
हरिद्वार: उत्तराखंड में होने वाली कांवड़ यात्रा को लेकर प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। इस बार कांवड़ मेले में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए पहली बार साइबर कमांडो की तैनाती की जाएगी। ये साइबर कमांडो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 24 घंटे निगरानी रखेंगे और किसी भी तरह की भ्रामक जानकारी, फर्जी खबर, आपत्तिजनक सामग्री या एआई से तैयार किए गए वीडियो की पहचान कर तत्काल कार्रवाई करेंगे।
कांवड़ यात्रा के दौरान देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचते हैं। हर साल लाखों की संख्या में कांवड़िए हरिद्वार और आसपास के क्षेत्रों में पहुंचकर गंगाजल लेकर अपने-अपने क्षेत्रों के शिवालयों में जलाभिषेक करते हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखना बड़ी चुनौती होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार पारंपरिक सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ तकनीकी निगरानी को भी मजबूत किया जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, साइबर कमांडो की विशेष टीम सोशल मीडिया पर लगातार नजर रखेगी। फेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने वाली पोस्ट, वीडियो और संदेशों की निगरानी की जाएगी। यदि कोई व्यक्ति माहौल खराब करने वाली अफवाह फैलाने, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली सामग्री साझा करने या भीड़ को उकसाने का प्रयास करता है, तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से किसी भी संभावित खतरे को समय रहते पहचाना जा सकेगा। खासकर एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के माध्यम से बनाए जा रहे फर्जी वीडियो और फोटो की पहचान करना वर्तमान समय में एक बड़ी चुनौती बन गया है। साइबर कमांडो ऐसे कंटेंट की जांच कर यह पता लगाने का प्रयास करेंगे कि वह वास्तविक है या उसे डिजिटल माध्यम से तैयार किया गया है।
पिछले कुछ समय में सोशल मीडिया पर फर्जी वीडियो और गलत सूचनाओं के जरिए तनाव पैदा करने के कई मामले सामने आए हैं। ऐसे में कांवड़ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन के दौरान प्रशासन किसी भी तरह की अफवाह को फैलने से रोकना चाहता है। अधिकारियों का मानना है कि समय रहते गलत जानकारी पर रोक लगाना कानून-व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
कांवड़ मेले की सुरक्षा को लेकर पुलिस ने बहुस्तरीय योजना तैयार की है। इसमें पारंपरिक पुलिस बल, यातायात व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी, ड्रोन कैमरों के साथ अब साइबर निगरानी को भी शामिल किया गया है। संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा दोनों को प्राथमिकता दी जा रही है। कांवड़ मार्गों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती, यातायात प्रबंधन, चिकित्सा व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं को लेकर भी तैयारियां की जा रही हैं। अधिकारियों ने बताया कि श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाया गया है।
साइबर कमांडो की तैनाती केवल कांवड़ मेले तक सीमित नहीं रहेगी। अधिकारियों के अनुसार, कांवड़ यात्रा के बाद इन्हें कुंभ मेले में भी तैनात किया जाएगा। कुंभ दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है, जहां करोड़ों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना रहती है। ऐसे में साइबर सुरक्षा को मजबूत करना प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े आयोजनों में अब केवल जमीन पर सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। डिजिटल माध्यमों से फैलने वाली अफवाहें और गलत सूचनाएं भी चुनौती बन सकती हैं। इसलिए सोशल मीडिया निगरानी और साइबर विशेषज्ञों की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।
पुलिस विभाग ने लोगों से भी अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता जरूर जांच लें। अधिकारियों ने कहा कि अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। लोगों को किसी भी संदिग्ध पोस्ट या वीडियो की सूचना संबंधित विभागों को देने की सलाह दी गई है।
इस बार कांवड़ मेले में साइबर कमांडो की तैनाती को सुरक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य तकनीक की मदद से किसी भी संभावित खतरे को पहले ही रोकना और श्रद्धालुओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है। कांवड़ यात्रा के सफल और शांतिपूर्ण आयोजन के लिए पुलिस और प्रशासन लगातार तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं।





