
उत्तराखंड। योग गुरु बाबा रामदेव ने संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ती राजनीतिक कटुता पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि देश में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर नफरत और घृणा का माहौल नहीं बनना चाहिए। संसद लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण मंच है और वहां सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के व्यवहार का संदेश पूरे देश में जाता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में कई बार ऐसा दिखाई देता है जैसे संसद में पक्ष और विपक्ष पाकिस्तान और हिंदुस्तान की तरह एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हों। ऐसी स्थिति देश के लोकतांत्रिक वातावरण के लिए ठीक नहीं है।
बाबा रामदेव ने राजनीतिक दलों से आपसी मतभेदों के बावजूद संवाद, प्रेम और सम्मान बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विचारों का अलग होना स्वाभाविक है। सरकार और विपक्ष के बीच नीतियों तथा फैसलों को लेकर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इन मतभेदों को व्यक्तिगत दुश्मनी या नफरत में नहीं बदलना चाहिए। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी है कि वे लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करें।
संसद से पूरे देश में जाता है संदेश
बाबा रामदेव ने कहा कि संसद में होने वाली गतिविधियों और नेताओं के व्यवहार को देश के करोड़ों लोग देखते हैं। ऐसे में अगर संसद के भीतर लगातार टकराव, आरोप-प्रत्यारोप और कटुता दिखाई देती है तो उसका समाज पर भी प्रभाव पड़ता है। राजनीतिक दलों और उनके नेताओं को यह समझना चाहिए कि उनके आचरण का असर केवल संसद तक सीमित नहीं रहता बल्कि कार्यकर्ताओं और आम लोगों तक भी पहुंचता है।
उन्होंने कहा कि पक्ष और विपक्ष लोकतांत्रिक व्यवस्था के दो महत्वपूर्ण हिस्से हैं। सरकार जहां देश को चलाने और नीतियों को लागू करने की जिम्मेदारी निभाती है, वहीं विपक्ष सरकार के फैसलों पर सवाल उठाकर लोकतंत्र में जवाबदेही सुनिश्चित करता है। इसलिए दोनों के बीच स्वस्थ संवाद लोकतंत्र को मजबूत करता है।
राजनीतिक और जातीय नफरत पर उठाए सवाल
योग गुरु ने राजनीतिक और जातीय आधार पर एक-दूसरे से नफरत करने की प्रवृत्ति की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति या समूह से केवल उसकी राजनीतिक विचारधारा या जातीय पहचान के आधार पर घृणा करना उचित नहीं है। देश को आगे बढ़ाने के लिए समाज के अलग-अलग वर्गों के बीच एकता और आपसी सम्मान जरूरी है।
उनका कहना था कि विचारधाराओं में अंतर हो सकता है, लेकिन इसके कारण सामाजिक संबंधों में नफरत नहीं आनी चाहिए। लोकतांत्रिक व्यवस्था में अलग-अलग राजनीतिक विचारों का होना सामान्य बात है। एक ही मुद्दे पर अलग-अलग दलों और नेताओं की अलग राय हो सकती है। इसके बावजूद सभी को राष्ट्रहित को प्राथमिकता देते हुए आगे बढ़ना चाहिए।
सत्ता पक्ष को दी बड़ी जिम्मेदारी
बाबा रामदेव ने सत्ता पक्ष की जिम्मेदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार में रहने वाले लोगों को विपक्ष के प्रति प्रेम और सम्मान का व्यवहार करना चाहिए। सत्ता पक्ष के पास अधिक जिम्मेदारी होती है, इसलिए उसे राजनीतिक विरोधियों की बात भी सुननी चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विपक्ष को सम्मान देने से लोकतंत्र कमजोर नहीं बल्कि मजबूत होता है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की अपनी भूमिका होती है। सरकार की नीतियों की आलोचना करना, सवाल पूछना और जनहित के मुद्दों को उठाना विपक्ष का काम है। इसी तरह सत्ता पक्ष की जिम्मेदारी है कि वह विपक्ष के सवालों का जवाब दे और जहां संभव हो वहां सहमति बनाकर देशहित में आगे बढ़े।
मतभेद रहें लेकिन मनभेद न हों
रामदेव के बयान का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि राजनीतिक मतभेदों को मनभेद में नहीं बदलना चाहिए। चुनावों में राजनीतिक दल एक-दूसरे के खिलाफ मुकाबला करते हैं और अपनी विचारधारा एवं नीतियों को जनता के सामने रखते हैं। चुनाव समाप्त होने के बाद सभी जनप्रतिनिधियों की प्राथमिक जिम्मेदारी देश और जनता के हितों के लिए काम करना होती है।
संसद में कई मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन बहस के दौरान भाषा और व्यवहार की मर्यादा बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि राजनीतिक विरोध व्यक्तिगत कटुता में बदलता है तो इसका असर लोकतांत्रिक संस्थाओं की छवि पर पड़ सकता है।
संवाद से निकले समस्याओं का समाधान
बाबा रामदेव ने आपसी संवाद को https://jantaserishta.com/local/uttarakhand/major-ssb-operation-in-almora-counterfeit-currency-worth-54-lakh-seized-52-victims-rescued-4831238मतभेद दूर करने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उनका कहना है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में बातचीत और विचार-विमर्श के जरिए समस्याओं का समाधान निकाला जाना चाहिए। संसद इसी उद्देश्य से बनाया गया सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच है, जहां देश से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होती है।
उन्होंने संकेत दिया कि सत्ता पक्ष और विपक्ष को एक-दूसरे को विरोधी विचारधारा के प्रतिनिधि के रूप में देखना चाहिए, न कि दुश्मन के रूप में। राजनीतिक प्रतिस्पर्धा लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन इसे वैमनस्य में बदलने से समाज में गलत संदेश जा सकता है।
देशहित को सर्वोपरि रखने की अपील
योग गुरु ने राजनीतिक दलों से देशहित को सर्वोपरि रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विचारधाराएं अलग हो सकती हैं लेकिन राष्ट्र सभी के लिए एक है। देश की प्रगति और सामाजिक सद्भाव के लिए राजनीतिक नेतृत्व को सकारात्मक उदाहरण पेश करना चाहिए।
बाबा रामदेव की टिप्पणी ऐसे समय सामने आई है जब संसद के भीतर विभिन्न मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिलती रहती है। उन्होंने दोनों पक्षों से राजनीतिक मतभेदों के बावजूद एक-दूसरे के प्रति सम्मान बनाए रखने और लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करने की अपील की है।





