उत्तराखंड

बद्रीनाथ धाम विवाद: चढ़ावे की जांच के बीच PA प्रमोशन पर सवाल

Kavita2
7 July 2026 10:10 AM IST
बद्रीनाथ धाम विवाद: चढ़ावे की जांच के बीच PA प्रमोशन पर सवाल
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बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे की कथित हेराफेरी और चोरी के मामले में जांच लगातार चर्चा में बनी हुई है। इस मामले की जांच के लिए गठित कमेटी को सोमवार तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी है, लेकिन बताया जा रहा है कि कमेटी के सदस्य अभी तक बद्रीनाथ धाम पहुंचकर जांच शुरू नहीं कर पाए हैं। इस बीच मामले में एक नई जानकारी सामने आई है, जिसमें बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के चेयरमैन हेमंत द्विवेदी के निजी सहायक (PA) की नियुक्ति और पदोन्नति को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

आरोप है कि मंदिर समिति में पीए के पद पर तैनात कर्मचारी का करियर ग्राफ नियमों में बदलाव और विशेष व्यवस्थाओं के कारण तेजी से आगे बढ़ा। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

जांच कमेटी की रिपोर्ट पर नजर

बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला सामने आने के बाद मंदिर समिति और प्रशासन ने जांच के आदेश दिए थे। जांच कमेटी को पूरे मामले की पड़ताल कर रिपोर्ट सौंपने की जिम्मेदारी दी गई है।

बताया जा रहा है कि कमेटी को सोमवार तक अपनी रिपोर्ट देनी है, लेकिन अभी तक जांच टीम के सदस्य बद्रीनाथ धाम नहीं पहुंचे हैं। ऐसे में जांच प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे की व्यवस्था बेहद संवेदनशील मानी जाती है। इसलिए मामले की निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता को लेकर श्रद्धालुओं की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है।

मंदिर समिति के चेयरमैन के PA पर उठे सवाल

मामले में अब मंदिर समिति के चेयरमैन हेमंत द्विवेदी के निजी सहायक की नियुक्ति और पदोन्नति से जुड़ी जानकारी सामने आई है।

बताया जा रहा है कि वर्ष 2014 में संबंधित कर्मचारी को इंटरनेट कोऑर्डिनेटर के एकल पद पर नियुक्त किया गया था। इस पद पर आगे पदोन्नति की संभावना नहीं थी।

इसके बावजूद वर्ष 2018 में उन्हें डायरेक्ट रिक्रूटमेंट पर्सनल असिस्टेंट के पद पर समायोजित किए जाने की बात सामने आई है। इस प्रक्रिया को लेकर अब सवाल उठाए जा रहे हैं।

आरोप है कि सामान्य प्रक्रिया से अलग तरीके से उन्हें नई जिम्मेदारी दी गई।

2023 में नियमों में बदलाव का आरोप

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2023 में नियमों में बदलाव किया गया, जिसके बाद पब्लिक रिलेशन स्पेशल ऑफिसर (PRO) के पद पर प्रमोशन का रास्ता खुला।

आलोचकों का कहना है कि नियमों में बदलाव से संबंधित कर्मचारी को लाभ मिला। हालांकि, इस मामले में मंदिर समिति या संबंधित अधिकारियों की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि नियुक्ति और पदोन्नति की पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार हुई थी या नहीं।

चढ़ावे की गणना के काम में लगाए जाने पर सवाल

मामले में एक और अहम बिंदु यह सामने आया है कि पर्सनल असिस्टेंट के पद पर तैनात कर्मचारी को चढ़ावे की गणना से जुड़े कार्यों में लगाया गया था।

चढ़ावे की गिनती और हिसाब-किताब का काम मंदिर व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। ऐसे में इस जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या संबंधित व्यक्ति को यह कार्य सौंपने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया था।

जांच कमेटी इस पहलू की भी समीक्षा कर सकती है कि चढ़ावे की व्यवस्था में शामिल कर्मचारियों की जिम्मेदारियां क्या थीं और निगरानी की व्यवस्था कैसी थी।

श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा मामला

बद्रीनाथ धाम देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है और यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में आने वाला चढ़ावा धार्मिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है।

ऐसे में चढ़ावे से जुड़े किसी भी विवाद को गंभीरता से लिया जाता है। श्रद्धालु चाहते हैं कि मंदिर की व्यवस्थाएं पूरी तरह पारदर्शी हों और यदि कोई अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए।

जांच के बाद ही साफ होगी स्थिति

फिलहाल मामले में कई आरोप और सवाल सामने आए हैं, लेकिन अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।

जांच कमेटी को चढ़ावे की व्यवस्था, कर्मचारियों की भूमिका, रिकॉर्ड और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की समीक्षा करनी है। इसके बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि कहीं कोई नियमों की अनदेखी हुई या नहीं।

मंदिर समिति की ओर से भी जांच में सहयोग की बात कही गई है। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

आगे की कार्रवाई पर नजर

अब सभी की निगाहें जांच कमेटी की रिपोर्ट पर टिकी हैं। रिपोर्ट आने के बाद यह तय होगा कि मामले में आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।

बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों के बीच प्रशासन के सामने चुनौती है कि वह श्रद्धालुओं का भरोसा बनाए रखे और व्यवस्था को और मजबूत करे।

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