Dehradun: ई-बीआरटीएस और रोपवे परियोजनाओं में प्रशासन की सक्रियता

देहरादून: आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को उत्तराखंड ई-बीआरटीएस (इलेक्ट्रिक-बस रैपिड ट्रांजिट) सहित विभिन्न ट्रांजिट परियोजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक बृजेश कुमार मिश्रा सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश क्षेत्र की बहुप्रतीक्षित परियोजनाओं की अद्यतन प्रगति प्रस्तुत की। सचिव ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार भविष्य की जरूरतों के अनुरूप शहरी ट्रांसपोर्ट सिस्टम विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
बैठक में बताया गया कि ऋषिकेश में त्रिवेणी घाट से नीलकंठ मंदिर तक प्रस्तावित रोपवे परियोजना को आवश्यक अनुमोदन प्राप्त हो चुका है। स्टेज-1 फॉरेस्ट क्लीयरेंस के लिए आवेदन भी किया जा चुका है। यह परियोजना श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ाने के साथ पर्वतीय यातायात दबाव कम करने में सहायक होगी।
बैठक में हरिद्वार में डीडीयू पार्किंग-चंडी देवी-मनसा देवी मल्टीमॉडल हब को जोड़ने वाली इंटीग्रेटेड रोपवे परियोजना पर भी चर्चा हुई। पीआरटी परियोजना के तहत चार कॉरिडोर प्रस्तावित हैं, जिनकी कुल लंबाई 20.73 किमी और 21 स्टेशन होंगे। तीर्थ सीजन में यातायात प्रबंधन को यह परियोजना नई दिशा दे सकती है।
देहरादून में ई-बीआरटीएस परियोजना के अंतर्गत आईएसबीटी से रायपुर तक 31.52 किमी लंबा मेगा कॉरिडोर प्रस्तावित है, जिसमें 35 स्टेशन होंगे। बैठक के बाद सचिव ने आईएसबीटी से मसूरी डायवर्जन तक 17 प्रस्तावित स्टेशनों का स्थलीय निरीक्षण भी किया।
देहरादून में पीआरटी के अंतर्गत क्लेमेंटटाउन–बल्लूपुर, पंडितवाड़ी–रेलवे स्टेशन और गांधी पार्क–आईएसबीटी पार्क कॉरिडोर प्रस्तावित हैं। सचिव ने परियोजनाओं को ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) मॉडल से जोड़ने के निर्देश दिए।
बैठक में कार पार्किंग पॉलिसी-2022 के समन्वय और पीपीपी मॉडल को मजबूत करने पर बल दिया गया। सचिव ने कहा कि त्रिवेणी-नीलकंठ और हरिद्वार रोपवे परियोजनाएं एडवांस स्टेज में हैं, इसलिए इन्हें प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र क्रियान्वित किया जाए।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड के प्रमुख शहरों में आधुनिक, सुरक्षित और सतत सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। ई-बीआरटीएस, पीआरटी और रोपवे परियोजनाएं यातायात दबाव कम करने के साथ पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति देंगी। सरकार की इस पहल को प्रदेश में शहरी परिवहन के नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।





