
देहरादून। चुनाव संबंधी कथित अनियमितताओं और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस ने शुक्रवार को देहरादून में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर सचिवालय घेराव के लिए निकले पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने सुभाष रोड पर आयकर कार्यालय के पास रोक दिया। इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ता वहीं धरने पर बैठ गए और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करने लगे। कांग्रेस मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग कर रही है।
प्रदर्शन में कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत समेत पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। कांग्रेस नेता प्रदेश कार्यालय से जुलूस के रूप में सचिवालय की ओर निकले थे। पुलिस ने सचिवालय की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को सुभाष रोड पर बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया।
पुलिस की ओर से आगे बढ़ने से रोके जाने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मौके पर ही धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शन के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से जुड़े कथित मामलों को लेकर विरोध जताया। कांग्रेस की ओर से लगाए जा रहे आरोप अभी राजनीतिक दावे हैं और उन्हें स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
उत्तराखंड कांग्रेस का यह प्रदर्शन पार्टी के देशव्यापी विरोध कार्यक्रम का हिस्सा है। कांग्रेस ने अपनी प्रदेश इकाइयों से 25 सितंबर को प्रदर्शन करने को कहा था। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और उनके कार्यकाल में लिए गए फैसलों तथा मतदाता सूची में हुए बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग की है। कांग्रेस ने 28 सितंबर को जिला स्तर पर भी प्रदर्शन का कार्यक्रम घोषित किया है।
इस विवाद की पृष्ठभूमि में चुनाव आयोग के भीतर फैसलों को लेकर कथित मतभेदों से संबंधित एक मीडिया रिपोर्ट है। रिपोर्ट के आधार पर यह दावा सामने आया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले लगभग 10 महीनों में कुछ फैसलों और आदेशों को लेकर कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज की थीं। कांग्रेस ने इसी रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त पर सवाल तेज किए हैं।
हालांकि चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों का अलग पक्ष भी सामने आया है। उनके अनुसार आयोग में विचारों में अंतर होना संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR समेत हाल की महत्वपूर्ण पहलों से जुड़े निर्णय तीन सदस्यीय आयोग द्वारा लिए गए हैं। ऐसे में कांग्रेस की ओर से लगाए गए चुनावी अनियमितताओं के आरोपों और आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।
उत्तराखंड में प्रदर्शन से एक दिन पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सचिवालय घेराव का ऐलान किया था। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मामलों को लेकर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। कांग्रेस ने कहा था कि वह इन मुद्दों को लेकर सड़क पर उतरकर विरोध दर्ज कराएगी।
शुक्रवार को इसी घोषणा के तहत पार्टी के नेता और कार्यकर्ता देहरादून स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में एकत्र हुए। यहां से कांग्रेस नेताओं की अगुवाई में कार्यकर्ताओं ने जुलूस के रूप में सचिवालय की ओर कूच किया। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी के कारण प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए।
सचिवालय की ओर जाने वाले मार्ग पर पुलिस पहले से तैनात थी। प्रदर्शनकारियों के सुभाष रोड पर पहुंचने के बाद पुलिस ने उन्हें आयकर कार्यालय के पास आगे बढ़ने से रोक दिया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बैरिकेडिंग के पास ही अपना विरोध जारी रखा।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी प्रदर्शन में शामिल हुए। वह चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर पहले भी सवाल उठा चुके हैं। एक दिन पहले उन्होंने SIR से जुड़े आरोपों के संदर्भ में आयोग की स्वायत्तता और कामकाज को लेकर कांग्रेस की चिंताओं को दोहराया था। ये उनके और कांग्रेस के राजनीतिक आरोप हैं।
कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपनी मांगों को राष्ट्रीय स्तर पर भी उठाया है। पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने प्रदेश कांग्रेस कमेटियों को 25 सितंबर को प्रदर्शन आयोजित करने के निर्देश दिए थे। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के साथ उनके कार्यकाल में चुनावी सूची से जुड़े बदलावों और फैसलों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग रखी है।
इस मुद्दे को लेकर पिछले कुछ दिनों से राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। कांग्रेस के नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, जबकि आयोग से जुड़े पक्ष ने महत्वपूर्ण फैसलों को संस्थागत प्रक्रिया के तहत लिए जाने की बात कही है। इसलिए मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों से जुड़े आरोप फिलहाल राजनीतिक विवाद और जांच या सत्यापन की मांग का विषय हैं, न कि स्थापित निष्कर्ष।
देहरादून में हुए प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस का मुख्य फोकस चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े इन्हीं मुद्दों पर रहा। पार्टी नेताओं ने अपनी मांगों को लेकर विरोध दर्ज कराया और सचिवालय तक जाने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थान से आगे नहीं जाने दिया।
पुलिस की रोक के बाद प्रदर्शनकारियों ने सुभाष रोड पर धरना जारी रखा। प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में कार्यकर्ताओं ने अपना विरोध दर्ज कराया।
कांग्रेस की ओर से घोषित कार्यक्रम के अनुसार यह आंदोलन केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं है। पार्टी ने देशभर में अपनी प्रदेश इकाइयों को इसी मुद्दे पर प्रदर्शन करने को कहा है और इसके बाद जिला स्तर पर भी विरोध कार्यक्रम की घोषणा की गई है।
फिलहाल देहरादून में कांग्रेस का सचिवालय घेराव पुलिस की बैरिकेडिंग के कारण सुभाष रोड पर ही रुक गया। इसके बाद पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने वहीं धरना-प्रदर्शन किया। कांग्रेस मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और चुनावी फैसलों तथा मतदाता सूची में हुए बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग कर रही है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग से जुड़े पक्ष ने महत्वपूर्ण फैसलों को आयोग की संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा बताया है।





