उत्तराखंड

एमबीपीजी कॉलेज में आर्यन बेलवाल बने छात्र संघ अध्यक्ष, 16 साल में पांचवें निर्दलीय विजेता

Kavita2
30 Sept 2026 12:45 PM IST
एमबीपीजी कॉलेज में आर्यन बेलवाल बने छात्र संघ अध्यक्ष, 16 साल में पांचवें निर्दलीय विजेता
x

हल्द्वानी। एमबीपीजी कॉलेज के छात्र संघ चुनाव में विद्यार्थियों ने आर्यन बेलवाल पर भरोसा जताते हुए उन्हें अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी है। आर्यन ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतकर एक महत्वपूर्ण राजनीतिक उपलब्धि हासिल की है। पिछले 16 वर्षों में वह कॉलेज छात्र संघ के पांचवें निर्दलीय अध्यक्ष बने हैं। उनकी जीत के बाद समर्थकों में उत्साह का माहौल है, जबकि परिवार में भी खुशी की लहर है।

आर्यन बेलवाल की इस जीत के पीछे उनके पिता कृष्ण चंद्र बेलवाल की रणनीतिक भूमिका भी चर्चा में रही। चुनावी मैदान में प्रत्यक्ष रूप से आगे आने के बजाय उन्होंने पर्दे के पीछे से अपने बेटे का मार्गदर्शन किया। पुराने संगठनात्मक अनुभव और चुनावी प्रबंधन की समझ के सहारे उन्होंने पूरे अभियान की रणनीति तैयार करने में अहम भूमिका निभाई।

बताया जा रहा है कि चुनाव के दौरान कृष्ण चंद्र बेलवाल ने आर्यन को हर चरण पर सलाह दी। छात्र संपर्क से लेकर प्रचार की दिशा, समर्थकों के बीच समन्वय और मतदान के दिन की रणनीति तक कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर उन्होंने अपने अनुभव का इस्तेमाल किया। हालांकि वह खुद सार्वजनिक रूप से ज्यादा सक्रिय नजर नहीं आए और चुनावी अभियान का मुख्य चेहरा आर्यन ही बने रहे।

आर्यन ने भी पिता की सलाह को गंभीरता से लिया और उसी के आधार पर अपने चुनाव अभियान को आगे बढ़ाया। समर्थकों का कहना है कि उन्होंने व्यक्तिगत संपर्क को प्राथमिकता दी और विद्यार्थियों से सीधे संवाद किया। इसी रणनीति का असर मतदान में दिखाई दिया और विद्यार्थियों ने उन्हें अध्यक्ष पद के लिए चुना।

जीत के बाद आर्यन ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और समर्थकों को दिया। उन्होंने कहा कि यह जीत केवल उनकी नहीं बल्कि उन सभी विद्यार्थियों की है, जिन्होंने उन पर भरोसा जताया है। चुनाव परिणाम आने के बाद उन्होंने माता-पिता के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया और जीत उन्हें समर्पित की।

एमबीपीजी कॉलेज की छात्र राजनीति में निर्दलीय प्रत्याशियों की जीत हमेशा से खास मानी जाती रही है। आमतौर पर छात्र संगठनों से जुड़े प्रत्याशी मजबूत चुनावी मशीनरी और संगठनात्मक नेटवर्क के साथ मैदान में उतरते हैं। ऐसे में निर्दलीय प्रत्याशी के लिए चुनाव जीतना आसान नहीं होता।

आर्यन की जीत इसी कारण से अधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पिछले 16 वर्षों में केवल पांच निर्दलीय उम्मीदवार ही अध्यक्ष पद तक पहुंच सके हैं। इससे यह संकेत भी मिलता है कि छात्र मतदाता कई बार संगठन से अलग हटकर प्रत्याशी की व्यक्तिगत छवि, सक्रियता और स्थानीय संपर्क को प्राथमिकता देते हैं।

चुनाव के दौरान आर्यन ने कॉलेज से जुड़े विभिन्न मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। छात्रों की समस्याओं, सुविधाओं और प्रशासन से जुड़े सवालों को लेकर उन्होंने संवाद किया। उनका जोर इस बात पर रहा कि छात्र संघ केवल चुनावी मंच न बने, बल्कि विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान का प्रभावी माध्यम बने।

जीत के बाद उनके सामने अब सबसे बड़ी चुनौती चुनावी वादों को पूरा करने की होगी। कॉलेज में छात्र सुविधाओं, शैक्षणिक वातावरण, परिसर की व्यवस्थाओं और विद्यार्थियों की रोजमर्रा की समस्याओं को लेकर नई छात्र संघ टीम से अपेक्षाएं बढ़ गई हैं।

आर्यन के समर्थकों का कहना है कि चुनाव के दौरान उनकी सरल शैली और सीधे संवाद ने छात्रों को प्रभावित किया। उन्होंने अलग-अलग छात्र समूहों से संपर्क किया और किसी एक संगठन पर निर्भर रहने के बजाय व्यक्तिगत समर्थन जुटाने पर जोर दिया।

इस पूरी प्रक्रिया में उनके पिता कृष्ण चंद्र बेलवाल ने सलाहकार की भूमिका निभाई। पुराने संगठनात्मक अनुभव के कारण उन्हें चुनावी समीकरणों और छात्र राजनीति की बारीकियों की समझ थी। उन्होंने उसी अनुभव को बेटे की चुनावी रणनीति में इस्तेमाल किया।

हालांकि चुनावी अभियान में उनकी मौजूदगी सीमित रखी गई। इससे आर्यन को अपनी स्वतंत्र पहचान बनाने का मौका मिला। समर्थकों के बीच भी यही संदेश गया कि चुनाव का केंद्र आर्यन और उनके मुद्दे हैं, जबकि परिवार केवल मार्गदर्शन की भूमिका में है।

चुनाव परिणाम आने के बाद कॉलेज परिसर में समर्थकों ने जीत का जश्न मनाया। छात्र-छात्राओं ने आर्यन को बधाई दी और नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं। कई समर्थकों ने इसे छात्र राजनीति में स्वतंत्र उम्मीदवारों के लिए सकारात्मक संकेत बताया।

एमबीपीजी कॉलेज में छात्र संघ चुनाव हमेशा से स्थानीय राजनीति और युवा नेतृत्व के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जाते हैं। यहां से छात्र राजनीति की शुरुआत करने वाले कई चेहरे आगे चलकर सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं।

आर्यन की जीत को भी उनके राजनीतिक और सामाजिक सफर की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। अब यह देखना होगा कि वह छात्र संघ अध्यक्ष के रूप में किस तरह काम करते हैं और विद्यार्थियों की अपेक्षाओं पर कितना खरा उतरते हैं।

चुनाव में जीत के बाद आर्यन ने कहा कि उनकी प्राथमिकता सभी विद्यार्थियों को साथ लेकर चलना होगी। वह संगठन या विचारधारा से ऊपर उठकर कॉलेज के छात्र हित से जुड़े मुद्दों पर काम करना चाहते हैं।

उनके सामने छात्र संघ में समन्वय बनाए रखना भी महत्वपूर्ण रहेगा। अलग-अलग पदों पर चुने गए प्रतिनिधियों के साथ तालमेल बैठाकर ही छात्र संघ प्रभावी रूप से काम कर सकेगा।

एमबीपीजी कॉलेज में 16 साल के भीतर पांचवें निर्दलीय अध्यक्ष के रूप में आर्यन बेलवाल की जीत ने छात्र राजनीति में नया संदेश दिया है। यह परिणाम बताता है कि मजबूत संगठन के बिना भी व्यक्तिगत संपर्क, रणनीति और छात्र समर्थन के आधार पर चुनाव जीता जा सकता है।

फिलहाल कॉलेज में नई छात्र संघ टीम के गठन के साथ ही विद्यार्थियों की निगाहें आर्यन बेलवाल के अगले कदम पर हैं। चुनावी जीत के बाद अब उनके सामने जिम्मेदारी का दौर शुरू हो गया है और छात्रों को उम्मीद है कि वह अपने कार्यकाल में उनकी आवाज को मजबूती से उठाएंगे।

Next Story