिनेट मंत्री भरत चौधरी, गणेश जोशी, खजान दास, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक उमेश शर्मा काऊ, सविता कपूर, सचिव ग्राम्य विकास धीराज गर्ब्याल सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

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