
गोपेश्वर। उत्तराखंड के चमोली जिले में पिछले सप्ताह हुई सुरंग दुर्घटना के बाद लापता दो कर्मचारियों की तलाश के लिए मंगलवार को भी खोज और बचाव अभियान जारी रहा। हादसे के बाद से ही राज्य और केंद्र की कई राहत एजेंसियां लगातार मौके पर जुटी हुई हैं। सुरंग के अंदर कठिन परिस्थितियों के बावजूद बचाव दल लापता कर्मचारियों तक पहुंचने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।
अधिकारियों के अनुसार, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), स्थानीय पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियों की संयुक्त टीम अभियान में शामिल है। सभी टीमें आपसी समन्वय के साथ सुरंग के अंदर और आसपास के क्षेत्रों में खोज अभियान चला रही हैं।
SDRF अधिकारियों ने बताया कि सुरंग के भीतर भारी मात्रा में गाद (sludge) जमा होने के कारण बचाव अभियान में काफी मुश्किलें आ रही हैं। इसके बावजूद राहत कर्मी लगातार काम कर रहे हैं और उपलब्ध संसाधनों व आधुनिक उपकरणों की मदद से सुरंग के अंदर गहन तलाशी ली जा रही है।
अधिकारियों के मुताबिक, सुरंग में जमा पानी और गाद को हटाने का काम लगातार जारी है। इसके लिए पंप और अन्य उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि बचाव दल सुरंग के अधिक से अधिक हिस्से तक पहुंच सकें। चुनौतीपूर्ण हालात के बीच भी टीमों ने अभियान को जारी रखा है।
चमोली जिला सूचना अधिकारी धीरज कार्की ने बताया कि प्रशासन और बचाव एजेंसियां लापता कर्मचारियों की तलाश को प्राथमिकता के आधार पर चला रही हैं। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित विभाग लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और अभियान में तेजी लाने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
सुरंग हादसे के बाद से ही प्रशासन ने राहत और बचाव कार्यों को तेज कर दिया था। घटना की सूचना मिलते ही SDRF और अन्य एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुंच गई थीं। इसके बाद सुरंग के अंदर फंसे या लापता लोगों की तलाश के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया।
बचाव दल के सामने सबसे बड़ी चुनौती सुरंग के अंदर जमा मलबा, गाद और पानी है। पहाड़ी क्षेत्रों में सुरंगों के अंदर ऐसे हालात में काम करना बेहद कठिन होता है। इसके बावजूद जवान और कर्मचारी लगातार जोखिम उठाकर अभियान में लगे हुए हैं।
स्थानीय प्रशासन भी पूरे अभियान पर नजर बनाए हुए है। अधिकारियों ने बताया कि राहत कार्य में किसी तरह की कमी न हो, इसके लिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं। मौके पर मौजूद टीमों को आवश्यक उपकरण और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
इस हादसे के बाद प्रभावित परिवारों की चिंता भी बढ़ गई है। लापता कर्मचारियों के परिजन बचाव अभियान के जल्द सफल होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। प्रशासन की ओर से उन्हें लगातार अभियान की जानकारी दी जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सुरंगों में दुर्घटना के बाद बचाव कार्य बेहद संवेदनशील होता है। अंदर की संरचना, पानी का दबाव, मलबे की स्थिति और ऑक्सीजन की उपलब्धता जैसी कई चीजों को ध्यान में रखते हुए अभियान चलाना पड़ता है। यही कारण है कि बचाव दल बेहद सावधानी से हर कदम उठा रहे हैं।
उत्तराखंड में पहाड़ी इलाकों में निर्माणाधीन और चालू सुरंगों से जुड़े हादसे पहले भी चुनौती बन चुके हैं। ऐसे मामलों में राहत एजेंसियों को कठिन भौगोलिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। चमोली की घटना में भी यही स्थिति बनी हुई है।
फिलहाल लापता दो कर्मचारियों की तलाश के लिए अभियान लगातार जारी है। SDRF, NDRF, ITBP और अन्य एजेंसियां सुरंग के अंदर खोज अभियान चला रही हैं। प्रशासन का कहना है कि जब तक लापता कर्मचारियों का पता नहीं चल जाता, तब तक बचाव कार्य पूरी क्षमता के साथ जारी रहेगा।





