
Uttarakhand उत्तराखंड : जिले में जंगलों में आग लगने की घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं। शुक्रवार की रात गरुड़ मार्ग पर रवाईखाल से आगे तालड़ के जंगल में चीड़ वन क्षेत्र में भीषण आग भड़क उठी। आग इतनी विकराल थी कि दूर-दूर तक धुएं और लपटों का गुबार दिखाई दे रहा था और आसपास के इलाकों में तनाव फैल गया।
सूचना मिलने पर स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और आग को बुझाने का प्रयास किया। तेज हवाओं और सूखी वनस्पति के कारण आग तेजी से फैल रही थी, जिससे स्थानीय लोगों को बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
इस दौरान पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा कौसानी आग बुझाने में सक्रिय रूप से जुटे रहे। उनके साथ पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण भी मौजूद थे। दोनों ने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर आग पर काबू पाने की कोशिश की। उन्होंने आग फैलने से पहले ही आसपास के खतरनाक हिस्सों में सुरक्षा के इंतजाम करने का प्रयास किया।
स्थानीय लोगों ने बताया कि जंगल की आग फैलने का कारण संभवत: तेज हवा और सूखी वनस्पति है। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ समय के लिए पास के रास्तों और छोटे गाँवों में धुएं का गुबार छा गया। ग्रामीणों और आग बुझाने वाले टीम के सदस्यों ने मिलकर आग पर काबू पाने की कोशिश की, लेकिन आग का विकराल रूप देखते ही बन रहा था।
वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को भी सूचना दे दी गई थी। विभाग की टीम आग बुझाने के लिए मौके पर जल्द ही पहुँची और ग्रामीणों की मदद से आग पर नियंत्रण पाने में जुट गई। उन्होंने बताया कि आग फैलने से कई पेड़ों और वनस्पति को नुकसान हुआ है, लेकिन किसी जानमाल के नुकसान की फिलहाल सूचना नहीं मिली है।
पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा ने कहा कि जंगल की आग सिर्फ वन संपदा को ही नहीं बल्कि आसपास के निवासियों की सुरक्षा को भी खतरे में डालती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी आग लगने की स्थिति में तुरंत वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को सूचित करें और स्वयं जोखिम में न पड़ें।
पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण ने बताया कि स्थानीय लोगों की मदद से आग को जल्द से जल्द नियंत्रित करने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि अगर लोग समय रहते सतर्क नहीं होते तो आग और अधिक फैल सकती थी।
वन विभाग ने चेतावनी जारी की है कि आने वाले दिनों में मौसम गर्म और शुष्क रहने की वजह से जंगलों में आग लगने की संभावना बढ़ सकती है। सभी ग्रामीणों और आग बुझाने वाली टीम को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
जिले में जंगलों की सुरक्षा और आग पर नियंत्रण बनाए रखना प्राथमिकता है। प्रशासन और वन विभाग ने आग बुझाने के लिए अतिरिक्त संसाधनों और कर्मचारियों की तैनाती कर दी है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।





