उत्तराखंड

दिवाली पर सैनिकों संग दिखे CM धामी, सीमांत गांवों के विकास पर जोर

Ratna Netam
7 Nov 2026 2:17 PM IST
दिवाली पर सैनिकों संग दिखे CM धामी, सीमांत गांवों के विकास पर जोर
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देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिवाली के अवसर पर गढ़वाल राइफल्स के जवानों के साथ त्योहार की खुशियां साझा कीं। इस दौरान उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास और वहां बसे गांवों को जीवंत बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमावर्ती गांव केवल भौगोलिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि वे देश की सुरक्षा, संस्कृति और सामाजिक जीवन का भी अभिन्न हिस्सा हैं। इन गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।मुख्यमंत्री धामी ने जवानों के साथ दिवाली मनाते हुए उनके साहस, समर्पण और देशसेवा की भावना की सराहना की। उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले सैनिक कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं। जब देश के नागरिक अपने परिवारों के साथ त्योहार मनाते हैं, तब सेना के जवान सीमाओं की सुरक्षा में तैनात रहते हैं। उनका त्याग और समर्पण प्रत्येक नागरिक के लिए प्रेरणादायक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सैनिकों के साथ त्योहार मनाना उनके लिए सम्मान और गर्व का विषय है। उन्होंने जवानों और उनके परिवारों को दिवाली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारतीय सेना का अनुशासन, साहस और कर्तव्यनिष्ठा देश की सबसे बड़ी शक्तियों में शामिल है। सैनिकों की वजह से ही देशवासी सुरक्षित वातावरण में अपने त्योहार मना पाते हैं।सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास को लेकर मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य इन इलाकों को केवल बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन्हें आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाना भी है। उन्होंने सीमावर्ती गांवों को जीवंत गांवों में बदलने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उनका कहना था कि सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, संचार और रोजगार की सुविधाएं मिलनी चाहिए, ताकि उन्हें अपनी आजीविका के लिए दूसरे स्थानों पर पलायन न करना पड़े।
उत्तराखंड के कई सीमावर्ती गांव भौगोलिक परिस्थितियों और कठिन मौसम के कारण विकास संबंधी चुनौतियों का सामना करते हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क संपर्क, चिकित्सा सुविधाओं और रोजगार के सीमित अवसरों के कारण स्थानीय आबादी को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सीमावर्ती गांवों के विकास का विषय राज्य सरकार की योजनाओं और नीतियों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।मुख्यमंत्री ने सीमावर्ती गांवों को सशक्त बनाने की दिशा में सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में रहने वाले लोग देश की सीमाओं के प्रहरी की भूमिका भी निभाते हैं। सीमांत क्षेत्रों में आबादी का बने रहना सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी उपयोगी है।
केंद्र सरकार की वाइब्रेंट विलेजेज योजना का उद्देश्य भी सीमावर्ती गांवों में बुनियादी ढांचे और आजीविका के अवसरों को बेहतर बनाना है। इस पहल के तहत सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क संपर्क, पर्यटन, स्थानीय उत्पादों और अन्य विकास गतिविधियों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जाता है। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों के लिए इस प्रकार की योजनाएं विशेष महत्व रखती हैं, क्योंकि यहां अनेक गांव दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों में स्थित हैं।मुख्यमंत्री धामी ने सैनिकों के योगदान को याद करते हुए कहा कि उत्तराखंड की धरती वीरता और सैन्य परंपराओं के लिए प्रसिद्ध रही है। राज्य के बड़ी संख्या में युवा भारतीय सेना और अन्य सुरक्षा बलों में सेवाएं देते हैं। गढ़वाल राइफल्स का गौरवशाली इतिहास देश की सैन्य परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस रेजिमेंट के जवानों ने विभिन्न परिस्थितियों में साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया है।
गढ़वाल राइफल्स भारतीय सेना की प्रतिष्ठित पैदल सेना रेजिमेंटों में से एक है। इसका उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र से ऐतिहासिक संबंध रहा है। राज्य के लोगों के लिए इस रेजिमेंट का विशेष भावनात्मक महत्व है। मुख्यमंत्री का जवानों के बीच पहुंचकर दिवाली मनाना सैन्य परंपराओं के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर भी रहा।सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास की चर्चा के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का विषय भी महत्वपूर्ण है। पहाड़ी गांवों में कृषि, बागवानी, हस्तशिल्प, पर्यटन और स्थानीय उत्पादों के माध्यम से रोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं। यदि इन क्षेत्रों में परिवहन और संचार की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हों, तो स्थानीय युवाओं को अपने गांवों में ही आजीविका के नए विकल्प मिल सकते हैं।
इसके अतिरिक्त, सीमांत गांवों में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार भी आवश्यक माना जाता है। दुर्गम इलाकों में रहने वाले परिवारों को कई बार सामान्य चिकित्सा सेवाओं के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। इसी प्रकार उच्च शिक्षा और रोजगार के अवसरों की कमी पलायन का एक प्रमुख कारण बन सकती है। ऐसे में सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय आवश्यक होगा।मुख्यमंत्री धामी ने जवानों के साथ दिवाली मनाकर एक ओर सैनिकों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त किया, वहीं दूसरी ओर सीमावर्ती गांवों के विकास के संकल्प को भी दोहराया। उनका संदेश था कि देश की सीमाओं को सुरक्षित रखने के साथ-साथ वहां बसे गांवों को समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाना भी जरूरी है।मुख्यमंत्री की इस पहल ने सैनिकों के सम्मान, सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास और पलायन रोकने जैसे महत्वपूर्ण विषयों को एक साथ सामने रखा है। अब सीमांत क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन महत्वपूर्ण होगा।
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