
पिथौरागढ़। थल-पिथौरागढ़ मार्ग पर मंगलवार को एक बड़ा सड़क हादसा होते-होते टल गया। सुवालेख और भौड़ी के बीच बिछुल के पास तेज रफ्तार बोलेरो अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे उतर गई और करीब 30 मीटर तक खाई की ओर लुढ़कती चली गई। इसी दौरान वाहन एक पेड़ में अटक गया, जिससे वह गहरी खाई में पूरी तरह गिरने से बच गया। हादसे में चालक समेत वाहन में सवार सभी सात लोग घायल हो गए। इनमें तीन लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, बोलेरो थल-पिथौरागढ़ मार्ग से गुजर रही थी। जब वाहन बिछुल के पास पहुंचा तो चालक अचानक उस पर नियंत्रण खो बैठा। इसके बाद वाहन सड़क से नीचे उतरकर खाई की तरफ लुढ़कने लगा। घटनास्थल पर मौजूद पेड़ से टकराकर बोलेरो बीच में ही रुक गई। यदि वाहन पेड़ में नहीं अटकता तो वह और नीचे जा सकता था और हादसा अधिक गंभीर हो सकता था।
दुर्घटना के समय बोलेरो में चालक समेत कुल सात लोग सवार थे। वाहन के खाई की ओर लुढ़कते ही यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। टक्कर और झटकों के कारण सभी यात्रियों को चोटें आईं। हादसे की आवाज और घायलों की चीख सुनकर आसपास मौजूद लोग घटनास्थल की ओर पहुंचे। स्थानीय लोगों ने स्थिति को देखते हुए तत्काल राहत और बचाव का काम शुरू किया।
खाई की ओर ढलान और बोलेरो के अस्थिर स्थिति में होने के कारण घायलों को बाहर निकालना आसान नहीं था। इसके बावजूद ग्रामीणों ने सावधानी के साथ वाहन में फंसे लोगों को निकालने में सहायता की। सभी घायलों को सड़क तक लाया गया। स्थानीय लोगों की तत्परता के कारण घायलों को समय रहते अस्पताल भेजने की प्रक्रिया शुरू हो सकी।
घटनास्थल पर तत्काल एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने के कारण घायलों को पहले निजी वाहन से पिथौरागढ़ की ओर रवाना किया गया। रास्ते में 108 एंबुलेंस मिलने के बाद उन्हें एंबुलेंस में स्थानांतरित कर जिला अस्पताल पहुंचाया गया। वहां चिकित्सकों ने सभी घायलों का उपचार शुरू किया। तीन घायलों की हालत गंभीर होने की जानकारी सामने आई है, जबकि बाकी लोगों की स्थिति के संबंध में विस्तृत आधिकारिक विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है।
अस्पताल में घायलों की चिकित्सकीय जांच की जा रही है। गंभीर रूप से घायल लोगों को शरीर के किन हिस्सों में चोट लगी है और क्या उन्हें किसी अन्य अस्पताल भेजने की आवश्यकता होगी, इस बारे में चिकित्सकों की ओर से विस्तृत जानकारी आना बाकी है। घायल यात्रियों और चालक की पहचान भी फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है।
हादसे की सूचना मिलने के बाद घायलों के परिवारों को जानकारी दी गई। परिवार के सदस्य जिला अस्पताल पहुंचने लगे। एक साथ सात लोगों के घायल होने से अस्पताल परिसर में चिंता का माहौल बना रहा। परिजन गंभीर रूप से घायल लोगों की स्थिति के बारे में जानकारी लेते दिखाई दिए।
दुर्घटना के कारणों को लेकर अभी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। प्रारंभिक तौर पर वाहन की रफ्तार तेज होने और उसके अनियंत्रित होने की बात कही जा रही है। हालांकि वाहन किसी तकनीकी खराबी, सड़क की स्थिति या किसी अन्य वजह से नियंत्रण से बाहर हुआ, यह जांच के बाद ही पता चल सकेगा। चालक का बयान भी घटना की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण होगा।
पर्वतीय मार्गों पर वाहन चलाते समय थोड़ी सी लापरवाही भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। संकरे मोड़, ढलान और सड़क किनारे गहरी खाई होने के कारण चालकों को गति नियंत्रित रखनी पड़ती है। बिछुल के पास हुई घटना में बोलेरो का पेड़ में अटक जाना सभी यात्रियों के लिए जीवनरक्षक साबित हुआ। पेड़ नहीं होता तो वाहन के गहरी खाई में गिरने की आशंका थी।
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने पर्वतीय मार्ग पर सुरक्षित यातायात व्यवस्था की आवश्यकता दोहराई है। लोगों का कहना है कि दुर्घटना संभावित स्थानों पर सुरक्षा दीवार, क्रैश बैरियर और चेतावनी संकेत लगाए जाने चाहिए। सड़क किनारे सुरक्षा इंतजाम मजबूत होने से अनियंत्रित वाहन को खाई में गिरने से रोका जा सकता है।
सुवालेख-भौड़ी के बीच का यह मार्ग स्थानीय लोगों के आवागमन के लिए महत्वपूर्ण है। यहां से छोटे और बड़े यात्री वाहन नियमित रूप से गुजरते हैं। दुर्घटना वाले स्थान की सड़क की स्थिति तथा वहां सुरक्षा अवरोधक मौजूद थे या नहीं, इसके बारे में आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। संबंधित विभाग द्वारा घटनास्थल का निरीक्षण किए जाने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
हादसे के बाद बचाव कार्य में स्थानीय लोगों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। दुर्घटना की सूचना मिलते ही उन्होंने किसी औपचारिक सहायता का इंतजार किए बिना घायलों को वाहन से बाहर निकालना शुरू किया। निजी वाहन की मदद से उन्हें पिथौरागढ़ की ओर भेजा गया और रास्ते में 108 एंबुलेंस मिलने पर जिला अस्पताल पहुंचाया गया। समय पर मदद मिलने से सभी घायलों का उपचार शुरू हो सका।
इस हादसे ने पर्वतीय क्षेत्रों में आपातकालीन चिकित्सा सुविधा की उपलब्धता का मुद्दा भी सामने रखा है। दुर्घटना के बाद घायलों को पहले निजी वाहन से ले जाना पड़ा। ऐसे मार्गों पर एंबुलेंस और राहत दल की समय पर उपलब्धता गंभीर रूप से घायल लोगों के लिए महत्वपूर्ण होती है। स्थानीय लोगों ने संवेदनशील मार्गों पर आपातकालीन व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत बताई है।
फिलहाल सभी सात घायलों का जिला अस्पताल में उपचार किया जा रहा है। तीन लोगों की हालत गंभीर बताई गई है, लेकिन अस्पताल की ओर से विस्तृत मेडिकल बुलेटिन जारी होने की जानकारी नहीं है। दुर्घटना के सही कारण और वाहन से संबंधित अन्य विवरण जांच के बाद सामने आएंगे। पेड़ में वाहन के अटक जाने के कारण इस हादसे में किसी की जान नहीं गई और एक बड़ी अनहोनी टल गई।





