उत्तराखंड

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की संस्कृति और मूल पहचान को संरक्षित करने का किया संकल्प

SHIDDHANT
12 Nov 2025 9:47 PM IST
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की संस्कृति और मूल पहचान को संरक्षित करने का किया संकल्प
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Uttarakhand उत्तराखंड: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की सांस्कृतिक विरासत और मूल पहचान को संरक्षित करने का संकल्प व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की संस्कृति, लोक कला, परंपराएं और प्राकृतिक सौंदर्य इसकी आत्मा हैं, और इन्हें संरक्षित करना हर नागरिक और सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल विकास करना नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि विकास की गति के साथ राज्य की सांस्कृतिक और पारंपरिक पहचान सुरक्षित रहे। उन्होंने स्थानीय कला, संगीत, नृत्य और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की रूपरेखा तैयार करने की बात कही।
धामी ने कहा, "हमारा संकल्प है कि उत्तराखंड की संस्कृति और मूल पहचान को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रखा जाए। यह हमारी जिम्मेदारी है कि राज्य के पर्यावरण, पारंपरिक मूल्यों और सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण किया जाए।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पर्यटन, शिक्षा और ग्रामीण विकास के कार्यक्रमों में स्थानीय सांस्कृतिक तत्वों को शामिल किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने राज्य के विभिन्न जिलों में सांस्कृतिक केंद्रों और हस्तशिल्प बाजारों की स्थापना पर जोर दिया। उनका कहना है कि इससे न केवल स्थानीय कलाकारों और कारीगरों को अवसर मिलेगा, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत का भी विकास होगा।
इसके अलावा, धामी ने पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग पर भी ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि राज्य की पहाड़ी संस्कृति और पारंपरिक जीवन शैली को बनाए रखना विकास की योजना का अहम हिस्सा होगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की यह पहल उत्तराखंड की जनता के बीच काफी सराही जा रही है। स्थानीय विद्वानों और सांस्कृतिक संगठनों का कहना है कि राज्य की संस्कृति और पहचान को संरक्षित करने के लिए इस प्रकार की योजनाएं बेहद महत्वपूर्ण हैं।
सरकार का यह प्रयास यह दर्शाता है कि आधुनिक विकास और पारंपरिक विरासत के बीच संतुलन स्थापित करना राज्य के दीर्घकालीन हित में है। मुख्यमंत्री का संदेश स्पष्ट है कि उत्तराखंड के लोग अपनी संस्कृति, कला और प्राकृतिक सुंदरता के लिए गर्व महसूस करें और इसे संरक्षित करने में सक्रिय भागीदार बनें।
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