उत्तराखंड
सीएम धामी ने अटल बिहारी वाजपेयी को किया याद, साहित्य की शक्ति पर दिया जोर
Rajeshwari Nishad
29 Oct 2026 4:29 PM IST

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देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी गुरुवार को देहरादून के थानों स्थित लेखक गाँव में आयोजित पांच दिवसीय 'लेखक गाँव अंतरराष्ट्रीय साहित्य, संस्कृति एवं कला महोत्सव-2026' के समापन समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने लेखक गाँव की पत्रिका 'धरती का स्वर्ग उत्तराखंड' और 'देवभूमि का काव्य पुष्प' पुस्तिका का विमोचन किया। समारोह में साहित्य, कला और संस्कृति के क्षेत्र से जुड़े कई प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने भाग लिया। मुख्यमंत्री ने साहित्य को समाज और राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए कहा कि शब्द और विचार समाज को नई दिशा देने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत, लोकभाषाओं और साहित्यिक परंपराओं के संरक्षण पर विशेष जोर दिया।
लेखक गाँव में साहित्यकारों और विद्वानों का जमावड़ा
देहरादून के थानों स्थित लेखक गाँव में आयोजित अंतरराष्ट्रीय महोत्सव के अंतिम दिन साहित्यकारों, कलाकारों, शिक्षाविदों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की मौजूदगी रही।
यह महोत्सव 25 अक्टूबर से 29 अक्टूबर तक आयोजित किया गया। पांच दिनों के दौरान साहित्य, संस्कृति, भारतीय भाषाओं और समकालीन सामाजिक विषयों पर कई सत्र आयोजित किए गए।
समापन समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा भी शामिल हुए।
महोत्सव ने देश-विदेश के साहित्यकारों और विद्वानों को एक मंच पर लाकर विचारों के आदान-प्रदान का अवसर प्रदान किया।
मुख्यमंत्री धामी ने किया दो प्रकाशनों का विमोचन
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लेखक गाँव की पत्रिका 'धरती का स्वर्ग उत्तराखंड' और 'देवभूमि का काव्य पुष्प' पुस्तिका का विमोचन किया।दोनों प्रकाशनों के शीर्षक उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता और साहित्यिक पहचान को सामने रखते हैं।उत्तराखंड अपनी समृद्ध लोकसंस्कृति, धार्मिक परंपराओं, हिमालयी जीवनशैली और प्राकृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। राज्य की इन विशेषताओं को साहित्य के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जाती रही है।ऐसे प्रकाशन स्थानीय रचनाकारों को प्रोत्साहित करने के साथ प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचाने का माध्यम बन सकते हैं।
साहित्य राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम: धामी
लेखक गाँव महोत्सव में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साहित्य की सामाजिक भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।उन्होंने अपने संबोधन में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भी याद किया। धामी ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी की रचनाएं, विचार और राष्ट्रसेवा आज भी लोगों को प्रेरणा देते हैं।मुख्यमंत्री ने साहित्य की शक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि शब्द केवल भावनाओं की अभिव्यक्ति नहीं होते, बल्कि राष्ट्र निर्माण का प्रभावशाली साधन भी बन सकते हैं।उन्होंने साहित्यकारों के योगदान को महत्वपूर्ण बताते हुए रचनात्मक विचारों के माध्यम से समाज को जागरूक करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
भारतीय भाषाओं को वैश्विक पहचान दिलाने पर मंथन
इस वर्ष आयोजित लेखक गाँव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव का प्रमुख विषय 'भारतीय भाषाएं एवं संयुक्त राष्ट्र में हिंदी' रखा गया था।महोत्सव के दौरान हिंदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक प्रतिष्ठा दिलाने और भारतीय भाषाओं के संरक्षण से जुड़े विषयों पर चर्चा आयोजित की गई।आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम में 40 देशों के हिंदी भाषी विदेशी विद्यार्थियों की भागीदारी प्रस्तावित थी।इसके अलावा विश्व के विभिन्न देशों से जुड़े साहित्यकारों और भाषा विशेषज्ञों को भी आमंत्रित किया गया था।आयोजन का उद्देश्य हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं की साहित्यिक परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करना तथा भाषायी संवाद को बढ़ावा देना रहा।
गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी भाषा को मिला मंच
उत्तराखंड की लोकभाषाओं और साहित्यिक विरासत को बढ़ावा देना भी इस महोत्सव का महत्वपूर्ण उद्देश्य रहा।कार्यक्रम की रूपरेखा में गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी भाषाओं के कवि सम्मेलन तथा स्थानीय साहित्य पर विशेष चर्चाएं शामिल थीं।इन आयोजनों के माध्यम से स्थानीय रचनाकारों को अपनी रचनाएं प्रस्तुत करने और प्रदेश की सांस्कृतिक विशेषताओं को साझा करने का अवसर मिला।विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय भाषाओं का संरक्षण केवल भाषा को बचाने तक सीमित नहीं है। इनके माध्यम से लोकगीत, कहानियां, परंपराएं और क्षेत्रीय इतिहास भी सुरक्षित रहते हैं।युवा पीढ़ी को अपनी मातृभाषा और स्थानीय साहित्य से जोड़ना इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल साहित्य पर भी चर्चा
लेखक गाँव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव में आधुनिक तकनीक और साहित्य के बदलते स्वरूप को भी महत्व दिया गया।कार्यक्रम की रूपरेखा में साहित्य के डिजिटलीकरण, मीडिया एवं डिजिटल संस्कृति और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में मानवीय संवेदनाओं जैसे विषयों को शामिल किया गया था।आज डिजिटल प्लेटफॉर्म के विस्तार के कारण साहित्य पढ़ने, लिखने और प्रकाशित करने के तरीके तेजी से बदल रहे हैं।ऐसे समय में तकनीक के जरिए पुराने साहित्य को संरक्षित करने, स्थानीय भाषाओं में सामग्री उपलब्ध कराने और नए लेखकों को अवसर देने की संभावनाएं बढ़ी हैं।हालांकि, मौलिक लेखन और मानवीय संवेदनाओं को बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक माना जा रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री निशंक की पहल है लेखक गाँव
देहरादून के थानों स्थित लेखक गाँव की परिकल्पना उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंक' ने की थी।इस पहल का उद्देश्य साहित्यकारों, शोधार्थियों और रचनात्मक गतिविधियों से जुड़े लोगों को शांत तथा प्रेरणादायक वातावरण उपलब्ध कराना है।लेखक गाँव को साहित्य, संस्कृति, कला और शोध के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।यहां लेखकों के लिए आवासीय सुविधाओं, पुस्तकालय, सभागार, कला गतिविधियों तथा अध्ययन से संबंधित संसाधनों की व्यवस्था की गई है।हिमालय की प्राकृतिक सुंदरता के बीच स्थित यह परिसर साहित्यिक गतिविधियों के लिए विशेष पहचान बना रहा है।
पांच दिवसीय महोत्सव में विभिन्न विषयों पर विमर्श
महोत्सव के दौरान भारतीय ज्ञान परंपरा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, समकालीन साहित्य, महिला सशक्तिकरण, योग, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा जैसे विषय भी कार्यक्रम की रूपरेखा का हिस्सा रहे।इसके अतिरिक्त पर्यावरण संरक्षण, पर्यटन, लोककला और प्रवासी साहित्य से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श की योजना बनाई गई थी।कार्यक्रम में पुस्तक मेले, कला प्रदर्शनी और विभिन्न साहित्यिक गतिविधियों को भी स्थान दिया गया।आयोजकों ने भारतीय संस्कृति के वैश्विक प्रसार और विभिन्न देशों के बीच सांस्कृतिक संवाद को महोत्सव का महत्वपूर्ण उद्देश्य बताया।
25 अक्टूबर को राज्यपाल ने किया था शुभारंभ
लेखक गाँव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव-2026 का शुभारंभ रविवार, 25 अक्टूबर को उत्तराखंड के राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने किया था।उद्घाटन समारोह में राज्यपाल ने युवाओं के बीच पुस्तक पढ़ने और मौलिक चिंतन की आदत विकसित करने पर जोर दिया।उन्होंने कहा था कि साहित्य, संस्कृति और कला मानवता को जोड़ने के सशक्त माध्यम हैं।राज्यपाल ने हिमालय के पर्यावरण, जैव विविधता और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण के लिए साहित्यिक विमर्श को जरूरी बताया था।इस अवसर पर मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति पृथ्वीराज सिंह रूपन, डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंक', पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज और लेखक गाँव की निदेशक विदुषी निशंक सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे थे।
उत्तराखंड को साहित्यिक पर्यटन के क्षेत्र में मिल सकती है पहचान
उत्तराखंड देशभर में धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन के लिए प्रसिद्ध है। चारधाम यात्रा, हिमालयी पर्यटन, योग और आध्यात्मिक गतिविधियों के कारण बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं।ऐसे में लेखक गाँव जैसी पहल प्रदेश को साहित्यिक और सांस्कृतिक पर्यटन के क्षेत्र में भी नई पहचान दिला सकती है।साहित्यिक कार्यक्रमों, पुस्तक मेलों, कार्यशालाओं और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के माध्यम से प्रदेश में शोधकर्ताओं, लेखकों और विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ने की संभावनाएं हैं।इससे स्थानीय संस्कृति को प्रोत्साहन मिलने के साथ पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों को भी सहयोग मिल सकता है।
साहित्य और संस्कृति के संरक्षण का संकल्प
पांच दिवसीय लेखक गाँव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव का समापन साहित्यिक गतिविधियों और सांस्कृतिक संवाद को आगे बढ़ाने के संदेश के साथ हुआ।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति और दो प्रकाशनों के विमोचन ने समापन समारोह को विशेष बनाया।
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