उत्तराखंड

उत्तराखंड चुनाव 2027 में भाजपा की बड़ी रणनीति, कई सीटों पर बदल सकते हैं चेहरे

Kavita2
6 Oct 2026 9:39 AM IST
उत्तराखंड चुनाव 2027 में भाजपा की बड़ी रणनीति, कई सीटों पर बदल सकते हैं चेहरे
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देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। चुनाव में अब कुछ ही महीने बाकी हैं और भाजपा तथा कांग्रेस दोनों ने अपनी रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है। एक तरफ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की यात्रा को लेकर पार्टी के भीतर मतभेद सामने आए हैं, वहीं दूसरी तरफ सत्तारूढ़ भाजपा सत्ता विरोधी माहौल की संभावित चुनौती से निपटने के लिए कई विधानसभा सीटों पर नए और युवा चेहरों को मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है।

भाजपा की रणनीति केवल उन सीटों तक सीमित नहीं है जहां पार्टी पिछले चुनाव में हार गई थी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक जीती हुई कई सीटों पर भी मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन की समीक्षा की जा रही है। संगठन यह देख रहा है कि किस विधायक की क्षेत्र में पकड़ कितनी मजबूत है, कार्यकर्ताओं के बीच उसकी स्वीकार्यता कैसी है और जनता के बीच उसके खिलाफ नाराजगी का स्तर क्या है। इसी रिपोर्ट के आधार पर टिकट वितरण में बड़े बदलाव किए जा सकते हैं।

भाजपा ने विधानसभा चुनाव की तैयारी काफी पहले शुरू कर दी थी। जुलाई में पार्टी ने चुनाव से जुड़े 15 प्रमुख विभागों में संयोजक और सह संयोजक नियुक्त किए थे। इसके बाद अगस्त और सितंबर के लिए संगठनात्मक कार्यक्रम भी तय किए गए, जिनके जरिए बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और हर घर तक संपर्क बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया। पार्टी का जोर संगठन को पूरी तरह चुनावी मोड में लाने पर है।

पार्टी की नजर खास तौर पर उन 23 सीटों पर भी है, जहां उसे पिछले विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। इन क्षेत्रों में संगठनात्मक कमजोरियों और स्थानीय समीकरणों का आकलन किया जा रहा है। सांसदों, वरिष्ठ नेताओं और संगठन पदाधिकारियों को भी इन इलाकों में सक्रिय किया गया है, ताकि पुराने अंतर को कम किया जा सके और चुनाव से पहले स्थानीय स्तर पर पार्टी की स्थिति मजबूत हो।

भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की है। उत्तराखंड में अब तक चुनावी इतिहास में सत्ता परिवर्तन की परंपरा मजबूत रही है, हालांकि भाजपा ने 2022 में लगातार दूसरी बार सरकार बनाकर इस क्रम को तोड़ा था। अब पार्टी 2027 में तीसरी जीत का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसी वजह से टिकट वितरण को लेकर पार्टी किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती।

सूत्रों के मुताबिक पार्टी ऐसे नए चेहरों की तलाश कर रही है, जिनकी स्थानीय स्तर पर अच्छी पकड़ हो और जिनके खिलाफ किसी तरह की बड़ी नाराजगी न हो। इनमें युवा कार्यकर्ता, संगठन में लंबे समय से सक्रिय चेहरे और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों को भी मौका मिल सकता है। जीती और हारी दोनों तरह की सीटों पर ऐसे संभावित उम्मीदवारों की पहचान करने का काम संगठन स्तर पर जारी है।

भाजपा ने चुनाव के लिए विकास, सुशासन, सामाजिक समरसता और जनकल्याण जैसे मुद्दों को प्रमुख एजेंडे के रूप में आगे रखने के संकेत दिए हैं। इसके साथ ही केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को घर-घर पहुंचाने की तैयारी है। पार्टी संगठन का मानना है कि सरकार की उपलब्धियों के साथ स्थानीय उम्मीदवार की छवि भी चुनावी नतीजों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

दूसरी ओर कांग्रेस के भीतर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की यात्रा को लेकर विवाद सामने आया है। कांग्रेस नेतृत्व ने रावत से उनकी ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ आगे नहीं बढ़ाने को कहा था। पार्टी की उत्तराखंड प्रभारी कुमारी सैलजा ने एक अक्टूबर को उन्हें पत्र लिखकर चुनाव से पहले संगठन की एकजुटता पर जोर दिया था। इसके बावजूद रावत ने जसपुर से हल्द्वानी तक अपना कार्यक्रम जारी रखा।

हरीश रावत के इस कदम के बाद कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान की चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि रावत पहले यह भी कह चुके हैं कि 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी का फैसला उनके लिए सर्वोपरि होगा और पार्टी उन्हें जो जिम्मेदारी देगी, उसके अनुसार काम करेंगे। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व अब चुनाव से पहले संगठनात्मक मतभेदों को खत्म कर एकजुट संदेश देने की कोशिश में है।

कांग्रेस भी चुनावी तैयारी में पीछे नहीं रहना चाहती। पार्टी ने अपने राष्ट्रीय नेताओं की रैलियों और कार्यक्रमों की योजना बनाई है। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जैसे नेताओं के जरिए कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और भाजपा सरकार के खिलाफ मुद्दों को जनता के बीच ले जाने की तैयारी की जा रही है।

उत्तराखंड में विधानसभा की कुल 70 सीटें हैं। ऐसे में कुछ सीटों पर उम्मीदवारों का बदलाव भी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। भाजपा नेतृत्व की नजर उन क्षेत्रों पर अधिक है जहां स्थानीय स्तर पर पार्टी की स्थिति सरकार की लोकप्रियता से अलग दिखाई दे रही है। पार्टी नेतृत्व उम्मीदवार चयन में संगठन की रिपोर्ट, जनसंपर्क और क्षेत्रीय समीकरणों को अहम आधार बना सकता है।

भाजपा की रणनीति साफ संकेत दे रही है कि 2027 का चुनाव केवल सरकार की उपलब्धियों के भरोसे नहीं लड़ा जाएगा। पार्टी उम्मीदवारों के स्तर पर भी बदलाव की तैयारी कर रही है। कई मौजूदा विधायकों के लिए टिकट बचाना आसान नहीं होगा, जबकि संगठन में सक्रिय नए चेहरों के लिए चुनावी मैदान का रास्ता खुल सकता है।

दूसरी तरफ कांग्रेस के लिए चुनौती भाजपा के खिलाफ चुनावी मुद्दे खड़े करने के साथ-साथ अपने अंदरूनी मतभेदों को संभालने की भी है। आने वाले महीनों में टिकट वितरण और उम्मीदवारों के नाम सामने आने के बाद चुनावी तस्वीर और साफ होगी। फिलहाल भाजपा के नए चेहरों वाले दांव और कांग्रेस में हरीश रावत को लेकर जारी राजनीतिक गतिविधियों ने उत्तराखंड विधानसभा चुनाव की लड़ाई को शुरुआती दौर में ही दिलचस्प बना दिया है।

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