
x
शादी के जोड़े में पहाड़ी रास्तों पर चली दुल्हन
देहरादून: उत्तराखंड के जौनसार-बावर क्षेत्र में एक शादी ने सड़क जैसी बुनियादी सुविधा की कमी को सामने ला दिया है। चकराता क्षेत्र के उदांवा गांव तक मोटर मार्ग नहीं होने के कारण दुल्हन शर्मिला को अपनी बारात के साथ करीब चार घंटे पैदल चलकर ससुराल पहुंचना पड़ा। शादी के जोड़े में पहाड़ी रास्ता तय करतीं शर्मिला ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से गांव तक सड़क बनवाने की अपील की। उनके साथ आए लोगों को भी पैदल ही गांव पहुंचना पड़ा।
बुल्हाड़ गांव की शर्मिला का विवाह उदांवा निवासी अनिल चौहान के साथ तय हुआ था। मंगलवार को वह बारात लेकर वाहन से लोखंडी तक पहुंचीं। इसके आगे मोटर सड़क की सुविधा नहीं होने से वाहन का सफर समाप्त हो गया। दुल्हन और उनके साथ आए लोगों ने आगे की यात्रा पहाड़ी रास्ते पर पैदल पूरी की। शादी के अवसर पर सामने आई इस परेशानी ने गांव तक सुरक्षित और सुविधाजनक आवागमन की जरूरत को रेखांकित किया है। शर्मिला का कहना था कि लंबे समय तक पैदल चलने से वह थक चुकी थीं। इसके साथ गृह प्रवेश का शुभ मुहूर्त निकलने की चिंता भी थी। इसी वजह से वह रास्ते में कुछ जगह दौड़ती भी नजर आईं। ग्रामीणों ने इस सफर का वीडियो बनाया। इसमें दुल्हन अपनी परेशानी बताते हुए सड़क निर्माण की मांग करती दिखाई देती हैं। उन्होंने कहा कि रास्ता पक्का भी नहीं है और गांव तक पहुंचने में काफी मुश्किल हो रही है।
इस विवाह में क्षेत्र की ‘जोजोड़ा’ परंपरा की झलक भी देखने को मिली। इस परंपरा में दुल्हन अपने मायके से बारात लेकर दूल्हे के घर पहुंचती है। जौनसार-बावर में विवाह के ऐसे पारंपरिक तरीके आज भी प्रचलित हैं। शर्मिला भी इसी परंपरा के तहत बारात लेकर उदांवा पहुंचीं। हालांकि, उनकी यात्रा की चर्चा का मुख्य कारण गांव तक सड़क का अभाव और उसके चलते हुई कठिनाई है। सामने आई खबरों में पैदल रास्ते की दूरी अलग-अलग बताई गई है, इसलिए किलोमीटर का निश्चित आंकड़ा स्पष्ट नहीं है। लेकिन दोनों विवरणों में गांव तक मोटर सड़क नहीं होने और दुल्हन के पैदल पहुंचने की बात सामने आती है। उदांवा के ग्रामीणों के लिए यह समस्या शादी तक सीमित नहीं है। गांव में मोबाइल नेटवर्क की सुविधा का अभाव भी बताया गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़क और संचार सुविधा नहीं होने से स्वास्थ्य सेवाओं तथा आपात स्थिति में मदद लेने में परेशानी होती है। किसी मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए पहले मुख्य सड़क तक पहुंचना पड़ता है। वहीं, समय पर सूचना देने में नेटवर्क की कमी अलग बाधा बनती है। ग्रामीण लंबे समय से सड़क संपर्क की मांग कर रहे हैं।
विवाह समारोह में शामिल रुद्रसेना के संस्थापक राकेश तोमर उत्तराखंडी ने भी सड़क की मांग उठाने की बात कही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मुलाकात करने और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के संबंधित विभाग के सामने मुद्दा रखने का उल्लेख किया। ग्रामीण चाहते हैं कि सड़क के लिए सर्वेक्षण और स्वीकृति की प्रक्रिया आगे बढ़े। साथ ही मोबाइल नेटवर्क की समस्या का समाधान भी हो। उनकी मांग है कि गांव तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने के लिए ठोस पहल की जाए।
शर्मिला की अपील का केंद्र भी यही है कि भविष्य में अन्य लोगों को ऐसी परेशानी न उठानी पड़े। फिलहाल उपलब्ध विवरणों में उनकी मांग पर किसी नई सड़क की स्वीकृति अथवा निर्माण शुरू होने की पुष्टि नहीं है।
Next Story





