
रुद्रपुर । तराई की राजनीति में सिख-पंजाबी समाज और किसान वर्ग की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर इस समुदाय तक अपना राजनीतिक और सामाजिक संदेश पहुंचाने की कोशिश की है। रुद्रपुर में गुरुवार को आयोजित सिख-पंजाबी गौरव सम्मेलन में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक मंच से केंद्र तथा राज्य सरकार के उन फैसलों का उल्लेख किया, जिन्हें सिख समाज के सम्मान, आस्था और कल्याण से जोड़कर देखा जाता है।
सम्मेलन में भाजपा नेतृत्व का मुख्य जोर यह बताने पर रहा कि पार्टी और उसकी सरकारें सिख-पंजाबी समाज के हितों तथा विकास के लिए लगातार काम कर रही हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री ने सिख गुरुओं की शिक्षाओं, देश की रक्षा में समाज के योगदान और कृषि क्षेत्र में पंजाबी किसानों की भूमिका का उल्लेख करते हुए समुदाय के साथ भाजपा के संबंधों को और मजबूत बनाने का प्रयास किया।
अपने दो दिवसीय भ्रमण कार्यक्रम के अंतिम दिन रुद्रपुर पहुंचे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सिख-पंजाबी गौरव सम्मेलन में भाग लिया। उन्होंने केंद्र सरकार के कई निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि सिख समाज के धार्मिक, सामाजिक और ऐतिहासिक महत्व को उचित सम्मान देने की दिशा में लगातार काम किया गया है। उन्होंने करतारपुर कॉरिडोर को खोलने और वर्ष 1947 के विभाजन की त्रासदी झेलने वाले लोगों की स्मृति में विभाजन विभीषिका स्मृति स्थल के निर्माण जैसे फैसलों को प्रमुखता से रखा।
भाजपा नेताओं ने कहा कि करतारपुर कॉरिडोर सिख श्रद्धालुओं की लंबे समय से चली आ रही धार्मिक आकांक्षाओं से जुड़ा विषय था। कॉरिडोर के माध्यम से श्रद्धालुओं के लिए पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा दरबार साहिब करतारपुर की यात्रा आसान हुई। सम्मेलन के मंच से इस फैसले को सिख समाज की आस्था के प्रति केंद्र सरकार की संवेदनशीलता के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया।
इसी तरह विभाजन विभीषिका से जुड़े स्मृति स्थल का उल्लेख करते हुए भाजपा नेतृत्व ने कहा कि देश के विभाजन के दौरान बड़ी संख्या में परिवारों ने विस्थापन, हिंसा और अपनों को खोने की पीड़ा झेली थी। पंजाब और सिख समाज के अनेक परिवार भी इस त्रासदी से प्रभावित हुए। ऐसी स्मृतियों को संरक्षित करना उन लोगों के संघर्ष और बलिदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का माध्यम है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में सिख-पंजाबी समाज के साथ राज्य सरकार के संबंधों और समुदाय के हित में किए जा रहे कार्यों पर बात की। उन्होंने कहा कि तराई के विकास में सिख और पंजाबी समुदाय का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। कृषि, उद्योग, व्यापार और सामाजिक सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में समाज ने प्रदेश की प्रगति को गति दी है।
सम्मेलन के माध्यम से मुख्यमंत्री ने यह संदेश देने की कोशिश की कि राज्य सरकार समुदाय के सम्मान और हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग को विकास प्रक्रिया में भागीदार बनाने के उद्देश्य से काम कर रही है। सिख-पंजाबी समाज की समस्याओं और आवश्यकताओं को भी गंभीरता से लिया जा रहा है।
तराई क्षेत्र में बड़ी संख्या में सिख और पंजाबी परिवार रहते हैं। इनमें किसान, व्यापारी, उद्योगपति और विभिन्न पेशों से जुड़े लोग शामिल हैं। क्षेत्र की कई विधानसभा सीटों पर इस समुदाय के मतदाता चुनावी परिणामों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। ऐसे में सिख-पंजाबी गौरव सम्मेलन को सामाजिक संवाद के साथ-साथ भाजपा की राजनीतिक रणनीति के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में भी देखा जा रहा है।
किसान वर्ग की मजबूत मौजूदगी के कारण तराई की राजनीति में खेती, न्यूनतम समर्थन मूल्य, कृषि उपज की खरीद, सिंचाई, भूमि और ग्रामीण बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दे हमेशा महत्वपूर्ण रहते हैं। सिख-पंजाबी समाज का बड़ा हिस्सा कृषि से जुड़ा होने के कारण किसानों की नाराजगी या समर्थन राजनीतिक दलों के लिए विशेष मायने रखता है। भाजपा ने सम्मेलन के जरिए किसान समुदाय के साथ अपने रिश्ते को मजबूत करने का संकेत दिया।
भाजपा नेतृत्व ने सिख गुरुओं और महापुरुषों के योगदान को याद करते हुए कहा कि सिख समाज ने देश की एकता, अखंडता तथा सुरक्षा के लिए महान बलिदान दिए हैं। गुरु परंपरा ने मानवता, समानता, सेवा और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का संदेश दिया है। पार्टी नेताओं ने समाज के इन्हीं मूल्यों को देश और प्रदेश के विकास से जोड़ने का प्रयास किया।
सम्मेलन में केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं तथा निर्णयों का उल्लेख कर भाजपा ने यह धारणा मजबूत करने की कोशिश की कि उसकी राजनीति केवल चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि वह समाज की धार्मिक भावनाओं और ऐतिहासिक स्मृतियों को भी महत्व देती है। पार्टी नेताओं ने कहा कि सिख समाज का सम्मान और उसकी विरासत का संरक्षण सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
राजनीतिक दृष्टि से देखें तो यह आयोजन आगामी चुनौतियों से पहले संगठन को सामाजिक स्तर पर सक्रिय रखने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। भाजपा लगातार अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच सम्मेलन आयोजित कर अपने समर्थन आधार को मजबूत करने में जुटी है। सिख-पंजाबी गौरव सम्मेलन भी इसी क्रम की एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की मौजूदगी ने इस कार्यक्रम को संगठनात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण बना दिया। उनके दो दिवसीय दौरे के अंतिम दिन आयोजित सम्मेलन के जरिए कार्यकर्ताओं को समाज के बीच सक्रिय रहने और सरकार के फैसलों की जानकारी पहुंचाने का संदेश मिला। भाजपा का प्रयास है कि केंद्र और राज्य सरकार की उपलब्धियों को स्थानीय स्तर तक पहुंचाया जाए।
सम्मेलन में मुख्यमंत्री धामी और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के संबोधनों में सिख समाज के सम्मान, विभाजन की स्मृतियों, धार्मिक आस्था और विकास की बात प्रमुखता से सामने आई। दोनों नेताओं ने एक सुर में कहा कि भाजपा सरकारें समुदाय के हितों के लिए गंभीरता से काम कर रही हैं। कार्यक्रम के माध्यम से पार्टी ने तराई के सिख-पंजाबी मतदाताओं और किसान वर्ग को अपनेपन का स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की।





