उत्तराखंड

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी कांग्रेस, दिल्ली में हाईकमान के साथ मंथन

Kavita2
3 Nov 2026 4:11 PM IST
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी कांग्रेस, दिल्ली में हाईकमान के साथ मंथन
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देहरादून। उत्तराखंड में वर्ष 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने अपनी राजनीतिक और संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में सोमवार को नई दिल्ली में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। इस दौरान प्रदेश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों, जनता से जुड़े मुद्दों, संगठन की मजबूती और आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल, उत्तराखंड प्रभारी कुमारी सैलजा, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, चुनाव प्रचार अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह और चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत सहित अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

दिल्ली में कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के साथ हुई इस बैठक को उत्तराखंड की राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं और कांग्रेस सत्ता में वापसी की तैयारियों में जुटी है। पार्टी का प्रयास है कि चुनाव से पहले संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत किया जाए और जनता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता के साथ उठाया जाए।

बैठक में उत्तराखंड की राजनीतिक स्थिति की समीक्षा की गई। कांग्रेस नेतृत्व ने प्रदेश के नेताओं के साथ इस बात पर चर्चा की कि आगामी चुनाव में पार्टी किन मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएगी। इसके साथ ही राज्य सरकार की नीतियों और प्रशासनिक कामकाज को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर भी विचार-विमर्श हुआ।

कांग्रेस हाईकमान ने प्रदेश संगठन को अगले एक महीने के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इस कार्ययोजना में जनसंपर्क अभियान, संगठनात्मक गतिविधियों और विभिन्न जनसमस्याओं को प्रमुखता देने की तैयारी है। पार्टी नेतृत्व का उद्देश्य विधानसभा चुनाव से पहले राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में कांग्रेस की सक्रियता बढ़ाना है।

उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी कुमारी सैलजा ने बैठक के बाद कहा कि पार्टी प्रदेश की जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर पूरी मजबूती से संघर्ष करेगी। उन्होंने भाजपा सरकार पर कानून-व्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सुरक्षा, बेरोजगारी और पलायन जैसे मुद्दों पर विफल रहने का आरोप लगाया।

सैलजा ने दावा किया कि प्रदेश की जनता अब बदलाव चाहती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लोगों के अधिकारों और सम्मान की लड़ाई को आगे बढ़ाएगी। हालांकि, भाजपा सरकार के खिलाफ लगाए गए ये आरोप कांग्रेस का राजनीतिक पक्ष हैं और इन पर सत्तारूढ़ दल का दृष्टिकोण अलग हो सकता है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व उत्तराखंड विधानसभा चुनाव को लेकर गंभीर है। उनके अनुसार, आगामी चुनाव में कांग्रेस की जीत सुनिश्चित करने के लिए सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर काम करना होगा।

गोदियाल ने बताया कि प्रदेश संगठन ने राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से उत्तराखंड में रैलियों के लिए समय मांगा है। दीपावली के बाद केंद्रीय नेताओं के प्रदेश दौरे की योजना पर भी चर्चा हुई है। हालांकि, प्रस्तावित रैलियों की अंतिम तारीखों की घोषणा अभी नहीं की गई है।

प्रियंका गांधी वाड्रा के संभावित उत्तराखंड दौरे को भी कांग्रेस की चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी प्रदेश में महिला मतदाताओं और युवाओं के बीच अपनी पहुंच मजबूत करने के लिए बड़े नेताओं की जनसभाएं आयोजित करना चाहती है। इससे स्थानीय कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और चुनावी माहौल तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

इससे पहले कांग्रेस नेताओं की ओर से जानकारी दी गई थी कि राहुल गांधी की सीमांत क्षेत्र धारचूला और प्रियंका गांधी की पौड़ी जिले में जनसभा आयोजित करने की योजना है। इन कार्यक्रमों की तारीखों को लेकर अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व की सहमति से लिया जाना है।

सोमवार की बैठक में कांग्रेस के प्रदेश सह प्रभारी सुरेंद्र शर्मा और मनोज यादव भी शामिल हुए। इसके अतिरिक्त विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह और डॉ. हरक सिंह रावत ने भी संगठनात्मक तथा चुनावी विषयों पर चर्चा में भाग लिया।

यशपाल आर्य उत्तराखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं और प्रदेश सरकार की नीतियों को लेकर लगातार सवाल उठाते रहे हैं। चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए विधानसभा के भीतर उठाए जाने वाले मुद्दों और सड़क पर होने वाले आंदोलनों के बीच समन्वय बनाना महत्वपूर्ण होगा।

वहीं, चुनाव प्रचार अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह की भूमिका पार्टी के चुनावी कार्यक्रमों और जनसभाओं की रणनीति तैयार करने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। डॉ. हरक सिंह रावत को चुनाव प्रबंधन समिति की जिम्मेदारी दी गई है। ऐसे में आगामी चुनाव की तैयारियों में इन दोनों नेताओं की सक्रिय भागीदारी रहने की संभावना है।

कांग्रेस की दिल्ली बैठक ऐसे समय हुई है, जब प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार अपने विकास कार्यों और नीतिगत फैसलों को उपलब्धियों के रूप में प्रस्तुत कर रही है। दूसरी ओर कांग्रेस बेरोजगारी, महंगाई, पलायन, स्वास्थ्य सुविधाओं और कथित भ्रष्टाचार के मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है।

उत्तराखंड में पलायन लंबे समय से महत्वपूर्ण सामाजिक और आर्थिक समस्या रही है। पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं होने के कारण लोगों का मैदानी शहरों की ओर जाना लगातार राजनीतिक चर्चा का विषय बना रहा है। कांग्रेस आगामी चुनाव में इस मुद्दे को प्रमुखता दे सकती है।

इसके अलावा स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है। दूरदराज के पर्वतीय क्षेत्रों में अस्पतालों और विद्यालयों की स्थिति, डॉक्टरों और शिक्षकों की उपलब्धता तथा आधारभूत सुविधाओं का विस्तार ऐसे मुद्दे हैं, जिनका सीधा संबंध आम नागरिकों से है।

कांग्रेस ने राज्य में जमीन से जुड़े कथित घोटालों और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर भी आंदोलन की तैयारी की है। पार्टी की ओर से चार नवंबर को विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की योजना बताई गई है। कुमारी सैलजा ने कहा कि पार्टी इन मुद्दों को जनता के बीच लेकर जाएगी। हालांकि, संबंधित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच आवश्यक है।

इस बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की अनुपस्थिति भी राजनीतिक चर्चा का विषय बनी। हालांकि, कुमारी सैलजा ने स्पष्ट किया कि बैठक में शामिल होने वाले पदाधिकारियों के लिए निर्धारित व्यवस्था थी। ऐसे में उनकी अनुपस्थिति को किसी आंतरिक विवाद का प्रमाण मानना उचित नहीं होगा।

दिल्ली में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक से स्पष्ट है कि कांग्रेस उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव की तैयारियों को व्यवस्थित रूप देना चाहती है। पार्टी के सामने संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखना, मजबूत उम्मीदवारों का चयन करना और प्रदेश स्तर पर प्रभावी चुनावी अभियान चलाना महत्वपूर्ण चुनौतियां होंगी।

फिलहाल कांग्रेस हाईकमान ने प्रदेश नेताओं को सक्रियता बढ़ाने और जनता के बीच जाने का संदेश दिया है। आने वाले दिनों में प्रस्तावित रैलियों, जनसंपर्क अभियानों और संगठनात्मक कार्यक्रमों के जरिए पार्टी अपनी चुनावी रणनीति को आगे बढ़ाएगी।

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