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सरकार सख्त फैक्ट्री से दुकान तक होगी जांच
देहरादून : उत्तराखंड में बच्चों के लिए इस्तेमाल होने वाले कफ सिरप को लेकर सरकार ने सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। राज्य में दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर औषधि प्रशासन विभाग ने जांच अभियान तेज कर दिया है। अब कफ सिरप बनाने वाली फैक्ट्रियों से लेकर थोक विक्रेताओं और मेडिकल स्टोर तक पूरे सप्लाई नेटवर्क की जांच की जाएगी।
अधिकारियों का कहना है कि बच्चों की सेहत से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसी को देखते हुए प्रदेशभर में ड्रग इंस्पेक्टरों को अलर्ट कर दिया गया है और संदिग्ध दवाओं के स्टॉक, खरीद-बिक्री रिकॉर्ड और लाइसेंस की जांच की जा रही है।
फैक्ट्रियों के रिकॉर्ड खंगाले जाएंगे
औषधि विभाग की टीम अब कफ सिरप बनाने वाली कंपनियों में जाकर उत्पादन प्रक्रिया, इस्तेमाल किए गए कच्चे माल, गुणवत्ता जांच रिपोर्ट और तैयार दवाओं के बैच की जानकारी जुटाएगी। अधिकारियों का फोकस यह पता लगाना है कि कहीं दवा निर्माण में तय मानकों की अनदेखी तो नहीं की गई। इसके अलावा कंपनियों से यह भी जानकारी ली जाएगी कि कौन-कौन से बैच बाजार में भेजे गए हैं और उनकी सप्लाई किन जिलों और राज्यों में हुई है। संदिग्ध पाए जाने वाले बैच को तुरंत बाजार से हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
मेडिकल स्टोरों पर होगी छापेमारी
राज्य के मेडिकल स्टोरों और दवा दुकानों पर भी जांच अभियान चलाया जा रहा है। अधिकारियों की टीम स्टॉक रजिस्टर, दवाओं की एक्सपायरी डेट, बिक्री रिकॉर्ड और डॉक्टर की पर्ची के आधार पर बिक्री की स्थिति की जांच कर रही है। जिन दुकानों पर संदिग्ध या प्रतिबंधित दवाएं मिलेंगी, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कई जगहों पर दवाओं के नमूने लेकर उन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जा रहा है।
बच्चों की सुरक्षा पर सरकार की नजर
स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टरों और मेडिकल स्टोर संचालकों को निर्देश दिए हैं कि बच्चों को कफ सिरप देने में विशेष सावधानी बरती जाए। बिना चिकित्सकीय सलाह के बच्चों को ऐसी दवाएं नहीं देने की अपील भी की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, दवाओं की गुणवत्ता जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। अगर किसी कंपनी या विक्रेता की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
पूरे नेटवर्क पर निगरानी
सरकार का उद्देश्य केवल मेडिकल स्टोर तक सीमित कार्रवाई करना नहीं है, बल्कि दवा के निर्माण से लेकर मरीज तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया की निगरानी करना है। इसके लिए निर्माता कंपनियों, डिस्ट्रीब्यूटर और खुदरा विक्रेताओं की जानकारी जुटाई जा रही है। उत्तराखंड में शुरू हुआ यह अभियान आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है। प्रशासन का कहना है कि बच्चों की जिंदगी से जुड़ी दवाओं में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और दोषी पाए जाने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
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