उत्तराखंड

एमबीपीजी में छात्रसंघ चुनाव की हलचल

Kavita2
19 Sept 2026 2:13 PM IST
एमबीपीजी में छात्रसंघ चुनाव की हलचल
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हल्द्वानी। प्रदेश के सबसे बड़े महाविद्यालयों में शामिल एमबीपीजी कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव की सरगर्मियां बढ़ने के साथ ही छात्र नेताओं की सक्रियता भी तेज हो गई है। कॉलेज में केवल हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थी ही नहीं, बल्कि कुमाऊं के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं प्रवेश लेते हैं। यही वजह है कि यहां का छात्रसंघ चुनाव स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहता। चुनाव मैदान में उतरने वाले प्रत्याशियों को तराई-भाबर से लेकर पहाड़ी और सीमांत क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों के बीच अपनी पहुंच बनानी पड़ती है।

भाबर क्षेत्र में स्थापित एमबीपीजी कॉलेज का प्रभाव पूरे कुमाऊं क्षेत्र में माना जाता है। उच्च शिक्षा के लिए यहां नैनीताल जिले के साथ अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत और ऊधमसिंह नगर समेत विभिन्न क्षेत्रों से विद्यार्थी पहुंचते हैं। ऐसे में छात्रसंघ चुनाव के दौरान प्रत्याशियों के लिए अलग-अलग क्षेत्रों के विद्यार्थियों तक पहुंच बनाना बड़ी चुनौती रहती है।

स्थानीय चुनाव से कहीं बड़ा है दायरा

आमतौर पर किसी कॉलेज के छात्रसंघ चुनाव में आसपास रहने वाले विद्यार्थियों की भूमिका अधिक दिखाई देती है, लेकिन एमबीपीजी कॉलेज की स्थिति अलग है। यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों की क्षेत्रीय विविधता के कारण चुनावी समीकरण भी व्यापक हो जाते हैं।

तराई और भाबर क्षेत्र के साथ पहाड़ के दूरदराज इलाकों से आने वाले विद्यार्थी भी चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और अन्य पदों के दावेदारों को केवल कॉलेज परिसर में प्रचार करने से काम नहीं चलता। उन्हें अलग-अलग इलाकों से जुड़े छात्र समूहों के बीच संपर्क बढ़ाना पड़ता है।

सीमांत क्षेत्रों के विद्यार्थियों पर भी नजर

कॉलेज में सीमांत क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों की मौजूदगी के कारण प्रत्याशी उन तक पहुंचने के लिए भी रणनीति बनाते हैं। छात्र नेताओं को यह समझना पड़ता है कि अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों की समस्याएं और प्राथमिकताएं भी अलग हो सकती हैं।

किसी विद्यार्थी के लिए कॉलेज में कक्षाओं का नियमित संचालन प्रमुख मुद्दा हो सकता है तो किसी के लिए पुस्तकालय, छात्रवृत्ति, परीक्षा व्यवस्था, परिवहन या प्रवेश संबंधी सुविधाएं अधिक महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

ऐसे में चुनाव लड़ने वाले छात्र नेताओं के सामने सभी वर्गों और क्षेत्रों के विद्यार्थियों से संवाद स्थापित करने की चुनौती रहती है।

अन्य कॉलेजों से अलग चुनावी तस्वीर

एमबीपीजी कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव की तस्वीर कुमाऊं के कई अन्य महाविद्यालयों से अलग नजर आती है। इसका एक बड़ा कारण यहां विद्यार्थियों की संख्या और उनका व्यापक भौगोलिक आधार है।

छोटे कॉलेजों में प्रत्याशी सीमित संख्या में विद्यार्थियों तक आसानी से पहुंच सकते हैं, लेकिन एमबीपीजी कॉलेज में व्यक्तिगत संपर्क के लिए ज्यादा समय और मेहनत की जरूरत पड़ती है।

प्रत्याशी और उनके समर्थक कॉलेज परिसर के साथ छात्रावासों, किराये पर रहने वाले विद्यार्थियों और अलग-अलग क्षेत्रीय समूहों से भी संपर्क बनाने का प्रयास करते हैं।

कॉलेज परिसर में बढ़ती चुनावी हलचल

छात्रसंघ चुनाव नजदीक आते ही कॉलेज परिसर में संभावित प्रत्याशियों की सक्रियता बढ़ जाती है। छात्र नेता विद्यार्थियों से मिलकर उनकी समस्याएं जानने और अपने पक्ष में समर्थन जुटाने की कोशिश करते हैं।

नए प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों पर भी प्रत्याशियों की खास नजर रहती है। पहली बार कॉलेज पहुंचे छात्र-छात्राओं से संपर्क स्थापित करने के लिए छात्र नेता प्रवेश प्रक्रिया के समय से ही सक्रिय दिखाई देते हैं।

हालांकि चुनाव प्रचार के दौरान कॉलेज प्रशासन द्वारा निर्धारित नियमों और लागू चुनावी दिशा-निर्देशों का पालन करना सभी प्रत्याशियों के लिए जरूरी होता है।

छात्र मुद्दे बनते हैं चुनाव का आधार

एमबीपीजी कॉलेज में चुनावी माहौल के दौरान विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से सामने आते हैं। प्रवेश, परीक्षा, परिणाम, छात्रवृत्ति, पुस्तकालय, खेल सुविधाएं, परिसर की व्यवस्थाएं और शिक्षण से जुड़े विषय छात्र नेताओं के एजेंडे में शामिल रहते हैं।

इसके अलावा दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए परिवहन और रहने की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण विषय हो सकते हैं।

प्रत्याशी इन्हीं मुद्दों के आधार पर विद्यार्थियों के बीच अपनी बात रखने की कोशिश करते हैं। छात्रसंघ चुनाव में समर्थन हासिल करने के लिए केवल व्यक्तिगत संपर्क ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की समस्याओं को उठाने का रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

सोशल मीडिया भी बना प्रचार का जरिया

बदलते समय के साथ छात्रसंघ चुनाव में प्रचार का तरीका भी बदला है। कॉलेज परिसर में प्रत्यक्ष संपर्क के अलावा सोशल मीडिया का इस्तेमाल बढ़ा है।

व्हाट्सऐप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रत्याशी विद्यार्थियों तक अपने संदेश पहुंचाते हैं। खासकर उन विद्यार्थियों तक पहुंचने में डिजिटल माध्यम उपयोगी साबित होता है जो रोजाना कॉलेज नहीं आते या दूरदराज क्षेत्रों से जुड़े हैं।

सोशल मीडिया के जरिए छात्र नेता अपनी गतिविधियों, मुद्दों और कार्यक्रमों की जानकारी विद्यार्थियों तक पहुंचाते हैं। हालांकि ऑनलाइन प्रचार में भी कॉलेज और चुनाव संबंधी नियमों का पालन आवश्यक रहता है।

क्षेत्रीय संपर्क की बड़ी भूमिका

एमबीपीजी कॉलेज में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का संबंध अलग-अलग जिलों और क्षेत्रों से होने के कारण क्षेत्रीय संपर्क भी छात्रसंघ चुनाव में महत्वपूर्ण हो जाता है।

प्रत्याशी अपने समर्थकों के माध्यम से अलग-अलग इलाकों से आने वाले विद्यार्थियों तक पहुंचने की कोशिश करते हैं। इसके लिए छोटी बैठकें, व्यक्तिगत संपर्क और समूह संवाद जैसे तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है।

यही कारण है कि एमबीपीजी कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव की तैयारी केवल कुछ दिनों का काम नहीं मानी जाती। कई संभावित प्रत्याशी काफी पहले से विद्यार्थियों के बीच सक्रिय रहना शुरू कर देते हैं।

नए विद्यार्थियों से संपर्क की होड़

हर शैक्षणिक सत्र में कॉलेज में बड़ी संख्या में नए विद्यार्थी प्रवेश लेते हैं। छात्रसंघ चुनाव के दौरान ये नए मतदाता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

संभावित प्रत्याशी प्रवेश प्रक्रिया के दौरान विद्यार्थियों की मदद करने, दस्तावेज संबंधी जानकारी देने और कॉलेज की व्यवस्थाओं से परिचित कराने के जरिए उनसे संपर्क बनाने का प्रयास करते हैं।

हालांकि विद्यार्थियों के लिए यह जरूरी है कि वे प्रत्याशियों के दावों और काम को समझकर स्वतंत्र रूप से अपना चुनावी निर्णय लें।

कुमाऊं की छात्र राजनीति में अहम केंद्र

एमबीपीजी कॉलेज लंबे समय से कुमाऊं क्षेत्र की छात्र गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहां होने वाले छात्रसंघ चुनाव पर आसपास के कॉलेजों और छात्र संगठनों की भी नजर रहती है।

कॉलेज का बड़ा छात्र आधार और विभिन्न जिलों से आने वाले विद्यार्थियों की मौजूदगी यहां के चुनाव को व्यापक बनाती है।

छात्रसंघ के पदों के लिए मैदान में उतरने वाले दावेदारों के सामने इसलिए दोहरी चुनौती रहती है। एक तरफ उन्हें कॉलेज के रोजमर्रा के छात्र मुद्दों पर सक्रिय रहना पड़ता है, वहीं दूसरी तरफ कुमाऊं के अलग-अलग हिस्सों से आए विद्यार्थियों के बीच अपनी पहचान और संपर्क मजबूत करना होता है।

यही वजह है कि एमबीपीजी कॉलेज का छात्रसंघ चुनाव केवल परिसर तक सीमित नहीं रहता। तराई-भाबर से लेकर पहाड़ और सीमांत क्षेत्रों तक फैला इसका छात्र आधार चुनाव को व्यापक स्वरूप देता है और प्रत्याशियों को जीत के लिए अन्य कॉलेजों की तुलना में कहीं अधिक मेहनत करनी पड़ती है।

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