उत्तराखंड

पहाड़ों में उद्योग लगाने पर चार करोड़ तक मदद

Kavita2
10 Sept 2026 5:26 PM IST
पहाड़ों में उद्योग लगाने पर चार करोड़ तक मदद
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देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में लागू की गई एमएसएमई नीति-2023 उत्तराखंड के औद्योगिक विकास को नई दिशा दे रही है। वर्ष 2015 की पुरानी नीति के स्थान पर लाई गई इस नीति का मुख्य उद्देश्य राज्य के दुर्गम और पर्वतीय क्षेत्रों में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों की स्थापना को आसान बनाना है। इसके माध्यम से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने, स्वरोजगार को बढ़ावा देने और पहाड़ों से लगातार हो रहे पलायन पर प्रभावी रोक लगाने का लक्ष्य रखा गया है।

नई नीति में मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक तथा आर्थिक परिस्थितियों के अंतर को ध्यान में रखते हुए प्रोत्साहन का ढांचा तैयार किया गया है। पर्वतीय क्षेत्रों में उद्योग स्थापित करना मैदानी क्षेत्रों की तुलना में अधिक खर्चीला और चुनौतीपूर्ण होता है। परिवहन, बाजार तक पहुंच, भूमि की उपलब्धता, बिजली, पानी और अन्य आधारभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं के कारण उद्यमी पहाड़ों में निवेश करने से बचते रहे हैं। सरकार ने इन्हीं चुनौतियों को कम करने के लिए अधिक आर्थिक सहायता देने का प्रावधान किया है।

एमएसएमई नीति-2023 के अंतर्गत पर्वतीय जिलों में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग स्थापित करने वाले उद्यमियों को परियोजना की श्रेणी और पात्रता के अनुसार 20 लाख रुपये से लेकर चार करोड़ रुपये तक की सब्सिडी देने की व्यवस्था की गई है। सरकार का मानना है कि इस सहायता से उद्योग स्थापित करने की शुरुआती लागत का बोझ कम होगा और स्थानीय उद्यमियों के साथ बाहरी निवेशक भी पर्वतीय क्षेत्रों में इकाइयां लगाने के लिए आगे आएंगे।

नीति में स्थानीय संसाधनों के उपयोग को भी प्राथमिकता दी गई है। यदि कोई औद्योगिक इकाई उत्पादन में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कच्चे माल का इस्तेमाल करती है तो उसे 10 प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी का लाभ दिया जाएगा। इस प्रावधान से कृषि उत्पादों, फलों, जड़ी-बूटियों, सुगंधित पौधों, ऊन, हस्तशिल्प और वन आधारित संसाधनों से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

स्थानीय कच्चे माल का उपयोग बढ़ने से केवल उद्योगों को फायदा नहीं होगा, बल्कि किसानों, कारीगरों, स्वयं सहायता समूहों और छोटे उत्पादकों की आय भी बढ़ सकती है। औद्योगिक इकाइयों को उनके आसपास ही कच्चा माल उपलब्ध होने से परिवहन खर्च कम होगा। दूसरी ओर, स्थानीय उत्पादकों के लिए स्थायी बाजार तैयार होगा। इससे गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत करने और रोजगार की पूरी श्रृंखला विकसित करने में मदद मिल सकती है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि सरकार युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाना चाहती है। राज्य के ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में स्वरोजगार आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देकर युवाओं को अपने क्षेत्र में ही आजीविका उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि युवाओं को काम के लिए महानगरों या दूसरे राज्यों की ओर पलायन न करना पड़े।

एमएसएमई नीति के माध्यम से खाद्य प्रसंस्करण, पर्यटन, आयुष, वेलनेस, फार्मा, हस्तशिल्प, हथकरघा, जैविक उत्पाद, सूचना प्रौद्योगिकी और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना की संभावनाएं बढ़ी हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में बड़े उद्योगों के मुकाबले छोटे और मध्यम उद्योग अधिक उपयोगी माने जाते हैं, क्योंकि इन्हें कम भूमि और सीमित संसाधनों के साथ भी संचालित किया जा सकता है।

फल प्रसंस्करण, मसाला उत्पादन, शहद, मंडुवा, झंगोरा, दाल, अचार, जूस और अन्य स्थानीय उत्पादों से जुड़े उद्यमों के लिए पहाड़ी क्षेत्रों में व्यापक अवसर मौजूद हैं। उचित पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार संपर्क मिलने पर इन उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाया जा सकता है। नई नीति ऐसे उद्योगों को आर्थिक सहयोग देकर स्थानीय उत्पादों को व्यावसायिक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

सरकार उद्यमियों के लिए अनुमतियों की प्रक्रिया को आसान और समयबद्ध बनाने पर भी काम कर रही है। उद्योग स्थापित करने से जुड़ी विभिन्न स्वीकृतियों को एकल खिड़की प्रणाली के माध्यम से उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। इससे उद्यमियों को अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी और परियोजनाओं को जल्द शुरू करने में मदद मिलेगी।

औद्योगिक इकाइयों को सब्सिडी देने के साथ कौशल विकास भी नीति की सफलता के लिए महत्वपूर्ण है। नए उद्योगों की जरूरत के अनुसार स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा तो रोजगार में उनकी भागीदारी बढ़ सकेगी। होटल प्रबंधन, खाद्य प्रसंस्करण, पैकेजिंग, डिजिटल मार्केटिंग, मशीन संचालन और गुणवत्ता नियंत्रण जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण से युवाओं को अपने आसपास स्थापित इकाइयों में काम मिल सकता है।

एमएसएमई क्षेत्र को अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, क्योंकि इसमें अपेक्षाकृत कम निवेश में अधिक रोजगार पैदा करने की क्षमता होती है। छोटे उद्योग स्थानीय बाजार की जरूरतों को पूरा करने के साथ बड़े उद्योगों की आपूर्ति श्रृंखला से भी जुड़ सकते हैं। इन इकाइयों की स्थापना से परिवहन, पैकेजिंग, भंडारण, विपणन और सेवा क्षेत्रों में अप्रत्यक्ष रोजगार भी पैदा होता है।

राज्य में संचालित स्वरोजगार योजनाओं ने भी रोजगार निर्माण में भूमिका निभाई है। एक रिपोर्ट के अनुसार मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के अंतर्गत 35 हजार से अधिक लोग लाभान्वित हो चुके हैं और लगभग 64,966 रोजगार पैदा होने का दावा किया गया है। सरकार इन प्रयासों को पलायन रोकने और युवाओं को उद्यमिता से जोड़ने का माध्यम बता रही है। टाइम्स ऑफ इंडिया

विशेषज्ञों का मानना है कि सब्सिडी के साथ सड़क, बिजली, इंटरनेट, परिवहन और बाजार की सुविधाओं को भी मजबूत करना जरूरी होगा। उद्योगों की स्थापना के बाद उनका लंबे समय तक संचालन तभी संभव है, जब उन्हें पर्याप्त कच्चा माल, प्रशिक्षित कर्मचारी और उत्पादों की बिक्री के लिए स्थायी बाजार मिले। सरकार को स्वीकृत परियोजनाओं की नियमित निगरानी और सब्सिडी वितरण में पारदर्शिता भी सुनिश्चित करनी होगी।

एमएसएमई नीति-2023 से सरकार को उम्मीद है कि पहाड़ी क्षेत्रों में निवेश बढ़ेगा, स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे। नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से पर्वतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ पलायन की समस्या को कम करने में भी सहायता मिल सकती है।

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