
देहरादून। उत्तराखंड में राज्यसभा की खाली होने जा रही एक सीट के लिए भारतीय जनता पार्टी ने संभावित प्रत्याशियों के नामों का पैनल केंद्रीय नेतृत्व को भेज दिया है। पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार करीब 25 नामों पर विचार के बाद नौ नामों को अंतिम सूची में शामिल किया गया है। अब इनमें से किसी एक नाम पर भाजपा हाईकमान अंतिम मुहर लगाएगा। राज्यसभा सीट के लिए 16 अक्टूबर को चुनाव होना है।
राज्यसभा सदस्य नरेश बंसल का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। इसके बाद यह सीट रिक्त होगी। इसी को देखते हुए भाजपा ने काफी पहले से संभावित प्रत्याशियों के नामों पर मंथन शुरू कर दिया था। पार्टी की प्रदेश कोर कमेटी की बैठक में भी इस सीट को लेकर विस्तार से चर्चा हुई थी। बैठक में दो दर्जन से अधिक संभावित दावेदारों के नाम सामने आए थे।
कोर कमेटी की बैठक के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और प्रदेश महामंत्री संगठन फणीन्द्र नाथ शर्मा को संभावित प्रत्याशियों के नामों की छंटनी की जिम्मेदारी दी गई थी। शुरुआती स्तर पर पार्टी के सामने महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, युवा और संगठन से जुड़े अनुभवी नेताओं समेत अलग-अलग वर्गों के कई नाम मौजूद थे।
अब पार्टी सूत्रों का कहना है कि विभिन्न स्तर पर विचार-विमर्श के बाद नौ नामों को आगे भेजा गया है। हालांकि भाजपा ने अभी इन नौ नामों को सार्वजनिक नहीं किया है। प्रत्याशी के नाम को लेकर अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व करेगा। यही कारण है कि प्रदेश भाजपा के नेता भी औपचारिक घोषणा से पहले किसी एक नाम को लेकर टिप्पणी करने से बच रहे हैं।
राज्यसभा उम्मीदवार तय करते समय पार्टी के सामने कई राजनीतिक और संगठनात्मक समीकरण होंगे। उत्तराखंड की राजनीति में गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्र के संतुलन को महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा सामाजिक प्रतिनिधित्व, संगठन में अनुभव, पार्टी के लिए लंबे समय तक किए गए कार्य और भविष्य की राजनीतिक रणनीति भी उम्मीदवार चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। कोर कमेटी की बैठक से पहले भी इन समीकरणों को लेकर पार्टी के भीतर मंथन की बात सामने आई थी।
भाजपा के पास संभावित उम्मीदवारों की लंबी सूची होने के कारण चयन प्रक्रिया को लेकर काफी हलचल रही। पहले करीब 24 से अधिक दावेदारों के नाम सामने आने की जानकारी थी। बाद में अलग-अलग स्तरों पर चर्चा के बाद सूची को छोटा किया गया। नवीनतम जानकारी के अनुसार नौ नाम शॉर्टलिस्ट कर केंद्रीय नेतृत्व को भेजे गए हैं।
सूत्रों के अनुसार जिन नेताओं के नाम अंतिम पैनल में शामिल नहीं हो पाए हैं, उनके अनुभव और योग्यता का इस्तेमाल संगठन के दूसरे महत्वपूर्ण दायित्वों में किया जा सकता है। पार्टी राज्यसभा की एक सीट के चयन को केवल एक पद तक सीमित रखने के बजाय संगठनात्मक संतुलन से जोड़कर भी देख रही है। हालांकि इस संबंध में पार्टी की ओर से कोई औपचारिक सूची जारी नहीं की गई है।
भाजपा की प्रदेश कोर कमेटी की बैठक 25 सितंबर को देहरादून स्थित पार्टी मुख्यालय में हुई थी। बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए थे। इस बैठक में राज्यसभा प्रत्याशी के साथ-साथ आगामी विधानसभा चुनाव और संगठनात्मक गतिविधियों पर भी चर्चा हुई थी।
उत्तराखंड में भाजपा की मजबूत विधानसभा स्थिति को देखते हुए राज्यसभा सीट का चुनाव भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। पार्टी ऐसे चेहरे को आगे ला सकती है, जो क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन के साथ संगठन की भविष्य की रणनीति में फिट बैठता हो। हालांकि प्रत्याशी कौन होगा, इसे लेकर अभी आधिकारिक तौर पर कोई नाम घोषित नहीं किया गया है।
प्रदेश संगठन की ओर से नाम भेजे जाने के बाद अब नजर भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व पर है। केंद्रीय नेतृत्व पैनल में शामिल नामों पर विचार करने के बाद उम्मीदवार घोषित करेगा। पार्टी के अंदर इस बात को लेकर भी चर्चा है कि किसी अनुभवी संगठनकर्ता को मौका मिलेगा या किसी नए चेहरे को राज्यसभा भेजकर राजनीतिक संदेश दिया जाएगा।
इस बीच प्रदेश स्तर पर संगठन से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच भी संभावित उम्मीदवार को लेकर चर्चाएं तेज हैं। अलग-अलग नामों की चर्चा जरूर हो रही है, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने आधिकारिक घोषणा से पहले नाम सार्वजनिक करने से परहेज किया है।
राज्यसभा सीट के लिए मतदान 16 अक्टूबर को प्रस्तावित है। ऐसे में भाजपा को इससे पहले अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा करनी होगी। उम्मीदवार घोषित होने के बाद नामांकन और अन्य चुनावी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी।
फिलहाल प्रदेश भाजपा की ओर से संभावित उम्मीदवारों का पैनल केंद्रीय नेतृत्व के पास पहुंच चुका है। करीब 25 नामों से शुरू हुई प्रक्रिया नौ नामों तक पहुंच गई है। अब अंतिम फैसला भाजपा हाईकमान के स्तर पर होगा। साथ ही पैनल से बाहर रह गए नेताओं को भी संगठन में अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दिए जाने की संभावना बनी हुई है।





