उत्तराखंड

अर्द्धकुंभ की तैयारियों के बीच 40 लाख का ड्रोन लापता, उड़ान भरते ही टूटा संपर्क

Kavita2
9 Oct 2026 11:31 AM IST
अर्द्धकुंभ की तैयारियों के बीच 40 लाख का ड्रोन लापता, उड़ान भरते ही टूटा संपर्क
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हरिद्वार। उत्तराखंड के हरिद्वार में अर्द्धकुंभ की तैयारियों के लिए मंगाया गया करीब 40 लाख रुपये कीमत का ड्रोन उड़ान भरने के बाद लापता हो गया। यह ड्रोन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की से हरिद्वार मंगाया गया था। इसका इस्तेमाल अर्द्धकुंभ से संबंधित मैपिंग और अन्य कार्यों के लिए किया जाना था। उड़ान भरने के बाद ड्रोन का कोई पता नहीं चल सका। इसकी आखिरी लोकेशन उत्तर हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में दर्ज हुई थी। काफी तलाश के बावजूद ड्रोन नहीं मिलने पर शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया है।

इस घटना के बाद अर्द्धकुंभ की तैयारियों में इस्तेमाल होने वाले तकनीकी उपकरणों की सुरक्षा और निगरानी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। लाखों रुपये की कीमत वाला ड्रोन आखिर कहां गया, यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। अब ड्रोन की अंतिम लोकेशन और उड़ान से जुड़ी जानकारी के आधार पर उसके लापता होने की परिस्थितियों का पता लगाना महत्वपूर्ण होगा।

आईआईटी रुड़की से मंगाया गया था ड्रोन

जानकारी के अनुसार, हरिद्वार में अर्द्धकुंभ की तैयारियों के तहत विभिन्न क्षेत्रों की मैपिंग का काम किया जाना था। इसी उद्देश्य से आईआईटी रुड़की से एक ड्रोन मंगाया गया था।

ड्रोन की कीमत करीब 40 लाख रुपये बताई जा रही है। इस उपकरण का इस्तेमाल मैपिंग जैसे तकनीकी कार्यों के लिए होना था।

बड़े धार्मिक आयोजनों की तैयारियों में क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और व्यवस्थाओं की जानकारी जुटाना महत्वपूर्ण होता है। ऐसे कार्यों में ड्रोन तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है।

हालांकि, हरिद्वार में मंगाए गए इस ड्रोन से किन-किन क्षेत्रों की मैपिंग की जानी थी, इसका विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।

ड्रोन को उड़ाने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद ही उसके लापता होने की घटना सामने आ गई।

उड़ान भरने के बाद नहीं मिला ड्रोन

बताया गया है कि ड्रोन को हरिद्वार में उड़ाया गया था, लेकिन उड़ान भरने के बाद वह लापता हो गया।

इसके बाद उसकी तलाश शुरू की गई। ड्रोन की लोकेशन के आधार पर उसका पता लगाने का प्रयास किया गया, लेकिन काफी खोजबीन के बावजूद वह नहीं मिल सका।

फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि ड्रोन उड़ान भरने के कितनी देर बाद लापता हुआ और उस समय वह कितनी ऊंचाई पर था।

इसके अलावा ड्रोन के तकनीकी सिस्टम में कोई खराबी आई थी या वह किसी अन्य कारण से निर्धारित स्थान तक वापस नहीं पहुंचा, इसकी भी पुष्टि नहीं हुई है।

इसलिए ड्रोन के गिरने, चोरी होने या तकनीकी खराबी के कारण लापता होने को लेकर अभी कोई निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

भूपतवाला क्षेत्र में मिली आखिरी लोकेशन

लापता ड्रोन की अंतिम लोकेशन उत्तर हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में दर्ज हुई थी।

यह जानकारी ड्रोन की तलाश के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। किसी भी उड़ने वाले उपकरण की अंतिम दर्ज लोकेशन से उसके संभावित रास्ते और अंतिम गतिविधि के बारे में जानकारी मिल सकती है।

हालांकि, आखिरी लोकेशन मिलने का अर्थ यह नहीं है कि ड्रोन उसी स्थान पर गिरा हो या वहां मौजूद हो।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भूपतवाला क्षेत्र में लोकेशन मिलने के बावजूद ड्रोन का पता नहीं चल सका।

ड्रोन की अंतिम स्थिति और उसके बाद की गतिविधियों का विवरण अभी सामने नहीं आया है।

काफी तलाश के बाद भी नहीं लगा सुराग

ड्रोन लापता होने के बाद उसकी तलाश की गई। अंतिम लोकेशन के आधार पर उसका पता लगाने का प्रयास किया गया, लेकिन खोजबीन के बावजूद कोई सफलता नहीं मिली।

करीब 40 लाख रुपये कीमत का उपकरण लापता होने से मामला गंभीर हो गया है।

ड्रोन के नहीं मिलने के कारण उसके वर्तमान स्थान और स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

यह भी स्पष्ट नहीं है कि ड्रोन में लगे उपकरणों से कोई अतिरिक्त तकनीकी जानकारी प्राप्त हुई है या नहीं।

फिलहाल, उपलब्ध विवरण में ड्रोन के किसी हिस्से की बरामदगी या उसके मिलने की पुष्टि नहीं की गई है।

शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज

ड्रोन का पता नहीं चलने के बाद हरिद्वार की शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया है।

मुकदमा दर्ज होने के बाद ड्रोन के लापता होने की परिस्थितियों का पता लगाने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि मुकदमा किसकी शिकायत पर दर्ज किया गया और किन धाराओं के तहत मामला पंजीकृत हुआ है।

इसके अलावा पुलिस की ओर से अब तक की गई जांच या किसी व्यक्ति से पूछताछ के संबंध में भी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।

ड्रोन की अंतिम लोकेशन, उड़ान से संबंधित रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध जानकारी से घटना के कारणों को समझने में मदद मिल सकती है।

अर्द्धकुंभ की मैपिंग के लिए महत्वपूर्ण था उपकरण

हरिद्वार में अर्द्धकुंभ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन की तैयारियों में विभिन्न क्षेत्रों की मैपिंग महत्वपूर्ण कार्यों में शामिल हो सकती है।

ड्रोन तकनीक की मदद से किसी क्षेत्र की हवाई तस्वीरें और भौगोलिक जानकारी जुटाई जा सकती है। इससे आयोजन स्थल और आसपास के क्षेत्रों की स्थिति समझने में सहायता मिलती है।

आईआईटी रुड़की से मंगाए गए ड्रोन का उद्देश्य भी मैपिंग जैसे कार्यों में उपयोग करना था।

हालांकि, इस उपकरण के लापता होने से अर्द्धकुंभ की तैयारियों पर कितना असर पड़ा है, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।

यह भी स्पष्ट नहीं है कि संबंधित मैपिंग कार्य के लिए किसी दूसरे ड्रोन की व्यवस्था की गई है या नहीं।

40 लाख के ड्रोन के लापता होने से उठे सवाल

करीब 40 लाख रुपये कीमत का ड्रोन उड़ान भरने के बाद लापता होना एक गंभीर घटना है।

इतनी अधिक कीमत वाले उपकरण के मामले में उसकी उड़ान, संचालन और निगरानी से जुड़ी व्यवस्थाएं महत्वपूर्ण होती हैं।

इस घटना में यह जानना जरूरी होगा कि ड्रोन ने निर्धारित उड़ान मार्ग का पालन किया था या नहीं और अंतिम लोकेशन दर्ज होने के बाद उससे संबंधित जानकारी क्यों नहीं मिल सकी।

हालांकि, इन सवालों के जवाब अभी उपलब्ध नहीं हैं। घटना की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट होने के बाद ही ड्रोन के लापता होने का कारण सामने आ सकेगा।

फिलहाल, किसी तकनीकी खराबी या अन्य वजह को घटना का निश्चित कारण नहीं बताया जा सकता।

ड्रोन का पता लगना अभी बाकी

हरिद्वार में अर्द्धकुंभ की तैयारियों के लिए आईआईटी रुड़की से मंगाया गया ड्रोन उड़ान भरने के बाद लापता है।

इसकी कीमत करीब 40 लाख रुपये बताई जा रही है। ड्रोन की आखिरी लोकेशन उत्तर हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में दर्ज हुई थी।

काफी तलाश के बाद भी उपकरण का पता नहीं चल सका है। मामले में शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया है।

अब यह स्पष्ट होना बाकी है कि ड्रोन किस कारण लापता हुआ और वह कहां है। फिलहाल, इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल 40 लाख रुपये के ड्रोन का पता लगाने और उसके लापता होने की वास्तविक वजह जानने का है।

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