उत्तराखंड

उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से पहले दलबदल का सिलसिला तेज, 30 हजार से ज्यादा वोटर्स ने बदला विधानसभा क्षेत्र

Sarita
18 Jan 2022 11:07 AM IST
उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से पहले दलबदल का सिलसिला तेज, 30 हजार से ज्यादा वोटर्स ने बदला विधानसभा क्षेत्र
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फाइल फोटो 

उत्तराखंड में नेता जिस तरह से दल बदल रहे हैं, उसी तरह से जनता भी विधानसभा क्षेत्र को बदल रही है।

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। उत्तराखंड में नेता जिस तरह से दल बदल रहे हैं, उसी तरह से जनता भी विधानसभा क्षेत्र को बदल रही है। पिछली विधानसभा को अगर देखा जाए तो राज्य में 30837 वोटरों ने विधान सभा क्षेत्र को बदला है। जिसके तहत देहरादून जिले में सर्वाधिक 7095 वोटरों व पिथौरागढ़ जिले की चार विधान सभाओं में 498 वोटरों ने पलायन किया है। राज्य की विधान सभाओं में वोटरों का पलायन लगातार बढ़ रहा है।

निर्वाचन आयोग की ओर से जारी मतदाता सूची का आंकलन किया जाए तो इस विधान सभा चुनाव में देहरादून जिले की 10 विधान सभाओं में 7095, नैनीताल की 6 विधान सभाओं में 3888, पौड़ी की 6 विधान सभाओं में 3750, हरिद्वार की 10 विधान सभाओं में 3280, अल्मोड़ा की 6 विधान सभाओं में 2204, उत्तरकाशी की 3 विधान सभाओं सीटों में 1937, ऊधमसिंह नगर की 9 विधान सभाओं में 1929।
जबकि, टिहरी गढ़वाल की 6 सीटों में 1781, चमोली की 3 विधान सभाओं में 1508, रुद्रप्रयाग की 2 विधान सभाओं में 1309,चम्पावत की 2 विधान सभाओं में 941 व बागेश्वर की 2 विधान सभाओं में 723 वोटरों ने पलायन किया है। देहरादून जिले की 10 विधान सभाओं में सर्वाधिक 7095 वोटरों ने पलायन किया है। जबकि पिथौरागढ़ जिले की 4 सीटों में सबसे कम 499 वोटरों ने पलायन किया है।
देहरादून की 10 विधान सभाओं की स्थिति
देहरादून की चकराता विधान सभा में 355, विकास नगर में 1280, सहसपुर में 1105, धर्मपुर में 1205, रायपुर में 299, राजपुर रोड में 299, देहरादून कैंट में 1364, डोईवाला में 131 व ऋषिकेश में 229 ने पलायन किया है।
नैनीताल की 6 विधान सभाओं का आंकड़ा
कुमाऊं मंडल के नैनीताल जिले की लालकुआं विधान सभा में 550, भीमताल में 659, नैनीताल में 931, हल्द्वानी में 841, कालाढूंगी में 603 व रामनगर में विधान सभा में 304 वोटरों ने पलायन किया है।
देहरादून जैसे शहरी क्षेत्रों से वोटरों के पलायन का मतलब कोविड के बाद वोटर अपने मूल गांव की ओर गए हैं। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों को गए वोटरों के नहीं लौटने के कारण गांवों में पलायन बढ़ता दिख रहा है। इसका असर देखने को मिलेगा।
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