उत्तराखंड

Dehradun: स्मार्ट सिटी योजना में भ्रष्टाचार और अनियमितताएं, कैग ने रिपोर्ट में उठाया मुद्दा

Admindelhi1
11 March 2026 1:45 AM IST
Dehradun: स्मार्ट सिटी योजना में भ्रष्टाचार और अनियमितताएं, कैग ने रिपोर्ट में उठाया मुद्दा
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देहरादून: भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में देहरादून में संचालित स्मार्ट सिटी परियोजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। मंगलवार को विधानसभा में प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार भारत सरकार के स्मार्ट सिटी मिशन के तहत वर्ष 2015 में शुरू की गई देहरादून स्मार्ट सिटी परियोजना निर्धारित समयसीमा में पूरी नहीं हो सकी और इसके कार्यान्वयन में वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताएं सामने आईं।

मंगलवार को विधानसभा में पेश रिपोर्ट के अनुसार परियोजना को जून 2023 तक पूरा किया जाना था, लेकिन जून 2024 तक भी इसे पूर्ण नहीं किया जा सका। वर्ष 2022-23 तक परियोजना के लिए 733.50 करोड़ रुपये जारी किए गए, जबकि 634.11 करोड़ रुपये ही व्यय हो सके। डीपीआर में शामिल कई स्मार्ट समाधान या तो हटा दिए गए अथवा क्रियान्वयन के अभाव में निष्क्रिय रहे। दो इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर में बायोमेट्रिक एवं सेंसर आधारित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन मॉड्यूल फरवरी 2025 तक उपयोग में नहीं लाया जा सका, जिससे 4.55 करोड़ रुपये का व्यय निष्प्रयोज्य रहा।

स्मार्ट अपशिष्ट प्रबंधन के तहत 90 लाख रुपये की लागत से खरीदे गए ई-रिक्शा लगभग दो वर्ष तक उपयोग में नहीं लाए गए। स्मार्ट स्कूल परियोजना के अंतर्गत 5.91 करोड़ रुपये की लागत से तीन सरकारी विद्यालयों में स्थापित इंटरएक्टिव बोर्ड, कंप्यूटर लैब, प्रोजेक्टर, ई-कंटेंट, सीसीटीवी और बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली निष्क्रिय पाई गई। पर्यावरण संरक्षण पर 2.62 करोड़ रुपये तथा मल्टी यूटिलिटी डक्ट पर 3.24 करोड़ रुपये का व्यय भी अपेक्षित परिणाम नहीं दे सका।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि परियोजना प्रबंधन सलाहकार (पीएमसी) को भुगतान की संरचना लक्ष्य आधारित नहीं थी, जिसके कारण अधूरी परियोजनाओं के बावजूद भुगतान किया गया। ‘सिटीज इन्वेस्टमेंट टू इनोवेट, इंटीग्रेटेड एंड सस्टेन’ परियोजना के अंतर्गत पारिश्रमिक दावों और पीएमसी भुगतान में 5.19 करोड़ रुपये की अनियमितता पाई गई। कार्यदायी संस्थाओं को समय पर कार्यस्थल उपलब्ध न कराने से आठ परियोजनाओं में 19 से 38 माह तक की देरी हुई।

कैग ने राज्य स्तरीय उच्च अधिकार संचालन समिति की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। अंतर-विभागीय टास्क फोर्स के गठन के बावजूद विभागों के बीच समन्वय की कमी दूर नहीं हो सकी। इसके अतिरिक्त देहरादून स्मार्ट सिटी लिमिटेड में पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी और वित्त नियंत्रक की नियुक्ति नहीं होने को भी परियोजना के प्रभावी संचालन में बाधा बताया गया है।

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