उत्तराखंड

देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल पर बढ़ा विवाद

Kavita2
25 Sept 2026 1:24 PM IST
देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल पर बढ़ा विवाद
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बदरीनाथ। बदरीनाथ धाम में आयोजित ‘देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल-2026’ के सांस्कृतिक कार्यक्रम को लेकर शुरू हुआ विवाद अभी थमने का नाम नहीं ले रहा है। उत्तराखंड चार धाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत ने कार्यक्रमों के स्वरूप और प्रस्तुति को लेकर नाराजगी जताते हुए कहा है कि बदरीनाथ धाम की धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं को ध्यान में रखकर ही किसी भी सांस्कृतिक आयोजन का स्वरूप तय किया जाना चाहिए।

महापंचायत का कहना है कि बदरीनाथ धाम करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में धाम की धार्मिक गरिमा, आध्यात्मिक महत्व और स्थानीय परंपराओं का विशेष ध्यान रखा जाना आवश्यक है। महापंचायत ने संगीत के माध्यम से अधिक शोर उत्पन्न किए जाने पर भी आपत्ति जताई है।

तीर्थ पुरोहित महापंचायत के अनुसार धार्मिक स्थल पर होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों का स्वरूप ऐसा होना चाहिए, जिससे धाम की आध्यात्मिकता और धार्मिक वातावरण प्रभावित न हो। मनोरंजन के नाम पर ऐसी प्रस्तुतियों से बचा जाना चाहिए, जो तीर्थस्थल की परंपराओं और मान्यताओं के अनुरूप न हों।

‘देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल-2026’ के तहत आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों को लेकर सामने आई आपत्तियों के बाद अब आयोजन के स्वरूप को लेकर चर्चा तेज हो गई है। तीर्थ पुरोहितों की ओर से साफ कहा गया है कि वे सांस्कृतिक आयोजनों के विरोध में नहीं हैं, लेकिन बदरीनाथ जैसे धार्मिक स्थल पर उनकी प्रस्तुति मर्यादित और धार्मिक परंपराओं के अनुरूप होनी चाहिए।

महापंचायत का कहना है कि बदरीनाथ धाम का अपना विशिष्ट धार्मिक और पौराणिक महत्व है। देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां भगवान बदरीविशाल के दर्शन और आध्यात्मिक अनुभूति के लिए पहुंचते हैं। इसलिए यहां होने वाली किसी भी गतिविधि का स्वरूप धाम की पहचान और धार्मिक भावनाओं के अनुरूप होना चाहिए।

विशेष रूप से तेज संगीत और उससे पैदा होने वाले शोर को लेकर आपत्ति जताई गई है। महापंचायत का कहना है कि धाम में शांति और आध्यात्मिक वातावरण बनाए रखना प्राथमिकता होनी चाहिए। सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएं तो उनमें स्थानीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं, भक्ति संगीत और देवभूमि की विरासत को प्रमुखता दी जानी चाहिए।

विवाद के बीच जिला प्रशासन ने भी अपना पक्ष रखा है। प्रशासन का कहना है कि सेना के स्थानीय अधिकारियों को पहले ही बदरीनाथ धाम की धार्मिक आस्था, पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व के बारे में अवगत कराया गया था। साथ ही आयोजन को स्थानीय धार्मिक परंपराओं के अनुरूप कराने की सलाह भी दी गई थी।

प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि बदरीनाथ धाम की धार्मिक संवेदनशीलता और परंपराओं को ध्यान में रखने की बात आयोजन से जुड़े अधिकारियों तक पहुंचाई गई थी। इसके बावजूद सांस्कृतिक कार्यक्रम की कुछ प्रस्तुतियों को लेकर तीर्थ पुरोहित महापंचायत की नाराजगी सामने आई है।

महापंचायत ने इस बात पर जोर दिया है कि भविष्य में बदरीनाथ सहित चारधाम क्षेत्र में आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों से पहले स्थानीय तीर्थ पुरोहितों और धार्मिक संस्थाओं की भावनाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए। इससे कार्यक्रमों को लेकर किसी तरह के विवाद की स्थिति से बचा जा सकता है।

बदरीनाथ धाम उत्तराखंड के चार प्रमुख धामों में शामिल है और यहां की धार्मिक परंपराओं का लंबे समय से पालन किया जाता रहा है। धाम में होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों और अन्य आयोजनों का स्वरूप भी इन परंपराओं से जुड़ा रहता है। ऐसे में सांस्कृतिक कार्यक्रमों को लेकर उठी आपत्तियों ने आयोजन और धार्मिक परंपराओं के बीच संतुलन के सवाल को सामने ला दिया है।

तीर्थ पुरोहित महापंचायत का मुख्य जोर इस बात पर है कि सांस्कृतिक गतिविधियां धार्मिक स्थलों की गरिमा के अनुरूप हों। उसका कहना है कि देवभूमि की संस्कृति को प्रदर्शित करने वाले आयोजन स्वागत योग्य हो सकते हैं, लेकिन प्रस्तुति का तरीका ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे धार्मिक वातावरण प्रभावित हो।

वहीं जिला प्रशासन की ओर से यह बताने का प्रयास किया गया है कि आयोजन से पहले ही धार्मिक परंपराओं और स्थानीय आस्था का सम्मान करने की सलाह दी गई थी। प्रशासन के मुताबिक सेना के स्थानीय अधिकारियों को धाम के पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व के अनुरूप आयोजन कराने को कहा गया था।

मामले को लेकर सामने आए दोनों पक्षों से यह स्पष्ट है कि विवाद सांस्कृतिक आयोजन किए जाने से अधिक उसके स्वरूप और प्रस्तुति के तरीके को लेकर है। तीर्थ पुरोहित महापंचायत चाहती है कि बदरीनाथ धाम में होने वाले कार्यक्रमों में धार्मिक मर्यादा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

बदरीनाथ धाम में प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। यहां पूजा-अर्चना, दर्शन और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ धाम की पौराणिक परंपराओं का पालन किया जाता है। ऐसे में महापंचायत का कहना है कि किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम की योजना बनाते समय इस धार्मिक परिवेश को ध्यान में रखना जरूरी है।

‘देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल-2026’ को लेकर उठे विवाद ने भविष्य के आयोजनों के लिए भी एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा किया है कि धार्मिक स्थलों पर सांस्कृतिक गतिविधियों का स्वरूप कैसा होना चाहिए। तीर्थ पुरोहित महापंचायत की मांग है कि धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं को केंद्र में रखते हुए ही कार्यक्रम तैयार किए जाएं।

फिलहाल सांस्कृतिक कार्यक्रम को लेकर महापंचायत की नाराजगी बनी हुई है। दूसरी ओर जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आयोजन को धार्मिक आस्था और स्थानीय परंपराओं के अनुरूप रखने की सलाह पहले ही दी गई थी। अब इस विवाद के बीच भविष्य में बदरीनाथ धाम में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा और प्रस्तुति को लेकर अधिक सावधानी बरते जाने की आवश्यकता सामने आई है।

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