
देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के विरोध और हल्द्वानी के कथित शुद्धिकरण विवाद को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है। भाजपा के राज्यसभा उम्मीदवार दिनेश आर्य के नामांकन के बाद मंगलवार को विधानसभा परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर बेबुनियाद और अनर्गल आरोप लगा रहा है। विपक्षी दलों ने हाल के दिनों में SIR प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर विरोध तेज किया है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसकी कार्यप्रणाली पर बिना ठोस आधार के सवाल खड़े करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया को लेकर भ्रम पैदा करने का प्रयास कर रहा है। धामी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि जब भी चुनावी प्रक्रिया या मतदाता सूची के पुनरीक्षण की बात आती है, पार्टी पहले से ही आशंका और आरोपों का वातावरण बनाने लगती है।
दरअसल, SIR को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल लगातार विरोध कर रहे हैं। विपक्ष ने मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं और नाम हटाए जाने के आरोप लगाए हैं। उत्तराखंड में भी कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने इस मुद्दे पर आंदोलन को व्यापक बनाने की रणनीति बनाई है। कांग्रेस प्रदेश नेतृत्व का कहना है कि मतदाता सूची से किसी भी पात्र व्यक्ति का नाम नहीं हटना चाहिए और प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए।
धामी ने विपक्ष के इन आरोपों को राजनीतिक बताया और कहा कि चुनाव आयोग निर्धारित नियमों के अनुसार काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन रखना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। मुख्यमंत्री का कहना था कि कांग्रेस को संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने के बजाय प्रक्रिया में सहयोग करना चाहिए।
मीडिया से बातचीत के दौरान हल्द्वानी के कथित शुद्धिकरण विवाद का मुद्दा भी उठा। पिछले दिनों हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद रामलीला मैदान में कथित तौर पर शुद्धिकरण यज्ञ किए जाने को लेकर विवाद पैदा हुआ था। इस मामले में कांग्रेस ने भाजपा को घेरा था, जबकि भाजपा ने आरोपों को राजनीतिक रंग देने की बात कही थी। इसी विवाद के बीच भाजपा ने हल्द्वानी से जुड़े दिनेश आर्य को उत्तराखंड की राज्यसभा सीट के लिए उम्मीदवार बनाया।
दिनेश आर्य ने मंगलवार को विधानसभा में राज्यसभा के लिए अपना नामांकन दाखिल किया। इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। कांग्रेस ने इस सीट पर अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है, जिससे दिनेश आर्य का निर्विरोध चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री धामी ने दिनेश आर्य को राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने को भाजपा में सामान्य और लंबे समय से काम कर रहे कार्यकर्ताओं को अवसर मिलने का उदाहरण बताया। आर्य लंबे समय से भाजपा संगठन से जुड़े रहे हैं और पूर्व में मुख्यमंत्री धामी के जनसंपर्क अधिकारी भी रह चुके हैं। वह भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा और जिला संगठन में भी जिम्मेदारियां निभा चुके हैं।
हल्द्वानी विवाद के बाद दिनेश आर्य की उम्मीदवारी को लेकर राजनीतिक चर्चा इसलिए भी तेज हुई क्योंकि कई विश्लेषकों ने इसे भाजपा की दलित प्रतिनिधित्व की रणनीति से जोड़कर देखा। हालांकि भाजपा नेतृत्व की ओर से इसे संगठन के समर्पित कार्यकर्ता को अवसर देने के रूप में पेश किया गया है।
धामी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह हर मुद्दे को राजनीतिक विवाद में बदलने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार विकास और जनकल्याण के मुद्दों पर काम कर रही है और विपक्ष को भी राज्यहित के मामलों में सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए।
SIR को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक टकराव बढ़ा हुआ है। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग सहित कई मांगें उठाई हैं। इनमें SIR प्रक्रिया को रोकना और कथित तौर पर हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करना शामिल है। चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है।
उत्तराखंड में भी कांग्रेस ने SIR के विरोध को लेकर साझा आंदोलन की तैयारी की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में विपक्षी गठबंधन के दलों ने मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन तेज करने का फैसला किया था। कांग्रेस का आरोप है कि प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा होनी चाहिए।
वहीं मुख्यमंत्री धामी का रुख साफ है कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर बिना आधार आरोप लगाना सही नहीं है। उन्होंने कांग्रेस को चुनावी मुद्दों पर राजनीति करने के बजाय जनता से जुड़े विषयों पर ध्यान देने की सलाह दी।
राज्यसभा उम्मीदवार दिनेश आर्य के नामांकन के मौके पर दिए गए धामी के इस बयान से उत्तराखंड में SIR और हल्द्वानी विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने के संकेत हैं। एक ओर कांग्रेस चुनाव आयोग और भाजपा सरकार को घेरने की तैयारी में है, तो दूसरी ओर भाजपा इन आरोपों को विपक्ष की राजनीति बता रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा उत्तराखंड की राजनीति में और प्रमुखता से उभर सकता है।





