उत्तराखंड

बदरीनाथ-केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने की तारीख तय, जानें कब तक कर सकेंगे दर्शन

jantaserishta.com
20 Oct 2026 4:41 PM IST
बदरीनाथ-केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने की तारीख तय, जानें कब तक कर सकेंगे दर्शन
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देहरादून: उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के समापन की तैयारियां शुरू हो गई हैं। सर्दियों के मौसम को देखते हुए बदरीनाथ और केदारनाथ धाम के कपाट नवंबर में बंद कर दिए जाएंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, बदरीनाथ मंदिर के कपाट 16 नवंबर को रात 9 बजकर 37 मिनट पर शीतकाल के लिए बंद होंगे। वहीं, केदारनाथ मंदिर के कपाट 11 नवंबर को भैया दूज के अवसर पर बंद किए जाएंगे। इसके साथ ही इस साल दोनों प्रमुख धामों में नियमित दर्शन की यात्रा समाप्त हो जाएगी।
चारधाम यात्रा के दौरान हर साल देश के अलग-अलग हिस्सों और विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचते हैं। सर्दियों में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तापमान गिरने और बर्फबारी की आशंका के कारण धार्मिक परंपराओं के अनुसार मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। इस दौरान भगवान की पूजा निर्धारित शीतकालीन पूजा स्थलों पर जारी रहती है।
भगवान बदरीविशाल के दर्शन के लिए...
भगवान बदरीविशाल के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के पास नवंबर के मध्य तक का समय रहेगा। मंदिर के कपाट 16 नवंबर की रात 9:37 बजे बंद किए जाएंगे। इसके अगले दिन यानी 17 नवंबर को देवडोलियां अपने-अपने शीतकालीन प्रवास स्थलों के लिए रवाना होंगी।
कपाट बंद होने के बाद बदरीनाथ धाम में नियमित दर्शन की व्यवस्था शीतकाल के लिए स्थगित हो जाएगी। श्रद्धालु सर्दियों में निर्धारित पूजा स्थलों पर भगवान की आराधना कर सकेंगे। मंदिर से जुड़ी धार्मिक परंपराओं के अनुसार, कपाट बंद करने से पहले विशेष पूजा-अर्चना और आवश्यक अनुष्ठान किए जाते हैं।
भगवान शिव के प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंगों में...
भगवान शिव के प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंगों में शामिल केदारनाथ धाम के कपाट 11 नवंबर को भैया दूज के पावन अवसर पर बंद किए जाएंगे। यह उत्तराखंड की धार्मिक परंपराओं में महत्वपूर्ण दिन है। कपाट बंद होने के साथ ही इस वर्ष केदारनाथ में नियमित दर्शन का सिलसिला थम जाएगा।
केदारनाथ मंदिर हिमालय के ऊंचे क्षेत्र में स्थित है, जहां सर्दियों में मौसम बेहद कठिन हो जाता है। भारी बर्फबारी और कम तापमान के कारण यहां पहुंचना मुश्किल हो सकता है। इसी वजह से हर साल तय धार्मिक कार्यक्रम के तहत कपाट बंद किए जाते हैं। शीतकाल के दौरान बाबा केदार की पूजा परंपरा के अनुसार दूसरे स्थान पर की जाती है।
रुद्रप्रयाग जिले में ...
रुद्रप्रयाग जिले में स्थित द्वितीय केदार मद्महेश्वर मंदिर के कपाट भी 16 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद होंगे। विजयदशमी के अवसर पर ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कपाट बंद करने की तिथि तय की गई।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, कपाट बंद होने के बाद भगवान मद्महेश्वर की चल विग्रह डोली शीतकालीन प्रवास के लिए रवाना होगी। पहले दिन डोली गौंडार गांव में रात्रि विश्राम करेगी। इसके बाद 17 नवंबर को रांसी, 18 नवंबर को गिरिया और 19 नवंबर को ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर पहुंचेगी। यहां शीतकाल के दौरान भगवान मद्महेश्वर की पूजा-अर्चना की जाएगी।
यमुनोत्री और तुंगनाथ धाम का भी तय हुआ कार्यक्रम
चारधाम यात्रा के दूसरे प्रमुख पड़ाव यमुनोत्री धाम के कपाट भी 11 नवंबर को भैया दूज के दिन बंद किए जाएंगे। इसके लिए सुबह 10 बजकर 28 मिनट का मुहूर्त निर्धारित किया गया है। मंदिर समिति और पुरोहितों ने धार्मिक परंपराओं और पंचांग के अनुसार यह समय तय किया है।
वहीं, तृतीय केदार तुंगनाथ धाम के कपाट 6 नवंबर को बंद होने हैं। इसके बाद भगवान की डोली 8 नवंबर को मक्कूमठ पहुंचेगी, जहां शीतकालीन पूजा की परंपरा निभाई जाएगी।
सर्दियों में कहां होंगे भगवान के दर्शन?
कपाट बंद होने का अर्थ पूजा-अर्चना का पूरी तरह रुक जाना नहीं है। उत्तराखंड की परंपरा के अनुसार, सर्दियों में संबंधित देवताओं की पूजा निर्धारित शीतकालीन गद्दी स्थलों पर की जाती है। इससे श्रद्धालु मुख्य मंदिरों तक नहीं पहुंच पाने के बावजूद धार्मिक परंपराओं से जुड़े रह सकते हैं।
इस तरह नवंबर में चारधाम यात्रा का नियमित चरण समाप्त हो जाएगा। जो श्रद्धालु कपाट बंद होने से पहले दर्शन करना चाहते हैं, उन्हें यात्रा की योजना बनाते समय मौसम, सड़क की स्थिति और प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों की जानकारी जरूर लेनी चाहिए।
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