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हरिद्वार। हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को हरिद्वार में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने अभिनेता के साथ हुई अपनी व्यक्तिगत मुलाकातों को याद किया। उन्होंने नाना पाटेकर को अभिनय की दुनिया की बेहद खास और अनोखी शख्सियत बताया। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उन्हें नाना पाटेकर से व्यक्तिगत रूप से मिलने और उनके अभिनय के साथ-साथ जीवन जीने के तरीके को करीब से समझने का अवसर मिला था। उन्होंने अभिनेता के निधन को दुखद बताते हुए कहा कि उनकी कमी हमेशा महसूस की जाएगी।
नाना पाटेकर का गुरुवार को 75 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वह गोवा स्थित अपने आवास पर बेहोश पाए गए थे। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। उनके निधन का कारण कार्डियक अरेस्ट बताया गया है। अभिनेता के बेटे मल्हार पाटेकर ने उनके निधन की पुष्टि की। इस खबर के सामने आने के बाद फिल्म जगत और उनके प्रशंसकों के बीच शोक की लहर फैल गई।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार में पत्रकारों से कहा कि नाना पाटेकर के निधन की खबर बेहद दुखद है। उन्होंने बताया कि वे अभिनेता से व्यक्तिगत रूप से मिल चुके थे और इस दौरान उन्हें उनके व्यक्तित्व को समझने का अवसर मिला था। मुख्यमंत्री ने कहा कि नाना पाटेकर केवल एक प्रतिभाशाली अभिनेता नहीं थे, बल्कि उनका जीवन जीने का तरीका भी उन्हें दूसरों से अलग बनाता था।
धामी ने कहा, "आज का दिन बहुत दुखद है। हमें बेहद दुखद खबर मिली कि नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं रहे। मैं उनसे व्यक्तिगत रूप से मिला था। मैंने उन्हें, उनके अभिनय और उनके जीवन जीने के तरीके को करीब से देखा है और मैं कह सकता हूं कि वे अभिनय की दुनिया में सचमुच एक अनोखी शख्सियत थे।"
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि नाना पाटेकर जैसे असाधारण व्यक्तित्व का दुनिया से चले जाना दुखद है। उन्होंने अभिनेता के साथ अपने अनुभवों को याद करते हुए कहा कि उनकी अनुपस्थिति हमेशा महसूस की जाएगी। धामी के बयान में अभिनेता के प्रति व्यक्तिगत सम्मान और उनके निधन का दुख स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
नाना पाटेकर भारतीय सिनेमा के उन कलाकारों में शामिल थे, जिन्होंने अपने अभिनय की विशिष्ट शैली, दमदार संवाद अदायगी और गंभीर किरदारों से अलग पहचान बनाई। उनके अभिनय में स्वाभाविकता और भावनात्मक गहराई दिखाई देती थी। उन्होंने कई दशकों तक हिंदी और मराठी फिल्मों में काम किया और अलग-अलग तरह के किरदार निभाकर दर्शकों के बीच अपनी पहचान स्थापित की।
नाना पाटेकर ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत वर्ष 1978 में फिल्म 'गमन' से की थी। इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। फिल्म 'परिंदा' और 'क्रांतिवीर' जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को विशेष पहचान मिली। उन्होंने गंभीर और संवेदनशील किरदारों के साथ हास्य भूमिकाओं में भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
फिल्म 'क्रांतिवीर' में उनके प्रभावशाली संवाद और अभिनय आज भी दर्शकों के बीच चर्चित हैं। वहीं 'परिंदा' में निभाए गए किरदार ने उन्हें हिंदी सिनेमा के प्रभावशाली अभिनेताओं में स्थापित किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने 'प्रहार', 'तिरंगा', 'अग्निसाक्षी', 'खामोशी' और 'वेलकम' जैसी फिल्मों में भी अपनी अभिनय क्षमता का परिचय दिया।
उनकी विशेषता यह रही कि उन्होंने गंभीर भूमिकाओं के साथ हास्य प्रधान फिल्मों में भी दर्शकों का मनोरंजन किया। फिल्म 'वेलकम' में उनका अभिनय दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ। उनकी संवाद बोलने की शैली और चेहरे के भावों ने इस किरदार को अलग पहचान दी।
नाना पाटेकर को उनके उत्कृष्ट अभिनय के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उन्हें तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले और भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए पद्म श्री सम्मान भी प्रदान किया गया। उन्होंने अपने लंबे फिल्मी करियर में ऐसे किरदार निभाए, जो भारतीय सिनेमा की यादगार प्रस्तुतियों में शामिल हैं।
अभिनय के अलावा नाना पाटेकर सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहे। उन्होंने किसानों और जरूरतमंद लोगों की सहायता से जुड़ी पहलों में भागीदारी निभाई। सामाजिक सरोकारों के प्रति उनके योगदान को भी याद किया जा रहा है। उनके निधन पर राजनीतिक और फिल्म जगत की अनेक हस्तियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नाना पाटेकर के निधन पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने अभिनेता के बहुमुखी अभिनय और विशिष्ट व्यक्तित्व को याद करते हुए भारतीय सिनेमा में उनके योगदान की सराहना की। अभिनेता अक्षय कुमार सहित फिल्म उद्योग की कई हस्तियों ने भी उनके साथ काम करने की यादें साझा कीं और श्रद्धांजलि दी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की श्रद्धांजलि इसलिए भी विशेष रही क्योंकि उन्होंने अभिनेता के साथ अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा किया। उन्होंने केवल नाना पाटेकर के फिल्मी योगदान की चर्चा नहीं की, बल्कि उनके व्यक्तित्व और जीवनशैली को भी याद किया।
धामी के अनुसार, नाना पाटेकर का अभिनय जितना प्रभावशाली था, उनका व्यक्तिगत जीवन और व्यवहार भी उतना ही विशिष्ट था। उन्होंने अभिनेता को असाधारण व्यक्तित्व बताते हुए कहा कि उनके निधन से जो कमी पैदा हुई है, वह हमेशा महसूस की जाएगी।
नाना पाटेकर के निधन के साथ भारतीय सिनेमा के एक लंबे और उल्लेखनीय अभिनय सफर का अंत हो गया। उन्होंने अपनी फिल्मों और अभिनय के माध्यम से दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित अनेक हस्तियों ने उनके योगदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की है। धामी ने कहा कि अभिनय की दुनिया में नाना पाटेकर जैसी अनोखी शख्सियत की कमी हमेशा खलेगी।
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