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Uttarakhand उत्तराखंड। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को पिथौरागढ़ में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 के अवसर पर भव्य ‘सहकारिता मेला’ में शिरकत की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्यभर से आए सहकारी संस्थानों, स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उत्पादकों से संवाद किया तथा सहकारिता के माध्यम से राज्य के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई दिशा देने का आह्वान किया। कार्यक्रम में बोलते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सहकारिता केवल एक आर्थिक व्यवस्था नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को साकार करने में सहकारी संस्थाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उत्तराखंड के ग्रामीण अंचलों में सहकारिता ही विकास की नई धारा बन सकती है,” उन्होंने कहा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने के लिए कई नीतिगत कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि हर ब्लॉक और हर ग्राम पंचायत स्तर पर एक सशक्त सहकारी संस्था काम करे, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार और बाजार दोनों मिल सकें। उन्होंने यह भी घोषणा की कि आने वाले समय में राज्य में दुग्ध उत्पादन, बागवानी, हैंडीक्राफ्ट और महिला समूहों से जुड़ी सहकारी समितियों को विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री धामी ने सहकारी संस्थाओं द्वारा लगाए गए प्रदर्शनी स्टॉलों का भी निरीक्षण किया। उन्होंने स्थानीय उत्पादों जैसे ऑर्गेनिक अनाज, शहद, ऊनी वस्त्र, हस्तशिल्प और पारंपरिक खाद्य पदार्थों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ योजना के तहत सहकारी समितियों के साथ मिलकर काम करेगी।
धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश में सहकारिता मंत्रालय की स्थापना इस क्षेत्र को नया जीवन देने वाला ऐतिहासिक कदम है। “पहले सहकारिता केवल एक विभाग के रूप में देखी जाती थी, लेकिन अब यह एक जन-आंदोलन बन चुका है। यह किसानों, महिलाओं, युवाओं और कारीगरों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का माध्यम बन रहा है,” उन्होंने कहा। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान राज्य के उत्कृष्ट सहकारी संस्थानों और महिला समूहों को सम्मानित भी किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद यहां की जनता की मेहनत और सामूहिक भावना से हर क्षेत्र में सफलता की नई कहानियाँ लिखी जा रही हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सहकारी क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि, महिला समूह, किसान और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। पूरे जिले में इस मेले को लेकर उत्साह का माहौल रहा, और पिथौरागढ़ का यह आयोजन अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 के जश्न का केंद्र बन गया।
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