उत्तराखंड

झोंका रोग की चपेट में आने से धान की फसल को हुआ नुकसान

Admin Delhi 1
1 Aug 2022 8:47 AM GMT
झोंका रोग की चपेट में आने से धान की फसल को हुआ नुकसान
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अल्मोड़ा न्यूज़: भैंसियाछाना ब्लाक के तल्ला रीठागाड क्षेत्र में कई किसानों की सैकड़ों नाली धान की फसल झोंका रोग की चपेट में आ गई है। धान के उत्पादन पर भी असर पड़ने का खतरा मंडराने लगा है। कृषि विज्ञान केंद्र मटेला के वैज्ञानिकों और कृषि विभाग की टीम ने गांव में जाकर फसल का जायजा लिया। विशेषज्ञों ने ग्रामीणों को झोंका रोग के लक्षण और बचाव की जानकारी दी। विकास खंड के सल्ला भाटकोट, सल्यूडी और आसपास के अन्य गांवों में धान की फसल पर झोंका रोग का प्रकोप दिख रहा है। धान के पौधों की पत्ती धीरे धीरे पीली पड़ रही है। कुछ दिनों बाद सूखकर पत्तियां नीचे गिर जाती हैं और पौधे का विकास रुक जाता है। ग्रामीणों ने कहा कि समय पर धान की फसल में फैले झोंका रोग पर अंकुश नहीं लगाया गया तो उत्पादन प्रभावित होगा और उन्हें आर्थिक नुकसान होगा।

ग्राम प्रधान नवीन सिंह ने सूचना कृषि विभाग के अधिकारियों को दी। इसके बाद कृषि विभाग तथा कृषि विज्ञान केंद्र मटेला के वैज्ञानिकों ने प्रभावित गांव में धान की फसल का मौका मुआयना किया। कृषि विज्ञान केंद्र मटेला के वैज्ञानिक तेजवीर सिंह ने बताया कि किसानों ने जून में धान की रोपाई कर दी थी। बारिश नहीं होने से धान की फसल को पर्याप्त पानी नहीं मिल सका जिससे पौधों का विकास रुक गया है। इस कारण फसल पर झोंका रोग का प्रकोप बढ़ गया है। फसल की प्रारंभिक अवस्था से लेकर बालियों में दाना बनने तक पौधों की किसी भी अवस्था में झोंका या ब्लॉस्ट रोग चपेट में ले लेता है। इस रोग के लक्षण पत्तियों और गांठों पर दिखाई देते हैं।

कृषि विभाग की टीम में वैज्ञानिक डॉ. तेजवीर सिंह, ब्लाक प्रभारी बच्चे सिंह बिष्ट, तकनीकी प्रबधंक नथीराम नौटियाल, नवीन सिंह आदि शामिल रहे।

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