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देहरादून : सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) की दिल्ली बेंच के न्यायिक सदस्य जस्टिस राजवीर सिंह वर्मा ने उत्तराखंड कैडर के भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी संजीव चतुर्वेदी से जुड़ी एक याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। यह याचिका उत्तराखंड सरकार के नवंबर 2021 के उस आदेश को चुनौती देते हुए दायर की गई थी, जो IFS अधिकारियों की अप्रेजल रिपोर्ट से जुड़े चैनल से संबंधित है।
21 सितंबर को जारी आदेश में कहा गया कि कुछ समय तक मामले की सुनवाई के बाद न्यायिक सदस्य राजवीर सिंह वर्मा ने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। आदेश में उनके सुनवाई से अलग होने का कोई विशेष कारण नहीं बताया गया है। इसके बाद अब मामले की सुनवाई दूसरी बेंच या सदस्य के समक्ष होने का रास्ता साफ होगा।
संजीव चतुर्वेदी ने उत्तराखंड सरकार के नवंबर 2021 के आदेश को चुनौती देते हुए CAT का रुख किया था। मामला भारतीय वन सेवा के अधिकारियों की अप्रेजल रिपोर्ट से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर है। सरकारी अधिकारियों की वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट यानी अप्रेजल रिपोर्ट उनके सेवाकाल में महत्वपूर्ण मानी जाती है। पदोन्नति और अन्य सेवा संबंधी मामलों में भी इन रिपोर्टों की भूमिका रहती है।
चतुर्वेदी ने अपनी याचिका में उत्तराखंड सरकार की ओर से निर्धारित अप्रेजल रिपोर्ट चैनल से संबंधित आदेश को चुनौती दी है। मामले पर CAT की दिल्ली बेंच में सुनवाई चल रही थी। इसी दौरान न्यायिक सदस्य राजवीर सिंह वर्मा ने खुद को इस मामले की आगे की सुनवाई से अलग करने का फैसला किया।
21 सितंबर के आदेश में इस घटनाक्रम को दर्ज किया गया है। आदेश के मुताबिक, मामले की कुछ समय तक सुनवाई हुई, जिसके बाद न्यायिक सदस्य ने खुद को इससे अलग कर लिया। हालांकि उन्होंने ऐसा क्यों किया, इसका कोई विशेष कारण आदेश में दर्ज नहीं किया गया।
न्यायिक प्रक्रिया में किसी मामले की सुनवाई से न्यायाधीश या न्यायिक सदस्य का खुद को अलग करना 'रिक्यूजल' कहा जाता है। अलग-अलग मामलों में इसके पीछे अलग परिस्थितियां हो सकती हैं। मौजूदा मामले में आदेश में किसी विशेष वजह का उल्लेख नहीं होने के कारण न्यायिक सदस्य के फैसले के पीछे के कारण को लेकर कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
इस घटनाक्रम के बाद संजीव चतुर्वेदी से जुड़े मामलों में सुनवाई से अलग होने वाले न्यायिक सदस्यों या जजों की संख्या को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। चतुर्वेदी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, अब तक उनसे जुड़े विभिन्न मामलों की सुनवाई से कुल 17 जज खुद को अलग कर चुके हैं। हालांकि यह आंकड़ा चतुर्वेदी द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित है।
संजीव चतुर्वेदी उत्तराखंड कैडर के IFS अधिकारी हैं और उनकी ओर से सेवा संबंधी विभिन्न मामलों को लेकर कानूनी मंचों का रुख किया जाता रहा है। मौजूदा विवाद भी उनकी सेवा से संबंधित एक प्रशासनिक आदेश से जुड़ा है। इसमें मुख्य सवाल नवंबर 2021 में उत्तराखंड सरकार द्वारा जारी किए गए उस आदेश को लेकर है, जिसमें IFS अधिकारियों की अप्रेजल रिपोर्ट के चैनल से संबंधित व्यवस्था निर्धारित की गई थी।
सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल केंद्र सरकार और अखिल भारतीय सेवाओं समेत संबंधित सरकारी कर्मचारियों के सेवा मामलों से जुड़े विवादों की सुनवाई करने वाला न्यायाधिकरण है। नियुक्ति, पदोन्नति, वरिष्ठता, सेवा शर्तों और अन्य प्रशासनिक विवादों से जुड़े मामलों में कर्मचारी CAT के समक्ष अपनी शिकायत रख सकते हैं।
चतुर्वेदी की याचिका भी सेवा से जुड़े प्रशासनिक विवाद के तहत ट्रिब्यूनल के सामने पहुंची है। अब न्यायिक सदस्य के खुद को सुनवाई से अलग करने के बाद मामले की आगे की कार्यवाही नई व्यवस्था के तहत होगी। संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार मामले को दूसरी उपयुक्त बेंच के सामने सूचीबद्ध किया जा सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम में महत्वपूर्ण बात यह है कि 21 सितंबर के आदेश में राजवीर सिंह वर्मा के सुनवाई से अलग होने की बात तो दर्ज की गई है, लेकिन इसके पीछे कोई खास कारण नहीं दिया गया है। इसलिए उनके फैसले के कारणों को लेकर किसी तरह का अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
वहीं चतुर्वेदी की ओर से सामने आए 17 जजों के आंकड़े ने इस मामले को चर्चा में ला दिया है। फिलहाल उनकी मूल याचिका पर अंतिम फैसला नहीं आया है और उत्तराखंड सरकार के नवंबर 2021 के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर आगे की सुनवाई बाकी है।
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