उत्तराखंड

भाजपा का मिशन 23: हारी हुई सीटों पर बड़े नेताओं का रात्रि प्रवास

Kavita2
10 Sept 2026 9:33 AM IST
भाजपा का मिशन 23: हारी हुई सीटों पर बड़े नेताओं का रात्रि प्रवास
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देहरादून। उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियों को नई दिशा दे दी है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन दो दिवसीय उत्तराखंड दौरे पर हैं और उनके दौरे के बीच पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति को लेकर बड़ा फैसला किया है। भाजपा ने उन विधानसभा सीटों पर विशेष फोकस करने की योजना बनाई है, जहां पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी को जीत नहीं मिल सकी थी। इन सीटों को आगामी चुनाव में सत्ता के आंकड़े को और मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राज्य की 70 विधानसभा सीटों में से 23 सीटें ऐसी हैं, जहां वर्तमान में कांग्रेस या अन्य दलों का कब्जा है। भाजपा ने अब इन सीटों पर संगठन की कमजोरियों को दूर करने और अपना जनाधार बढ़ाने के लिए सीधे वरिष्ठ नेताओं को मैदान में उतारने की रणनीति बनाई है। पार्टी का मानना है कि चुनाव से काफी पहले इन सीटों पर लगातार सक्रियता बढ़ाकर न केवल संगठन को मजबूत किया जा सकता है, बल्कि स्थानीय स्तर पर जनता के बीच पार्टी की स्वीकार्यता भी बढ़ाई जा सकती है।

मुख्यमंत्री से लेकर कोर कमेटी तक मैदान में

भाजपा की रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इन 23 विधानसभा क्षेत्रों में केवल स्थानीय पदाधिकारियों को सक्रिय नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश कोर कमेटी के सभी वरिष्ठ सदस्य खुद इन क्षेत्रों में पहुंचेंगे। वरिष्ठ नेताओं को संबंधित विधानसभा क्षेत्रों में प्रवास करने के साथ-साथ गांवों में रात्रि प्रवास की जिम्मेदारी दी जाएगी।

रात्रि प्रवास के जरिए पार्टी नेता ग्रामीणों और स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच समय बिताएंगे। इस दौरान क्षेत्र की समस्याओं, सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन और संगठन की जमीनी स्थिति का फीडबैक लिया जाएगा। भाजपा की कोशिश है कि राजधानी या जिला मुख्यालयों में बैठकर तैयार की गई रिपोर्ट के बजाय सीधे गांवों से चुनावी रणनीति के लिए इनपुट जुटाया जाए।

पिछली हार के कारणों की होगी पड़ताल

भाजपा के लिए इन 23 सीटों पर फोकस का एक बड़ा कारण पिछले विधानसभा चुनाव के परिणाम भी हैं। 2022 में भाजपा ने 70 में से 47 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि कांग्रेस को 19 सीटें मिली थीं। इसके अलावा कुछ सीटों पर अन्य दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी जीत हासिल की थी।

अब भाजपा की कोशिश है कि विपक्ष के कब्जे वाली सीटों में से अधिक से अधिक सीटें अगले चुनाव में उसके खाते में आएं। इसके लिए पार्टी इन क्षेत्रों में पिछली हार के कारणों की समीक्षा करेगी। स्थानीय उम्मीदवार की छवि, संगठन की स्थिति, बूथ प्रबंधन, कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय, स्थानीय नाराजगी और विपक्षी दलों के मजबूत सामाजिक समीकरण जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

वरिष्ठ नेताओं के प्रवास के दौरान स्थानीय कार्यकर्ताओं से अलग-अलग स्तर पर संवाद कर यह भी जानने की कोशिश की जाएगी कि चुनाव के दौरान संगठन कहां कमजोर रहा था और किन कारणों से भाजपा अपना वोट जीत में तब्दील नहीं कर सकी।

गांवों में सीधा संवाद बनेगा रणनीति का आधार

उत्तराखंड में ग्रामीण क्षेत्रों की राजनीति का अपना अलग महत्व है। खासतौर पर पर्वतीय इलाकों में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, पलायन, पेयजल, कृषि और पर्यटन जैसे मुद्दे सीधे तौर पर मतदाताओं को प्रभावित करते हैं। वहीं मैदानी क्षेत्रों में बेरोजगारी, औद्योगिक विकास, शहरी सुविधाएं, कानून-व्यवस्था और स्थानीय विकास के मुद्दे अहम हो सकते हैं।

भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का गांवों में रात्रि प्रवास इन स्थानीय मुद्दों को समझने का माध्यम भी बनेगा। पार्टी की कोशिश होगी कि सरकार की योजनाओं का लाभ वास्तव में लोगों तक कितना पहुंचा है, इसकी जानकारी भी सीधे जनता से ली जाए।

लाभार्थियों से संवाद कर उन्हें पार्टी के साथ जोड़ने की रणनीति पर भी काम किया जा सकता है। भाजपा को उम्मीद है कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से लाभान्वित वर्ग को संगठन से जोड़ने में मदद मिलेगी।

मिशन 60 प्लस के लिए अहम हैं 23 सीटें

भाजपा के मिशन 60 प्लस के लिहाज से इन 23 सीटों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। 70 सदस्यीय विधानसभा में 60 से अधिक सीटों का लक्ष्य हासिल करने के लिए पार्टी को अपनी मौजूदा सीटों को बचाने के साथ विपक्षी कब्जे वाली सीटों में बड़ी सेंध लगानी होगी।

इसलिए भाजपा का 'मिशन 23' वास्तव में मिशन 60 प्लस का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। यदि पार्टी इन 23 में से बड़ी संख्या में सीटें जीतने में कामयाब होती है तो विधानसभा में उसकी संख्या 60 के करीब पहुंच सकती है। यही वजह है कि पार्टी इन सीटों पर अभी से राजनीतिक और संगठनात्मक गतिविधियां तेज करना चाहती है।

सरकार और संगठन के बीच तालमेल पर जोर

इस रणनीति में सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल भी अहम रहेगा। मुख्यमंत्री और वरिष्ठ संगठन नेताओं के एक साथ जमीन पर उतरने से स्थानीय कार्यकर्ताओं को राजनीतिक रूप से मजबूत संदेश देने की कोशिश होगी। साथ ही जनता से मिले फीडबैक के आधार पर सरकार स्तर पर स्थानीय समस्याओं के समाधान की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं।

भाजपा के लिए यह रणनीति दोहरी चुनौती भी है। एक तरफ उसे विपक्ष के कब्जे वाली सीटों पर अपनी पकड़ मजबूत करनी है, वहीं दूसरी तरफ अपनी मौजूदा सीटों पर किसी तरह की नाराजगी को रोकना होगा। टिकट वितरण, स्थानीय गुटबाजी और नेताओं-कार्यकर्ताओं के बीच मतभेद जैसे मुद्दे भी पार्टी की चुनावी रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं।

नितिन नवीन के दौरे से चुनावी तैयारियों को गति

भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन का दो दिवसीय उत्तराखंड दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब पार्टी ने 2027 के चुनाव की तैयारियों को जमीन पर उतारना शुरू कर दिया है। उनके दौरे में संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा और आगामी चुनाव की रणनीति पर चर्चा को खास महत्व दिया जा रहा है।

कुल मिलाकर भाजपा ने उत्तराखंड में 2027 की चुनावी लड़ाई के लिए अपनी कमजोर सीटों को मजबूत करने का अभियान शुरू कर दिया है। 23 हारी हुई विधानसभा सीटों पर मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष और कोर कमेटी के वरिष्ठ नेताओं का गांवों में रात्रि प्रवास पार्टी की रणनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। अब देखना होगा कि वरिष्ठ नेताओं की यह सीधी जमीनी मौजूदगी कितनी प्रभावी साबित होती है और क्या भाजपा इसके जरिए विपक्ष के कब्जे वाली सीटों को अपने पक्ष में करने में सफल हो पाती है। 2027 के चुनाव में मिशन 60 प्लस की राह का बड़ा फैसला इन्हीं सीटों के प्रदर्शन से तय होने की संभावना है।

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