उत्तराखंड
केदारताल में हिमस्खलन से तबाही, 4 ट्रैकर्स के शव बरामद
Rajeshwari Nishad
4 Nov 2026 4:31 PM IST

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उत्तरकाशी। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में केदारताल ट्रैक पर हुए हिमस्खलन ने बड़ा हादसा कर दिया है। भारी बर्फबारी और एवलांच की चपेट में आने के बाद लापता हुए आठ लोगों की तलाश के दौरान चार शव बरामद किए गए हैं। मृतकों में दो महिलाएं और दो पुरुष शामिल हैं। राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM) की संयुक्त टीम लगभग 4,000 मीटर की ऊंचाई पर कठिन परिस्थितियों में बचाव अभियान चला रही है। चार अन्य लापता लोगों की तलाश जारी है।
बुधवार को बचाव दल ने दो और शव बरामद किए। इससे पहले मंगलवार को एक महिला और एक पुरुष का शव मिला था। बरामद शवों को हेलिकॉप्टर की सहायता से उत्तरकाशी के मातली हेलीपैड तक पहुंचाया गया है। ऊंचाई वाले इस क्षेत्र में बर्फबारी, खराब मौसम और दुर्गम रास्तों के कारण बचाव अभियान में लगातार परेशानियां आ रही हैं।
कच्ची ढांग के पास हिमस्खलन में फंसे थे आठ लोग
जानकारी के अनुसार, उत्तरकाशी जिले के गंगोत्री क्षेत्र से केदारताल ट्रैकिंग पर निकला दल अचानक मौसम खराब होने के कारण संकट में फंस गया था।दल में पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के पर्यटकों के साथ स्थानीय गाइड तथा अन्य सहयोगी सदस्य शामिल थे।केदारताल मार्ग पर भोजखड़क और कच्ची ढांग के आसपास भारी बर्फबारी तथा हिमस्खलन के कारण रास्ता अवरुद्ध हो गया था।इसके बाद आठ लोग लापता हो गए। इनमें सात ट्रेकर्स और एक स्थानीय गाइड शामिल बताए गए हैं।पर्वतीय क्षेत्र में अचानक मौसम बदलने और बर्फ की मोटी परत जमने के कारण दल के लिए आगे बढ़ना या वापस लौटना मुश्किल हो गया था।
30 अक्टूबर को मदद के लिए किया था संपर्क
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 30 अक्टूबर को फंसे हुए ट्रेकर्स ने ट्रैकिंग एजेंसी से फोन के माध्यम से संपर्क किया था।उन्होंने बताया था कि वे कच्ची ढांग के समीप फंस गए हैं और सुरक्षित बाहर निकलने के लिए सहायता की आवश्यकता है।इसके बाद स्थानीय प्रशासन और बचाव एजेंसियों को सूचना दी गई।मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीआरएफ, नेहरू पर्वतारोहण संस्थान और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध बचाव दलों को सक्रिय किया गया।हालांकि क्षेत्र में लगातार हो रही बर्फबारी और खराब मौसम के कारण शुरुआती दिनों में घटनास्थल तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
चार लोगों को पहले ही सुरक्षित निकाला गया
ट्रैकिंग दल में शामिल कुछ सहयोगी सदस्यों को पहले ही सुरक्षित बचा लिया गया था।31 अक्टूबर को तीन पोर्टर और एक रसोइए को कच्ची ढांग के आसपास से सुरक्षित निकाला गया था।इन लोगों के बचने के बाद शेष आठ सदस्यों की तलाश तेज की गई।लापता लोगों में पश्चिम बंगाल के पांच ट्रेकर्स, उत्तर प्रदेश की दो महिला ट्रेकर्स और उत्तरकाशी का एक स्थानीय गाइड शामिल था।बचाव एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि लापता लोग किस स्थान पर फंसे हैं और हिमस्खलन के बाद बर्फ के नीचे उनकी स्थिति क्या है।इसी कारण संभावित स्थानों पर विशेष खोज अभियान शुरू किया गया।
हेलिकॉप्टर से पहुंचाई गई विशेष बचाव टीम
दुर्गम परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन ने उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बचाव कार्य करने वाली विशेष टीम को अभियान में शामिल किया।दो नवंबर को दस सदस्यीय माउंटेन रेस्क्यू टीम को हेलिकॉप्टर की सहायता से घटनास्थल के नजदीक पहुंचाया गया।इस टीम में एसडीआरएफ के छह और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के चार सदस्य शामिल थे।विशेष प्रशिक्षित जवानों ने घटनास्थल के आसपास बर्फ से ढके इलाकों में तलाशी शुरू की।इस दौरान बचाव दल को कुछ स्थानों पर ट्रेकर्स के टेंट, बैग और अन्य सामान भी मिले।इन वस्तुओं के आधार पर बचावकर्मियों ने संभावित स्थानों की पहचान कर तलाशी अभियान आगे बढ़ाया।हालांकि भारी बर्फ और मौसम की अनिश्चितता के कारण अभियान की गति प्रभावित होती रही।
मंगलवार को मिले थे दो शव
तीन नवंबर को मौसम में कुछ सुधार होने के बाद एसडीआरएफ और निम की संयुक्त टीम ने लगभग चार हजार मीटर की ऊंचाई पर दोबारा खोज अभियान शुरू किया।बचाव दल को बर्फ में दबे एक महिला और एक पुरुष के शव मिले।दोनों शवों को निकालने के लिए टीम को काफी मशक्कत करनी पड़ी।कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच बचावकर्मियों ने बर्फ हटाकर शवों को बाहर निकाला।इसके बाद प्रशासन को इसकी सूचना दी गई और हेलिकॉप्टर से शवों को नीचे लाने की व्यवस्था की गई।बचाव दल ने इस दौरान अन्य लापता लोगों की तलाश भी जारी रखी।
बुधवार को दो और शव मिले
बुधवार, चार नवंबर को चलाए गए अभियान में बचाव दल को दो अन्य लोगों के शव बरामद हुए।इसके साथ ही इस हादसे में बरामद शवों की संख्या चार हो गई।चारों मृतकों में दो महिलाएं और दो पुरुष शामिल बताए गए हैं।बचाव दल ने शवों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के लिए हेलिकॉप्टर की सहायता ली।दुर्गम पर्वतीय रास्तों और बर्फ से ढकी ढलानों के कारण शवों को पैदल नीचे लाना अत्यंत जोखिमपूर्ण था।इसलिए प्रशासन ने हवाई मार्ग का उपयोग करने का निर्णय लिया।अब शेष चार लापता लोगों की तलाश पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
खराब मौसम बन रहा बड़ी चुनौती
केदारताल ट्रैक उत्तराखंड के कठिन और ऊंचाई वाले पर्वतीय मार्गों में गिना जाता है।यहां मौसम अचानक बदल सकता है। ऊंचाई बढ़ने के साथ तापमान में गिरावट और बर्फबारी की संभावना भी बढ़ जाती है।हिमस्खलन के बाद कई स्थानों पर बर्फ की मोटी परत जम जाती है, जिससे बचावकर्मियों के लिए किसी व्यक्ति या वस्तु की पहचान करना कठिन हो जाता है।इसके अलावा खड़ी ढलान, फिसलन और दोबारा हिमस्खलन होने का खतरा भी बना रहता है।ऐसी परिस्थितियों में बचाव दल को बेहद सावधानी से आगे बढ़ना पड़ता है।विशेषज्ञों के अनुसार, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में राहत अभियान चलाते समय मौसम की स्थिति, उपलब्ध उपकरण और बचावकर्मियों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना जरूरी होता है।
चार लापता लोगों की तलाश जारी
हादसे के बाद से ही प्रशासन और बचाव एजेंसियां लापता लोगों का पता लगाने के प्रयास में जुटी हुई हैं।एसडीआरएफ और निम की टीमें संभावित स्थानों पर तलाशी अभियान चला रही हैं।प्रशासन के सामने अब चार अन्य लापता लोगों का पता लगाना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।हालांकि उनकी वर्तमान स्थिति के बारे में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।इस बीच ट्रेकर्स के परिजन अपने प्रियजनों के संबंध में जानकारी मिलने का इंतजार कर रहे हैं।चार शव मिलने से इस हादसे की गंभीरता और बढ़ गई है। बचाव दल प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद अभियान जारी रखे हुए है।
पर्वतीय ट्रैकिंग में सुरक्षा का महत्व
केदारताल की घटना ने एक बार फिर ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्रों में ट्रैकिंग के दौरान सुरक्षा तैयारियों की आवश्यकता को उजागर किया है।विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हिमालयी क्षेत्रों में ट्रैकिंग पर जाने से पहले मौसम संबंधी चेतावनियों की जानकारी लेना आवश्यक है।ट्रेकर्स को प्रशिक्षित गाइड, पर्याप्त गर्म कपड़े, संचार उपकरण और आपातकालीन सामग्री के साथ ही यात्रा करनी चाहिए।इसके अतिरिक्त स्थानीय प्रशासन को यात्रा की जानकारी देना और मौसम खराब होने पर सुरक्षित स्थान पर रुकना भी महत्वपूर्ण है।
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