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Dehradun देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि राज्य में ग्रीष्मकालीन धान की खेती पर कोई पाबंदी नहीं रहेगी। उन्होंने यह घोषणा किसानों और उनके प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात के बाद की। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्हें कई किसान प्रतिनिधियों से बातचीत का अवसर मिला, जिन्होंने ग्रीष्मकालीन धान की पारंपरिक खेती के महत्व और उसकी आर्थिक अहमियत पर जोर दिया। किसान प्रतिनिधियों ने कहा कि यह फसल पिछले कई वर्षों से राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में लगाई जाती रही है और किसानों की आजीविका का प्रमुख स्रोत रही है।
धामी ने स्पष्ट किया कि इस बार किसानों को पहले की तरह स्वतंत्र रूप से ग्रीष्मकालीन धान की खेती करने की अनुमति दी जाएगी। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों की तरह किसानों को उनकी पारंपरिक फसल उगाने में कोई बाधा नहीं आएगी। मुख्यमंत्री ने यह भी आश्वासन दिया कि सरकार किसानों को बीज, सिंचाई, और कृषि तकनीकी सहायता प्रदान करेगी ताकि उन्हें उच्च उत्पादन और बेहतर आय सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने किसानों से अपील की कि वे खेती के लिए समय पर तैयारी करें और राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं का लाभ उठाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की कृषि नीति का उद्देश्य न केवल किसान की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है, बल्कि उनकी परंपराओं और कृषि पद्धतियों का संरक्षण करना भी है। इस फैसले से उत्तराखंड के कृषि क्षेत्र में पारंपरिक फसलों को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय में स्थिरता आएगी। ग्रीष्मकालीन धान पर पाबंदी हटाने से राज्य के किसानों को खेती में स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता का अहसास होगा।
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