उत्तराखंड

Dehradun: सुरेश जोशी का कांग्रेस पर तीखा हमला

Admindelhi1
21 Aug 2025 8:22 PM IST
Dehradun: सुरेश जोशी का कांग्रेस पर तीखा हमला
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देहरादून: भाजपा ने गैरसैंण विधानसभा सत्र में पारित विधेयकों पर संतोष व्यक्त करते हुए कांग्रेस पर असंवेदनशील और गैरजिम्मेदाराना रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता सुरेश जोशी ने कहा कि जनहित पर चर्चा के बजाय कांग्रेस विधायकों को ब्रांडेड कंबलों में सदन के अंदर खरांटे लेते सबने देखा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का मकसद चर्चा नहीं केवल हंगामा करने का था। उन्होंने कार्यमंत्रणा समिति से नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह के इस्तीफे को अपनी नाकामी छिपाने की कोशिश बताया।

देहरादून पार्टी मुख्यालय में पत्राकारों से बातचीत में सुरेश जोशी ने कहा कि जनभावनाओं का सम्मान करते हुए ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में मानसून सत्र आयोजित किया गया। कई महत्वपूर्ण विधयेक पारित किए गए। चाहे उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक 2025 हो या उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता एवं विधि विरुद्ध प्रतिषेध संशोधन विधेयक 2025 जो अवैध धर्मांतरण की रोकथाम को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सजा को आजीवन कारावास तक बढ़ाने संस्बंधित था। अनुपूरक बजट को पारित किया गया।

उन्होंने कहा कि कोई भी इस पक्ष में नहीं होगा कि विधानसभा सत्र चर्चाहीन, हंगामेदार रहे। जिस उद्देश्य से जनता ने अपने प्रतिनिधि सदन में चुन कर भेजे हैं वो जनहित के मुद्दे न उठाएं, लेकिन जिस तरह का हंगामा, तोड़फोड़, शोर शराबा, अभद्र भाषा का प्रयोग कांग्रेस विधायकों ने सदन में किया, वह दुर्भाग्यपूर्ण, असंवैधानिक, अलोकतांत्रिक और संवेदनहीनता की पराकाष्ठा था। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस शुरुआत से ही गैरसैंण में सत्र कराने और उसमें सार्थक चर्चा के पक्ष में नहीं थी। उनका मकसद और रणनीति केवल और केवल हंगामा करना और मीडिया की सुर्खियां बटोरना था। एक और वजह थी कांग्रेस के हंगामा की, वो रही पूर्व के चुनावों की तरह इस बार पंचायत चुनाव में भी उनकी करारी हार। इस पराजय को स्वीकार करते हुए सदन की चर्चा का सामना करना भी उनके लिए असंभव था। उन्होंने धराली, पौड़ी आदि स्थानों की त्रासदी का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश आपदा के दंश का साहस से सामना कर रहा है लेकिन बेहद शर्मनाक और असंवेदनशील रवैया रहा विपक्ष का जिन्होंने इस पूरे विषय पर गंभीर चर्चा तक सदन में नहीं होने दी

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