
उत्तराखंड : साइबर ठगों ने एक बार फिर डिजिटल लेनदेन प्रणाली को निशाना बनाते हुए एक कर्मचारी के बैंक खाते से 2.52 लाख रुपये निकाल लिए। ठगों ने गूगल पे (GPay) से जुड़े बैंक खाते में सेंधमारी कर इस वारदात को अंजाम दिया। घटना की जानकारी होने के बाद पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने तहरीर के आधार पर अज्ञात आरोपितों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, पीड़ित कर्मचारी को उस समय ठगी का पता चला, जब उसके बैंक खाते से संदिग्ध लेनदेन की जानकारी मिली। जांच करने पर पता चला कि उसके खाते से बड़ी रकम निकाल ली गई है। पीड़ित ने तत्काल बैंक से संपर्क कर मामले की जानकारी ली और इसके बाद पुलिस के पास पहुंचकर कार्रवाई की मांग की।
पीड़ित ने अपनी शिकायत में बताया कि उसका बैंक खाता गूगल पे से जुड़ा हुआ था। साइबर ठगों ने इसी माध्यम से खाते में सेंध लगाई और अलग-अलग लेनदेन के जरिए 2.52 लाख रुपये निकाल लिए। पीड़ित के अनुसार, उसने न तो किसी अनजान व्यक्ति को अपनी बैंक संबंधी जानकारी साझा की थी और न ही किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक किया था। इसके बावजूद उसके खाते से रकम गायब हो गई।
पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर तकनीकी साक्ष्यों को जुटाया जा रहा है। पुलिस टीम बैंक लेनदेन, मोबाइल नंबर, डिजिटल ट्रांजेक्शन और अन्य संबंधित जानकारियों की जांच कर रही है, ताकि आरोपितों तक पहुंचा जा सके।
घटना के बाद पीड़ित ने साइबर क्राइम पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई है। साइबर अपराध के मामलों में समय पर शिकायत दर्ज कराना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि शुरुआती समय में कार्रवाई होने पर ठगी गई रकम को रोकने या वापस दिलाने की संभावना बढ़ जाती है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर ठगी के मामलों में लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। ऑनलाइन भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराधी भी नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में बैंक खाते, यूपीआई, ओटीपी और अन्य गोपनीय जानकारी किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार, साइबर ठग अक्सर लोगों को फोन कॉल, मैसेज, फर्जी लिंक या अन्य माध्यमों से जाल में फंसाने की कोशिश करते हैं। कई बार वे बैंक अधिकारी, ग्राहक सेवा प्रतिनिधि या किसी संस्था के कर्मचारी बनकर लोगों से जानकारी हासिल कर लेते हैं। इसके बाद खाते से रकम निकाल लेते हैं।
पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश पर भरोसा न करें। बैंक या डिजिटल भुगतान से जुड़ी जानकारी मांगने वाले व्यक्तियों से सावधान रहें। किसी भी प्रकार की ऑनलाइन ठगी होने पर तुरंत बैंक को सूचित करने के साथ-साथ साइबर हेल्पलाइन और पुलिस को जानकारी दें।
गूगल पे और अन्य डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल में सुरक्षा नियमों का पालन करना जरूरी है। उपयोगकर्ताओं को मजबूत पासवर्ड रखने, दो-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था अपनाने और समय-समय पर अपने बैंक खाते की गतिविधियों की जांच करते रहने की सलाह दी जाती है।
पुलिस की जांच में अब यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि ठगी की रकम किन खातों में ट्रांसफर की गई और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं। साइबर सेल की मदद से तकनीकी पहलुओं की जांच की जा रही है।
साइबर अपराधों में लगातार वृद्धि को देखते हुए पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान भी चला रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि थोड़ी सी सावधानी बरतकर ऑनलाइन ठगी से बचा जा सकता है।
फिलहाल 2.52 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पीड़ित को उम्मीद है कि जांच के बाद आरोपितों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और उसकी रकम वापस दिलाने का प्रयास किया जाएगा।





