उत्तराखंड

पदक जीतकर बढ़ाया मान अब नौकरी के इंतजार में खिलाड़ी

Kavita2
5 Sept 2026 4:09 PM IST
पदक जीतकर बढ़ाया मान अब नौकरी के इंतजार में खिलाड़ी
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देहरादून। 38वें राष्ट्रीय खेलों में शानदार प्रदर्शन कर उत्तराखंड का नाम रोशन करने वाले पदक विजेता खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी का इंतजार है। राष्ट्रीय खेलों में उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे बड़े राज्यों को पीछे छोड़ते हुए उत्तराखंड ने पदक तालिका में सातवां स्थान हासिल किया था। इस उपलब्धि के बाद प्रदेशभर में खिलाड़ियों की जमकर सराहना हुई और सरकार ने पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को नौकरी देने की घोषणा की। घोषणा को करीब डेढ़ वर्ष बीतने के बावजूद खिलाड़ियों को नौकरी कब मिलेगी, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।

जनसंख्या के लिहाज से देश में 19वें पायदान पर आने वाले उत्तराखंड के लिए राष्ट्रीय खेलों में सातवां स्थान हासिल करना बड़ी उपलब्धि माना गया। सीमित संसाधनों और अपेक्षाकृत कम आबादी वाले राज्य के खिलाड़ियों ने विभिन्न खेल स्पर्धाओं में दमदार प्रदर्शन किया। खिलाड़ियों की उपलब्धियों से प्रदेश में उत्साह का माहौल बना और खेलों में उत्तराखंड की बढ़ती ताकत की चर्चा हुई।

राष्ट्रीय खेलों में खिलाड़ियों के प्रदर्शन से उत्साहित प्रदेश सरकार ने भी उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए महत्वपूर्ण घोषणा की थी। सरकार ने कहा था कि पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी दी जाएगी। इस घोषणा से खिलाड़ियों और उनके परिवारों की खुशी दोगुनी हो गई थी। खिलाड़ियों को उम्मीद थी कि खेल के मैदान में उनकी मेहनत और उपलब्धि अब रोजगार के रूप में भी उनके भविष्य को मजबूत करेगी।

लेकिन समय बीतने के साथ खिलाड़ियों का इंतजार लंबा होता जा रहा है। घोषणा को लगभग डेढ़ वर्ष बीत चुका है, लेकिन पदक विजेता खिलाड़ियों को नौकरी देने की प्रक्रिया कब तक पूरी होगी, इस पर स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है। इससे उन खिलाड़ियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का गौरव बढ़ाया था।

खिलाड़ियों के लिए सरकारी नौकरी केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि खेल में उनके योगदान और उपलब्धियों को मिलने वाला संस्थागत सम्मान भी है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं की तैयारी में खिलाड़ी वर्षों तक मेहनत करते हैं। प्रशिक्षण, खेल उपकरण, यात्रा और फिटनेस जैसी जरूरतों पर भी उन्हें लगातार ध्यान देना पड़ता है। ऐसे में सरकारी नौकरी मिलने से खिलाड़ियों को आर्थिक सुरक्षा के साथ अपने खेल करियर को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

38वें राष्ट्रीय खेलों में उत्तराखंड के प्रदर्शन ने यह भी साबित किया था कि उचित प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर प्रदेश के खिलाड़ी देश के बड़े राज्यों को कड़ी चुनौती दे सकते हैं। उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे अधिक आबादी तथा व्यापक खेल ढांचे वाले राज्यों से आगे निकलकर सातवें स्थान पर पहुंचना प्रदेश के लिए विशेष उपलब्धि थी।

इस सफलता के बाद सरकार की ओर से नौकरी की घोषणा को खिलाड़ियों के मनोबल को बढ़ाने वाला कदम माना गया था। उम्मीद थी कि इससे प्रदेश में खेलों के प्रति युवाओं का रुझान बढ़ेगा और प्रतिभाशाली खिलाड़ी खेल को करियर के तौर पर अपनाने के लिए प्रेरित होंगे। हालांकि घोषणा के लंबे समय बाद भी नियुक्ति नहीं मिलने से अब सवाल उठने लगे हैं।

खिलाड़ियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि नौकरी देने की प्रक्रिया आखिर कब पूरी होगी। सरकारी घोषणा के बाद उन्हें उम्मीद थी कि जल्द ही विभागों और पदों की पहचान कर नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। लेकिन करीब डेढ़ वर्ष गुजरने के बावजूद यदि नियुक्ति की समयसीमा स्पष्ट नहीं है तो खिलाड़ियों की चिंता स्वाभाविक है।

प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए केवल पुरस्कार और घोषणाएं ही पर्याप्त नहीं मानी जा सकतीं। खिलाड़ियों को प्रशिक्षण सुविधाएं, बेहतर खेल मैदान, आधुनिक उपकरण, आर्थिक सहायता और रोजगार की सुरक्षा भी जरूरी है। यदि पदक विजेता खिलाड़ियों को समय पर नौकरी मिलती है तो इससे आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों में भी भरोसा पैदा होगा कि खेल के क्षेत्र में उपलब्धि हासिल करने पर सरकार उनके भविष्य को सुरक्षित करने में सहयोग करेगी।

उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां भी खिलाड़ियों के लिए अलग तरह की चुनौतियां पैदा करती हैं। पहाड़ी क्षेत्रों से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने वाले कई खिलाड़ियों को प्रशिक्षण और संसाधनों के लिए लंबा सफर तय करना पड़ता है। इसके बावजूद राष्ट्रीय खेलों में प्रदेश का सातवां स्थान हासिल करना खिलाड़ियों की मेहनत और क्षमता को दर्शाता है।

सरकार की घोषणा के बाद खिलाड़ियों ने रोजगार की उम्मीद बांध रखी है। अब आवश्यकता इस बात की है कि नियुक्ति से जुड़ी प्रक्रिया और समयसीमा स्पष्ट की जाए। इससे खिलाड़ियों के बीच बनी अनिश्चितता दूर होगी और वे अपने खेल तथा भविष्य की योजनाओं पर बेहतर तरीके से ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।

राष्ट्रीय खेलों में पदक जीतने वाले खिलाड़ी प्रदेश के लिए प्रेरणा बनकर सामने आए थे। उनकी सफलता ने उत्तराखंड को राष्ट्रीय खेल मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाई। ऐसे खिलाड़ियों को नौकरी देने की घोषणा यदि समयबद्ध तरीके से अमल में आती है तो यह न केवल पदक विजेताओं के लिए सम्मान होगा, बल्कि प्रदेश में खेल संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

फिलहाल पदक विजेता खिलाड़ियों की निगाहें सरकार की ओर टिकी हैं। मैदान में उन्होंने अपनी जिम्मेदारी निभाकर उत्तराखंड को गौरवान्वित किया, लेकिन अब करीब डेढ़ वर्ष बाद भी उन्हें उस सरकारी नौकरी का इंतजार है जिसकी घोषणा उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद की गई थी।

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