
देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने युवा पीढ़ी यानी ‘Gen-Z’ को नया नाम दिया है। देहरादून में शुक्रवार को आयोजित ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन-2026’ कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि वह इस पीढ़ी को ‘इन-जी’ यानी ‘इंडियन जनरेशन’ कहना पसंद करते हैं। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने अभियान के तहत चयनित 140 छात्र-छात्राओं से सीधे संवाद किया और उत्तराखंड के भविष्य को लेकर उनके विचारों और सुझावों की सराहना की।
मुख्यमंत्री धामी ने विद्यार्थियों से बातचीत के दौरान कहा कि आम तौर पर आज के युवाओं को Gen-Z कहा जाता है, लेकिन वह उन्हें ‘इन-जी’ यानी इंडियन जनरेशन कहते हैं। उन्होंने बताया कि अपने परिवार में भी Gen-Z और Alpha Generation के सदस्य होने के कारण वह नई पीढ़ी की सोच और रुचियों से खुद को जुड़ा हुआ महसूस करते हैं। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों की ओर से दिए गए विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सोच ने उन्हें प्रभावित किया है।
‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ अभियान के तहत प्रदेशभर के विद्यार्थियों से ‘कैसा हो मेरे सपनों का उत्तराखंड?’ विषय पर सुझाव मांगे गए थे। इस अभियान में करीब तीन लाख कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को जोड़ा गया। इनमें से 2,67,744 विद्यार्थियों ने ऑनलाइन माध्यम से अपने विचार और सुझाव सरकार तक पहुंचाए। विशेषज्ञों की टीम ने इनमें से 140 विद्यार्थियों के विचारों का चयन किया, जिन्हें मुख्यमंत्री के साथ सीधे संवाद का अवसर मिला।
कार्यक्रम में अलग-अलग स्कूलों के विद्यार्थी और शिक्षक भी शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के साथ प्रदेश के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की। सामने आए विचारों में शिक्षा के साथ पर्यटन, पर्यावरण, आपदा प्रबंधन, स्थानीय स्तर पर विकास की योजना और पलायन जैसे विषय शामिल थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन मुद्दों पर विद्यार्थियों की समझ और उनके सुझाव नई पीढ़ी की जागरूकता को दर्शाते हैं।
इस अभियान को केवल विद्यार्थियों से सुझाव लेने तक सीमित नहीं रखा गया। मुख्यमंत्री के निर्देश पर शासन के वरिष्ठ अधिकारियों और विभिन्न विभागों के प्रमुखों को भी विद्यार्थियों से संवाद की प्रक्रिया में शामिल किया गया। शिक्षा, स्वास्थ्य, वन एवं पर्यावरण, स्वरोजगार, पलायन, लोक निर्माण, आईटी, पर्यटन तथा महिला एवं बाल विकास जैसे विभागों से जुड़े अधिकारियों को युवाओं के सुझाव समझने के लिए कहा गया।
सरकार का कहना है कि विद्यार्थियों की ओर से मिलने वाले व्यावहारिक और उपयोगी सुझावों को नीति निर्माण और राज्य के विकास की योजनाओं से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा जिस तरह के उत्तराखंड की कल्पना करते हैं, उनकी उस सोच को समझना जरूरी है। इसी उद्देश्य से विद्यार्थियों और शासन के बीच सीधे संवाद का मंच तैयार किया गया है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के भविष्य और करियर को लेकर भी महत्वपूर्ण बातें कहीं। ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ के तहत चयनित 140 छात्र-छात्राओं को 12वीं कक्षा पूरी करने के बाद करियर की तैयारी और कोचिंग के लिए दो लाख रुपये तक की स्कॉलरशिप दिए जाने की घोषणा पहले की गई थी। इस पहल का उद्देश्य अच्छे और रचनात्मक विचार देने वाले विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई और करियर की तैयारी में सहायता देना है।
मुख्यमंत्री ने सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए डिजिटल शिक्षा से जुड़ी घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में कक्षा 10वीं और 12वीं में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को टैबलेट खरीदने के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी के माध्यम से धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी।
धामी ने कहा कि उनकी सरकार युवाओं के साथ संवाद और सहभागिता में विश्वास करती है। उनका कहना था कि युवाओं को केवल भविष्य के रूप में देखने के बजाय विकास प्रक्रिया में उनकी भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। राज्य के विकास से जुड़े विषयों पर विद्यार्थियों से सुझाव लेने के पीछे भी यही उद्देश्य है कि नई पीढ़ी के विचारों को समझा जा सके।
‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ अभियान की शुरुआत 10 अगस्त को की गई थी। इसमें विद्यार्थियों को अपने सपनों के उत्तराखंड की कल्पना सामने रखने और प्रदेश के विकास के लिए रचनात्मक सुझाव देने का अवसर दिया गया। अभियान में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की भागीदारी के बाद विशेषज्ञ टीम ने चुनिंदा सुझावों का चयन किया।
कार्यक्रम में युवाओं की तकनीक और बदलती दुनिया को लेकर समझ पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के विचारों की प्रशंसा करते हुए कहा कि नई पीढ़ी प्रदेश और देश से जुड़े विषयों पर गंभीरता से सोच रही है। इसी संदर्भ में उन्होंने Gen-Z को ‘इन-जी’ यानी इंडियन जनरेशन नाम दिया।
सरकार की योजना इस संवाद से सामने आए उपयोगी सुझावों को संबंधित विभागों तक पहुंचाने की है। शिक्षा से लेकर पर्यटन, रोजगार, पर्यावरण और पलायन तक के विषयों पर विद्यार्थियों की सोच को नीति निर्माण की प्रक्रिया से जोड़ने की बात कही गई है। हालांकि किसी सुझाव को नीति में शामिल करने का अंतिम फैसला संबंधित विभागों की समीक्षा और सरकारी प्रक्रिया के बाद ही होगा।
मुख्यमंत्री धामी का ‘इन-जी’ शब्द कार्यक्रम में खास चर्चा का विषय रहा। उन्होंने इसे ‘इंडियन जनरेशन’ से जोड़ते हुए युवा पीढ़ी के विचारों और भविष्य के प्रति उनके नजरिए की प्रशंसा की। वहीं 140 चयनित विद्यार्थियों के साथ हुए सीधे संवाद ने सरकार को भी यह जानने का अवसर दिया कि उत्तराखंड की युवा पीढ़ी आने वाले वर्षों में अपने प्रदेश को किस रूप में देखना चाहती है।





