
देहरादून: उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की भरपाई के लिए प्रधानमंत्री के राज्य सरकार के प्रस्तावित मांग से काफी कम
राशि का आर्थिक पैकेज देने पर कांग्रेस ने निराशा जताई है। कांग्रेस ने कहा कि प्रधानमंत्री का मान रखते हुए उसे स्वीकार करेंगे लेकिन यह बड़े खेद का विषय है। उन्होंने राज्य में आई इतनी भीषण आपदा के लिए राहत राशि के तौर पर मात्र 1200 करोड़ की घोषणा की जो कि बहुत ही निराशाजनक है।
शुक्रवार को उत्तराखंड कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत व केंद्रीय चुनाव समिति के सदस्य पूर्व नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने संयुक्त पत्रकार वार्ता की। उन्होंने कहा कि राज्य में दैवीय आपदा से व्यापक जनहानि के साथ-साथ धन हानि भी हुई है। राज्य में 2013 की दैवीय आपदा जब आई थी, तब केंद्र और राज्य में कांग्रेस की सरकार थी, उस वक्त दैवीय आपदा के मानकों में व्यापक स्तर पर परिवर्तन किए थे गए । उसी का नतीजा था कि हम आपदा प्रभावितों का पुनर्वास और विस्थापन करने में सफल हो पाए और आपदा को काबू कर पाए।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इस वक्त केंद्र सरकार ने जो धनराशि आवंटित की है, वह नाकाफी है और राज्य सरकार से यह अपेक्षा रहेगी कि वह और धन के लिए पैरवी करें। प्रीतम सिंह ने यह भी कहा की मलिन बस्तियों को उजाड़ने का जिस तरह से षड्यंत्रकारी काम एलिवेटेड रोड के नाम से राज्य सरकार कर रही है, कांग्रेस उसका विरोध करती हैं। जब भी मलिन बस्तियों पर कोई विपत्ति आई है तो कांग्रेस ने हमेशा उनके साथ खड़े होने का काम किया है।
उन्होंने कांग्रेस काल में 582 मलिन बस्तियों को चिन्हित करने का काम किया गया था और उनको मालिकाना हक देने का काम प्रगति पर था। कांग्रेस ने उन्हें संरक्षण देने का भी वादा किया था और यह एक्ट विधानसभा से पारित है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि सभी लोगों की प्रधानमंत्री से बड़ी अपेक्षा थी कि कम से कम राज्य सरकार की आकलन की गई राशि आवंटित करेंगे, लेकिन कम धनराशि घोषित की गई है, उसने राज्यवासियों और आपदा पीड़ितों को भी निराश किया है। उनकी जो आकांक्षाएं और अपेक्षाएं पुनर्वास और पुनर्निमाण की थी, उसको झटका लगा है।





